Public places पर धार्मिक कार्य हों या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा

नई दिल्‍ली। एनजीटी ने दक्षिण पश्चिम दिल्ली में Public places पर रात भर ‘माता की चौकी’ जागरण की इजाजत से इनकर कर दिया था। इसे चुनौती देते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। अब सार्वजनिक जगहों पर धार्मिक कार्य हों या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा।

आमतौर पर यह देखा जाता है कि जब कभी जागरण, रामलीला या फिर अन्य कोई धार्मिक कार्य होता है तो सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, क्या ऐसे धार्मिक कार्यों जैसे- राम लीला, माता की चौकी और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए राज्य की जमीन का इस्तेमाल होना चाहिए? इस बात का फैसला अब सर्वोच्च अदालत करेगी।

शीर्ष अदालत ने एक संस्था ज्योति जागरण मंडल की तरफ से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए इस मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेज दिया है। याचिका में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें एनजीटी ने दक्षिण पश्चिम दिल्ली में रात भर ‘माता की चौकी’ जागरण की इजाजत से इनकर कर दिया था।

जस्टिस आर.एफ. नरीमन और इंदू मल्होत्रा की पीठ की यह राय थी कि ऐसी धार्मिक गतिविधियों को सार्वजनिक जगहों पर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

जस्टिस नरीमन ने याचिकाकर्ता के वकील फुजैल अय्युबी से कहा- “हमें ऐसा लगता है कि एनजीटी ने बिल्कुल ठीक किया है।”

अय्युबी की तरफ से दाखिल की गई माता की ‘चौकी की चौकी’ को लेकर याचिका ठीक रामलीला की तरह ही थी, जिसे एनजीटी ने अक्टूबर 10, 2017 को अपने फैसले में करने की इजाजत दी थी। इसके साथ ही, सवाल Public places पर किए जानेवाले धार्मिक कार्यों से संबंधित भी होंगे।
-एजेंसी

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