पूरी दुनिया को है UN में पीएम मोदी की स्पीच का इंतजार, 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करेंगे

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका जा रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना के कहर से दुनियाभर के मुल्क अपनी अर्थव्यवस्था की गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उधर पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान में आतंकी संगठन तालिबान ने सत्ता हथिया ली है। ऐसे में अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर हैं। वह 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करेंगे। इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति जो बाइडन व्हाइट हाउस में पीएम मोदी की अगवानी करेंगे। यहां द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश होगी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने कहा कि यूएन में 25 सितंबर को होने वाली पीएम नरेंद्र मोदी की स्पीच का पूरी दुनिया को इंतजार है। उन्होंने कहा कि ‘दुनियाभर में सबसे ज्यादा जिन नेताओं की स्पीच का इंतजार रहता है, पीएम मोदी उनमें से एक हैं।’
दरअसल, पीएम मोदी के संबोधन टू-द-पॉइट्स और धारदार रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा तो वहीं चीन को भी सुनाया जो सुरक्षा परिषद में आतंकियों को बचाने का काम करता है। उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने तत्कालीन प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। PM ने न सिर्फ भारत के महत्व और चिंताओं की बात की है बल्कि घरेलू मोर्चे पर मिली उपलब्धियों से भी दुनिया को रूबरू कराया है।
इस साल महासभा की डिबेट के केंद्र में कोविड-19 महामारी है। अमेरिका में महामारी के हालात में सुधार देखा गया है और वैक्सीनेशन के उपाय भी किए गए हैं। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र हाइब्रिड फॉर्मेट में 76वीं UNGA आयोजित कर रहा है। इस बार महासभा के सत्र में कोरोना के अलावा दुनिया में आर्थिक मंदी, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, अफगानिस्तान के ताजा हालात, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा छाया रह सकता है। पीएम मोदी वैश्विक मंच से अफगानिस्तान में तालिबान सरकार पर अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं।
मोदी पर क्यों है दुनिया की नजरें
विकसित देशों की बातें तो वे जोरदार तरीके से वैश्विक मंच पर रख लेते हैं लेकिन विकासशील देशों की प्रखर आवाज भारत बनता आ रहा है। सुरक्षा परिषद के सदस्य भी भारत की बातों को गंभीरता से सुनते हैं और फिर उसे जलवायु परिवर्तन, विकास लक्ष्यों, सबको सस्ती वैक्सीन की उपलब्धता, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक रिकवरी, महिला सशक्तीकरण, आतंकवाद के खिलाफ जंग, शांति मिशन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार आदि जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ते हैं।
चीन भी होगा बेचैन
पीएम के दौरे पर चीन की पैनी नजर होगी। हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसकी हरकतों पर अंकुश लगाने और शक्ति संतुलन स्थापित करने के लिए बने क्वाड देशों के सदस्यों की पहली बार व्यक्तिगत रूप से बैठक होनी है। चीन इस समूह को अपने लिए चुनौती मान रहा है। 24 सितंबर शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन प्रधानमंत्री मोदी, जापान के पीएम सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ व्हाइट हाउस में पहली बार व्यक्तिगत रूप से क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका के साथ मिलकर एक अहम सुरक्षा समझौता किया है। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बी मिलेगी। इस पर चीन ही नहीं उत्तर कोरिया की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। चीन ने कहा है कि इस कदम से क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ेगी।
अमेरिका में मोदी का कार्यक्रम जानिए
– 23 सितंबर को अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी।
– डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो बाइडन के जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद से दोनों नेताओं के बीच कई बार डिजिटल माध्यमों से बातचीत हुई है। पिछली बार प्रधानमंत्री मोदी सितंबर 2019 में अमेरिका यात्रा पर आए थे। तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ह्यूस्टन में हाउडी-मोदी कार्यक्रम को संबोधित किया था।
– मोदी की अमेरिका यात्रा लगभग छह महीनों में उनकी पहली विदेश यात्रा होगी जबकि कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद वह दूसरी बार किसी देश की यात्रा आएंगे। इससे पहले मार्च में मोदी ने बांग्लादेश की यात्रा की थी।
-एजेंसियां

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