कुंभ मेले के तीसरे और आखिरी शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी

प्रयागराज। बसंत पंचमी को पड़ने वाले कुंभ मेले के तीसरे और आखिरी शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आज प्रयागराज में जुटी रही। त्रिवेणी संगम के तट पर रविवार तड़के से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया। बसंत पंचमी के दिन संगम में स्नान का विशेष महत्व है। योगी सरकार ने आस्था के इस महापर्व पर जुटने वाली भीड़ को ध्यान में रखकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। सरकार का अनुमान है कि आखिरी शाही स्नान के मौके पर करीब 3 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे।
परंपरा के मुताबिक आज सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने शाही स्नान किया। उसके साथ श्री पंचायती अटल अखाड़ा ने भी स्नान करने की परंपरा निभाई। दोनों अखाड़े अपने सेक्टर 16 स्थित शिविर से 5:15 बजे शाही जुलूस के साथ निकले।
दूसरे क्रम में श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा और तपोनिधि श्री पंचायती आनन्द अखाड़ा ने शाही स्नान किया। जिसके बाद श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा और श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा ने सुबह 8 बजे एक साथ शाही स्नान किया। इसके बाद बैरागी अखाड़ों के शाही स्नान का क्रम शुरु हुआ। इसमें सबसे पहले अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा ने 10:40 बजे शाही स्नान किया। उसके बाद अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा ने 11:20 बजे और अखिल भारतीय पंच निर्मोही अनी अखाड़ा ने 12:20 बजे शाही स्नान किया।
संगम घाट पर स्नान के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं
मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दौरान आम लोगों के अखाड़ा मार्ग में घुसने के बाद पैदा हुई समस्या को देखते हुए तीसरे शाही स्नान के लिए अतिरिक्त फोर्स लगायी गयी थी। शनिवार को सुबह से वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त लगने के कारण स्नान शुरू हो गया है। करीब 50 लाख लोगों ने शनिवार को ही संगम में डुबकी लगा ली। हालांकि, आज शाही स्नान के साथ बड़ी संख्या में लोगों ने स्नान किया। इसे देखते हुए मेला क्षेत्र में वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।
इन रास्तों का रखें विशेष ध्यान
मेले में संगम के करीब के पांटून ब्रिज संख्या 1 से 5 तक पर आम लोगों का आवागमन भी प्रतिबंधित रहा। 8 किलोमीटर के दायरे में फैले 40 घाटों पर श्रद्धालु स्नान करते दिखाई दिए। जिलाधिकारी कुंभ विजय किरण आनंद ने बताया कि मध्य प्रदेश की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं को अरैल में, पूर्वांचल की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं को झूंसी में और दिल्ली व कानपुर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को संगम घाट पर स्नान की व्यवस्था की गई।
बसंत पंचमी के दिन नदियों में स्नान के लिए जुटती है भारी भीड़
माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के तौर पर मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर त्रिवेणी संगम में स्नान करता है, उसे पूर्ण कुंभ स्नान का फल मिलता है। बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी सरस्वती का जन्म हुआ था। संगम के अलावा अन्य पवित्र नदियों में स्नान के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटती है। मौनी अमावस्या पर भारी भीड़ को देखने के बाद योगी सरकार ने बसंत पंचमी के लिए भी सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
-एजेंसियां

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