ताज को एयर ट्रैफि‍क के प्रदूषण से खतरा होने की बात बेबुनि‍याद

आगरा। ताजमहल के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहा एमसी मेहता बनाम संघ सरकार वाद में उप्र सरकार और ताज ट्रि‍पेजि‍यम जोन अथॉर‍िटी को यह बताना चाहि‍ये कि ताजमहल को वायुयानों के संचालन से कोई खतरा नहीं है। हवाई जहाज वायुमंडल की स्ट्रैटोस्फियर परत में उड़ान भरता है उस पर अभी तक कभी न तो नीरी या ताज ट्रि‍पेजि‍यम जोन और नहीं प्रदूषण नि‍यंत्रण बोर्डों का अध्‍ययन वि‍षय रही। सामान्‍य जानकारी के अनुसार वायुयान अपने गंतव्‍य की ओर उडान भरने से पूर्व रनवे से फनल एरि‍या को तय कर एयरकॉरीडोर में उडान भरते है। यह फनल एरि‍या तजमहल के कोर जोन के वि‍परीत एरि‍या में और दस कि‍ मी एरि‍यल डि‍स्‍टैंस से कहीं अधि‍क दूरी पर एयफोर्स स्‍टेशन के कंट्रोल रेखांकि‍त है।

सि‍वि‍ल एयरक्राफ्ट के द्वारा अपने गंतव्‍यों के आने जाने के लि‍ये वायुयानों के लि‍ये जो मार्ग निर्धारि‍त कि‍या हुआ है, उससे ताजमहल के प्रदूषण खतरे की बात कहना और सोचना व्‍यर्थ की कल्‍पना तथा नागरि‍क हि‍तो की सही प्रकार से पैरबी करने न पहुंच सकने की स्‍थि‍ति का उन लोगों के द्वारा अनुचि‍त लाभ उठाना है।

अब जब कि हवाई जहाज जि‍स वायुमंडल परत समतापमण्डल(स्ट्रैटोस्फियर) में या उससे ऊपर उडान भरते हैं तो हवाई जहाज के परि‍चालन को ताजमहल के खतरे से जोडकर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्‍तुत करना केवल उन काल्‍पनि‍क खतरों की बात करना है जि‍नका जमीनी हकीकत से कोयी लेना देना ही नहीं है।

वैसे भी जब सि‍वि‍ल एयरपोर्ट का अपना कोई फनल एरि‍या नहीं है तथा उसके हवाई जहाजें को उडान के लि‍ये केवल टैक्‍सी ट्रैक होकर एयर फोर्स स्‍टेशन के उस रनवे तक पहुंचना है जो कि वायुसेना परि‍सर में है और ताजमहल के वि‍परीत दि‍शा में है। तो कि‍सी भी सूरत में व्‍यवहारि‍क नहीं लगता कि‍ सडक और रेलयातायात से चरमराते ताज ट्रि‍पेजि‍यम जोन तथा एन सी आर को राहत देने वाले हवाई यातायात की गतवि‍धि‍यों को रोका जाये वह भी उस ताजमहल के संरक्षण के नाम पर जो कि‍ ट्रोपोस्फीयर को भारी भरकम खर्च के बावजूद न तो आगरा में और नहीं पडोसी एन सी आर में व्‍हैकि‍लर ट्रैफि‍क की अधि‍कता के कारण प्रदूषण में कोई कमी नहीं ला सका।

यही कारण है कि टी टी जैड का टी टी जैड का प्‍लान हमेशा ट्रोपोस्फीयर तक ही सीमि‍त रहा है। यही नहीं नीरी ने भी अब तक ताजमहल के प्रदूषण कारकों में स्ट्रैटोस्फियर को अपने अध्‍ययनों में शामि‍ल नहीं कि‍या है।

एक बात का और उल्‍लेख करना जरूरी समझता हूं कि हावाई जहाज में जो एयरटर्बाइन फ्यूल इस्‍तेमाल होता है उससे ऐसा कोई उत्‍सर्जन नहीं होता जि‍से कि‍ ताजमहल को होने वाले प्रदूष के कारकों में से कि‍सी में बढोत्‍तरी हो।
वैसे भी ताजमहल का एयरकवर प्रोटैक्‍टि‍ड है, सुरक्षात्‍मक कारणों से दि‍ल्‍ली के लुटि‍यन जोन के समान ही उसें आसपास के आसमान से होकर कोई हवाई जहाज गुजर तक नहीं सकता।

सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा की मांग है कि एम सी मेहता बनाम संघ सरकार वाद में टी टी जैड और उ प्र सरकार के पैरोकारो के द्वारा न्‍यायलय के संज्ञान में उपरोक्‍त जानकारी लायी जानी चहि‍ये। सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा – फतेहपुर सीकरी के सांसद श्री राजकुमार चाहर का पं दीन दयाल उपाध्‍याय सि‍वि‍ल एन्‍कलेव शि‍फ्टि‍ग प्रोजेक्‍ट में दि‍लचस्‍पी लेने के लि‍ये आभार जताती है तथा अपेक्षा करती है पक्षाकारों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में आगरा के एयरट्रैफि‍क को प्रभावि‍त करने के लि‍ये जो काल्‍पनि‍क मुद्दे उठाये जा रहे हैं उनके बारे में सरकारी पक्ष से सटीक जानकारी देने को सरकार से कहें।

धनोली में लोग देने को तैयार भवन परन्तु पांच महीने में प्रशासन नहीं कर पाया भुगतान: नरेंद्र वरुण

आगरा की जनता ने जब भी सि‍वि‍ल एन्‍कलेव को वायुसेना परि‍सर से बाहर ‘धनौली-बल्‍हेरा-अभयपुरा ‘ गांवें की जमीन पर शि‍फ्ट करने की मांग की शासन की ओर से जमीन का अधि‍ग्रहण न हो पाने की बात कह कर काम चलाया गया। जब जरूरत की अस्‍सी प्रति‍शत से भी अधि‍क जमीन अधि‍ग्रहि‍त हो गयी तब 20 प्रति‍शत अधि‍ग्रहण से बची रह गयी थी ,उसे रि‍हायशी या कुछ अन्‍य कारण बता कर हरसंभव तरीके से टालने का प्रयास कि‍या गया। जनता के सामने यही तथ्य लाया जाता रहा कि‍ रि‍हायशी जमीन पर भवना के स्‍वामी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
लेकि‍न अब यह स्‍थि‍ति भी समाप्‍त हो गयी है। चार मामलों के अलावा सभी ने सरकार से जमीन देने का अनुबध कर लि‍या है। पांच महीने इस अनुबध को कि‍ये हो चुके हैं कि‍न्‍तु इस जमीन को अधि‍ग्रहि‍त करने के लि‍ये भवन स्‍वामि‍यों को मुआबजा नहीं दि‍यागया है। यह अनुबंध एक साल की अवधि‍ में क्रि‍यान्‍वयन कि‍येजाने के लि‍ये है। 12 महीने की मि‍याद वाले इस अनुबंध को हुए पांच महीने नि‍कल चुके हैं। आगरा का सि‍वि‍ल एन्‍कलेव एयफोर्स स्‍टेशन मे ही बनाये रखने को कोशि‍श रत लाबी का प्रयास है कि‍ कि‍सी तरह से रहे बचे 7 महीने का समय और नि‍कल जाये जि‍ससे कि‍ कि‍ये गये अनुबंधों की प्रासंगि‍कता समाप्‍त हो जाये और जमीन की समस्‍या जहां की तहा पहुंच जाये।
यह एक प्रकार से आगरा के हि‍तो को अनदेखा कर एक कूट रचना(कांस्‍परेसी) ही प्रतीत होती है। जि‍सका मकसद आगरा के पर्यटन उद्योग को उस एयरपोर्ट से बंचि‍त रखना भर है जि‍स तक ‍ नागरि‍को और टूरि‍स्‍ट ट्रेड के कारोबारि‍यों की सहज पहुंच संभव हो।
मैं ही नहीं मेरी तरह आगरा के हजारों लोग जानना चाहते है कि‍ प्रशासन के द्वारा जनप्रति‍नि‍धि‍यों तक को यह क्‍यो नहीं बताया गया कि‍ जमीन संबधी केवल चार अनुबंधों के अलावा अन्‍य सभी अनुबंध हो गया है। वैसे इन चार अवशेष अनुबंधों के होने या न होने से शि‍फ्ट होने वाले एयरपोर्ट के टर्मि‍नल बि‍ल्‍डि‍ग, हवाई जहाजों के हवाई पट्टी तक पहुंचने के लि‍ये आवश्‍यक टैक्‍सी ट्रैक और आम नागरि‍कों के लि‍ये जरूरी एप्रोच रोड को बनाये जाने के काम पर कोई प्रति‍कूल असर नहीं पडेगा।
हमारी मांग है कि चार नि‍र्माण जि‍नको लेकर अनुबंध नहीं हो सका है ,उनकी वैधता के बारे में प्रशासन स्‍थि‍ति स्‍पष्‍ट करे ।

जि‍ला प्रशासन से मांग है कि जो जमीन अधि‍ग्रहि‍त हो चुकी है उसे बाऊंड्री पूरी करवा के लोकर्नि‍माण वि‍भाग से एयरपोर्ट अथार्टी को हस्तांतरित करवाये। जो चार नि‍र्माण अब तक अधि‍ग्रहि‍त नहीं हो सके हैं उनके बारे में स्‍थि‍ति स्‍पष्‍ट करे। जि‍न जमीनों/ नि‍र्माणों को लेकर अनुबंध हो चुके हैं उनका एवार्ड करवाना सुनि‍श्‍चि‍त करे।

आगरा प्रशासन और पं दीन दयाल उपाध्‍याय एयरपोर्ट आगरा के डायरैक्‍टर से आग्रह है कि आगरा के जन प्रति‍नि‍धि‍यों को अधि‍ग्रहि‍त जमीन की जानकारी, सि‍वि‍ल एन्‍कलेव के नि‍र्माण की नवीनतम स्‍थि‍ति के बारे में बतायें जि‍ससे कि नागरि‍कों को भी इससम्‍बन्‍ध में सूचना मि‍लती रहे।

यह प्रोजेक्‍ट जनता की जरूरत और आगरा के आर्थतंत्र से सीधे तौर पर जुडा हुआ हैं। इस तथ्‍य को जनप्रति‍नि‍धि ,सरकारी अधि‍कारी तथ टूरि‍स्‍ट ट्रेड के वे लोग भी जानते हैं जो कि अपने हि‍त तथा आगरा के टूरि‍ज्म पर एकाधि‍कारि‍ता को बनाये रखने के लि‍ये सि‍वि‍ल एन्‍कलेव को वायुसेना परि‍सर की वाऊंड्री से बाहर लाने के प्रयासों को एक न एक कारण से लटकवाते ही रहे हैं।

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