अमेरिका ने भी फ़ाइज़र की कोविड वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी

वॉशिंगटन। अमेरिका ने फ़ाइज़र-बायोटेक कोविड वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है. अमेरिका में पहले से ही इसे मंज़ूरी देने का दबाव था. अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स ऐडनिस्ट्रेशन यानी एफ़डीए पर इसे मंज़ूरी देने का दबाव था.
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ एफ़डीए के प्रमुख स्टीफ़न हान से कह दिया गया था कि वो या तो इस वैक्सीन को मंज़ूरी दें या पद छोड़ दें. हालांकि उन्होंने इन रिपोर्ट्स को ग़लत बताया था.
गुरुवार को एफ़डीए के विशेषज्ञों ने भी इस वैक्सीन की वकालत की थी. इसके बाद अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस पर तत्काल निर्णय लेने के लिए कहा था. फ़ाइज़र वैक्सीन को ब्रिटेन, कनाडा बहरीन और सऊदी अरब ने पहले ही मंज़ूरी दे दी है.
बुधवार को अमेरिका में कोविड-19 से 3000 लोगों की मौत हुई थी. यह एक दिन में कोरोना से मौत का अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा था.
गुरुवार को मेडिकल विशेषज्ञों ने एफ़डीए से फ़ाइज़र वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति देने की सिफ़ारिश की थी. 23 सदस्यों के इस पैनल ने कहा था कि वैक्सीन से जोखिम कम और फ़ायदे ज़्यादा हैं.
इसके बाद एफ़डीए ने अपने बयान में कहा था कि फ़ाइज़र वैक्सीन कंपनी को हालिया प्रगति को लेकर सूचित कर दिया गया है. एफ़डीए ने यह भी कहा था कि अमेरिकी सेंटर्स फोर डिजीज कंट्रोल और प्रिवेंशन एंड ऑपरेशन को भी वैक्सीन वितरण को लेकर आगाह कर दिया गया है.
एफ़डीए को झुकना पड़ा?
शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एफ़डीए को लेकर ग़ुस्से में ट्वीट किया था. उन्होंने एफ़डीए को ‘पुराना’ और ‘धीमा कछुआ’ कहा था.
ट्रंप ने एफ़डीए के प्रमुख डॉ स्टीफ़न हान को संबोधित करते हुए लिखा था- डॉ हान गेम खेलना बंद कीजिए और ज़िंदगी बचाना शुरू कीजिए.
वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन सूत्रों के हवाले से लिखा था कि व्हाइट हाउस के चीफ़ ऑफ स्टाफ़ मार्क मीडोस ने एफडीए प्रमुख को आदेश दिया था कि वो शुक्रवार तक वैक्सीन को मंज़ूरी दें या अपना इस्तीफ़ा भेज दें. अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ने पूरे विवाद पर कहा था कि वैक्सीन में राजनीतिक दबाव की कोई जगह नहीं है.
मंज़ूरी देने वाला ब्रिटेन पहला देश
ब्रिटेन पहला देश है जिसने फ़ाइज़र द्वारा विकसित कोविड वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी दी थी. ब्रिटेन के दवा नियामक ने फ़ाइज़र को फ़िलहाल इस वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए एक अस्थायी मंज़ूरी दी है.
साथ ही कहा है कि यह टीका जो कोविड-19 से 95 प्रतिशत तक बचाव का दावा करता है, वह इस्तेमाल में लाए जाने के लिए सुरक्षित है.
पिछले सप्ताह ही ब्रिटेन के दवा नियामक ने इस वैक्सीन के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी थी. हालांकि, ब्रिटेन में वैक्सीन लगवाना अनिवार्य नहीं है.
फ़ाइज़र ने भारतीय दवा नियामक से भी अनुमति माँगी
दवा कंपनी ‘फ़ाइज़र इंडिया’ ने भारत में भी अपनी कोविड वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए भारतीय दवा नियामक (ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया) से अनुमति माँगी है.
ब्रिटेन और बहरीन में मंज़ूरी मिलने के बाद, कंपनी चाहती है कि उसे भारत में भी अपनी कोविड वैक्सीन की बिक्री और वितरण का अधिकार मिले.
कंपनी के अनुसार यह टीका दो बार यानी दो डोज़ में दिया जाता है. फ़ाइज़र के इस टीके को बहरीन ने भी मंज़ूरी दे दी है. शुक्रवार को बहरीन प्रशासन ने इसकी घोषणा की थी.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के मामले में इस वैक्सीन के सामने कुछ चुनौतियाँ हैं. जैसे, माइनस 70 डिग्री पर इस टीके को स्टोर करने की आवश्यकता, भारत जैसे देशों में इस वैक्सीन की डिलीवरी के लिए एक बड़ी चुनौती है. ख़ासकर, छोटे कस्बों या शहर से दूर के इलाक़ों में इस टीके को माइनस 70 डिग्री पर रख पाना, भारतीय प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी.
-BBC

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