वंशवाद पर उप राष्‍ट्रपति ने कहा, लोकतंत्र में वंशवाद बुरी बात है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये टेस्टी है

नई दिल्‍ली। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी द्वारा लिखी किताब लोकतंत्र के उत्सव की अनकही कहानी के विमोचन पर उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि वंशवाद और लोकतंत्र के बीच का फर्क सामान्य है। वंशवाद के मुद्दे पर पर्याप्त बहस हो चुकी है। मैं वंशवाद के मुद्दे पर पहले भी कई बार कह चुका हूं लेकिन अब जबकि मैं राजनीति से बाहर हूं यह कहने में संकोच होता है। लोकतंत्र में वंशवाद बुरी बात है लेकिन कुछ लोगों के लिए ये टेस्टी है। यह हमारे तंत्र की कमजोरी है।
भारत की राजनीति में वंशवाद का मुद्दा दशकों से चल रहा है। आम तौर पर कांग्रेस पार्टी को इस बात के लिए निशाना साधा जाता रहा है कि गांधी-नेहरू परिवार का ही कोई सदस्य सियासत की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठने का अधिकारी है लेकिन समय गुजरने के साथ ये देखा गया कि वंशवाद की ये परंपरा कांग्रेस तक ही सीमित नहीं रही। देश के अलग अलग राज्यों में अपनी पकड़ को मजबूत बनाने के लिए क्षेत्रीय दल कांग्रेस को गाली देते थे।
उप राष्ट्रपति ने कहा, एक सच ये भी है कि वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को गाली देने वाले क्षेत्रीय दलों के वही नेता खुद वंशवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इस संबंध में राहुल गांधी भारत की धरती पर बोलने से बचते रहते हैं लेकिन अपने अमेरिकी दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में वंशवाद एक सच्चाई, जिससे आप इंकार नहीं कर सकते हैं। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी की किताब के विमोचन के मौके पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि लोकतंत्र के लिए वंशवाद खराब है।
वेंकैया नायडू ने कहा कि वो किसी खास पार्टी या किसी खास शख्स के बारे में नहीं कह रहे हैं। वो ये भी नहीं कह रहे हैं कि कौन किसका अनुसरण कर रहा है लेकिन लोकतंत्र में चरित्र, कैलिबर, क्षमता और आचरण का महत्व है। राजनीति में जाति, संप्रदाय या धन का महत्व नहीं होना चाहिए। अपने भाषण के अंत में हल्के-फुल्के अंदाज में उन्‍होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है कि वो स्पष्टता के साथ अपनी बात रखते हैं लेकिन मुझे अब इस प्रवृत्ति को छोड़ना पड़ेगा, लोग कहते हैं अब आप उप राष्ट्रपति बन चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया लेकिन हाल ही में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में राहुल गांधी द्वारा वंशवाद के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारों की राय
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मीम अफजल ने कहा कि संवैधानिक पद पर आसीन किसी शख्स को इस तरह का बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रेट ब्रिटेन में वंशवाद होने के बाद भी लोकतंत्र बेहतर ढंग से काम कर रहा है। जहां तक कांग्रेस पार्टी की बात है, पार्टी के अंदर लोकतंत्र कायम है और हर एक को अपनी बात कहने का अधिकार है।
कांग्रेस नेता मीम अफजल के बयान पर वरिष्ठ पत्रकार आर राजगोपालन ने कहा कि अमेरिका में राहुल गांधी के बयान से एक बात तो साफ है कि उनकी राजनीतिक समझ शून्य है। उनकी अनुभवहीनता साफ नजर आती है। विदेशी धरती पर भारत को गाली देना या भारत की नकारात्मक छवि पेश करने से उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला है। इसके अलावा इस तरह का बयान देकर वो अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। सच तो ये है कि आप अपने मैदान पर विरोधी नेताओं के खिलाफ बयान दे सकते हैं लेकिन जब आप बाहर जाकर सरकार की घेरेबंदी करते हैं तो वो एक तरह भारत सरकार की नीतियों की आलोचना होती है।
‘राजनीति से लेकर व्यापार तक वंशवाद’
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि भारत में राजनीति से लेकर कारोबार तक में वंशवाद है। एक सवाल के जवाब में राहुल ने भारत में वंशवाद के मुद्दे पर कहा, ‘भारत में ज्यादातर पार्टियों के साथ यह समस्या है अखिलेश यादव भी वंशवादी हैं। एम करुणानिधि के बेटे स्टालिन भी वंशवादी हैं। भाजपा के (प्रेम कुमार) धूमल के बेटे भी वंशवादी हैं। यहां तक कि अभिषेक बच्चन भी वंशवादी हैं। भारत ऐसे ही चलता है। तो मेरे पीछे नहीं पड़ें, क्योंकि भारत में ऐसे ही चलता है। अंबानी परिवार व्यापार चला रहा है। इंफोसिस में भी ऐसा चल रहा है।’ हालांकि, राहुल ने यह भी कहा कि कांग्रेस में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो किसी वंशवादी परिवार से नहीं हैं।
राहुल गांधी के वंशवाद के बयान पर वेंकैया नायडू की कड़ी प्रतिक्रिया को वरिष्ठ पत्रकार आर राजगोपालन ने दुख और गुस्से का इजहार बताया। उन्होंने कहा कि वेंकैया नायडू पिछले 40-50 साल से भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। देश और राज्यों की राजनीति के साथ आपातकाल के दौर को देखा है लिहाजा आप उनकी बुद्धिमता पर सवाल नहीं उठा सकते हैं। उप राष्ट्रपति नायडू ने ठीक ही कहा कि लोकतंत्र के लिए वंशवाद को अच्छा नहीं कहा जा सकता है। वंशवाद की राजनीति कुछ लोगों के लिये बेहतर हो सकती है लेकिन समाज, राज्य और देश का नुकसान होता है।
-एजेंसी