ब्रज संस्कृति की तीव्र उपेक्षा पर जन प्रतिनिधियों का मौन असहनीय

मथुरा। पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने वेदना के साथ कहा है कि धार्मिक-आध्यात्मिक विचारों के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के शासन काल में भगवान श्रीकृष्‍ण की जन्मभूमि मथुरा और लीला भूमि ब्रज की तथा ब्रज साहित्य एवं ब्रज संस्कृति की तीव्र उपेक्षा हुई है और इससे प्रत्येक ब्रजवासी व्यथित है।

उन्होंने कहा है कि मथुरा तथा ब्रज के अन्य धार्मिक-पौराणिक स्थलों को ‘तीर्थ’ घोष‍ित करने का अधिकार किसी को नहीं है, ब्रज का प्रत्येक स्थान आदि काल से तीर्थ है। आवश्‍यक यह है कि सम्पूर्ण ब्रज को पानी, बिजली, सड़क, श‍िक्षा, चिकित्सा, परिवहन आदि सुविधाएँ प्रदान करने तथा माँस-मदिरा मुक्त क्षेत्र की घोषणा करे।

उन्होंने आगे कहा कि ब्रज के पुरातन स्वरूप के संरक्षण के लिए सर्वाधिक आवश्‍यकता यह है कि देश की अन्य भाषाओं की तुलना में सर्वाधिक समृद्ध और सलोनी-मिठलौनी ब्रज भाषा के साहित्य, लोकगीत, लोक कथाओं तथा लोक कलाओं को संरक्षित करने के साथ सूर की साधना स्थली परासौली में महाकवि सूर की विशाल प्रतिमा की स्थापना तथा अष्‍टछाप कवियों के साहित्य, शोध केन्द्र, तत्कालीन वाद्य – यंत्र प्रदर्शन आदि के द्वारा साहित्यिक – सांस्कृतिक तीर्थ के रूप में विकसित क‍िया जाय।

मोहन स्वरूप भाटिया के इन विचारों का एक अनौपचारिक संगोष्‍ठी में डॉ. राजेन्द्र कृष्‍ण अग्रवाल, डॉ. सीमा मोरवाल, वन्दना श्री, विनीत नारायण, आचार्य अशोक कुमार जोशी, राधा गोविन्द पाठक, अनुपम गौतम, ताराचन्द्र प्रेमी, कन्हैया लाल रसिक, सुनील शर्मा, एन. एम. चतुर्वेदी, अरविन्दम चतुर्वेदी आदि ने समर्थन क‍िया। साथ ही सत्तारुढ़ दल के जन-प्रतिनिधि तथा सत्तारुढ़ दल के संगठन भाजपा तथा सांस्कृतिक संगठन संस्कार भारती के मौन पर पीड़ा व्यक्त कर मांग की है कि मुख्यमंत्री चुनाव आचार संहिता लगने से पूर्व उत्तर प्रदेश में ब्रज भाषा अकादमी की स्थापना तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान तथा उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान में ब्रज के साहित्यकारों एवं कलाकारों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने की घोषणा करें।
– Legend News

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