तबलीगी से लेकर अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स तक के कट्टरपंथियों की हरकत से सारी दुनिया परेशान

भारत और पाकिस्तान में कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती से खड़े स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिसकर्मियों के साथ तबलीगी जमात के कट्टरपंथी समर्थकों की बदसलूकी की घटनाएं सामने आ रही हैं।
इनकी वजह से भारत में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़े हैं। इन्होंने नियमों का उल्लंघन कर न सिर्फ जमघट लगाया, बल्कि उनकी जांच कर रहे मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजी भी कर रहे हैं। दुनिया में ये अकेले कट्टरपंथी नहीं हैं जो कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर रहे हैं, इजरायल में भी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय भी धार्मिक नेताओं की बात मानकर सरकारी गाइडलाइन की अवहेलना करते रहे हैं और नतीजा यह है कि उस समुदाय के आम से लेकर खास सभी कोरोना के चपेटे में हैं।
इजरायल का बनेई ब्राक इलाका कोरोना का केंद्र बन गया। यहां कट्टरपंथी धड़े ने दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए दुकानें खोल रखी थीं जिससे निपटने में स्थानीय प्रशासन को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। अब सेना जल्द ही स्थानीय प्रशासन की मदद को सड़क पर उतरने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि 40 प्रतिशत आबादी पहले ही संक्रमित हो चुकी है।
दरअसल, यह दिक्कत इसलिए आ रही है कि क्योंकि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय अपने धर्म गुरुओं की बातों का अंधा-अनुसरण कर रहे हैं। इजरायल का अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय भीड़भाड़ वाले पिछड़े इलाकों में रहता है जहां वायरस तेजी से फैला है। छोटी जगहों में एक साथ कई लोग जमा होते हैं और प्रार्थना में हिस्सा लेते हैं। हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एच लेविने कहते हैं, ‘मैं बेहद चिंतित हूं क्योंकि हमने अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स कम्युनिटी में तेजी से संक्रमण फैलते देखा है और इजरायल की आबादी में भी।’
इजरायल में सेक्युलर और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स एक दूसरे को संदेह से देखते हैं और उनके बीच हमेशा ही तनाव की स्थिति रहती है । यहां के स्वास्थ्य मंत्री याकोव लित्जमैन भी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स सोसायटी से आते हैं और कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वह हाल के सप्ताह में धार्मिक सभाओं में भीड़ पर बैन लगाने से इंकार करते रहे हैं। और वे खुद नियमों की अनदेखी करके प्रार्थना में हिस्सा लेते रहे हैं।
जब इजरायल में स्कूल, ऑफिस और इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद हो रहे थे लित्जमैन इसका विरोध कर रहे थे। वह इस भीड़ में अकेले नहीं हैं। उनके जैसे अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स समुदाय के और भी नेता है जो मानते हैं कि धार्मिक सभाओं को बंद करना वायरस से ज्यादा खतरनाक है।
-एजेंसियां

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