दिल्ली में करोड़ों का घर लेने में घोटाला, फंसा लालू यादव का परिवार

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दिल्ली में करोड़ों का घर लेने में घोटाला, फंसा लालू यादव का परिवार

नई दिल्ली। पहले से चारा घोटाले में फंसे राजद अध्‍यक्ष लालू यादव  अब अपने परिवार सहित नए आरोपों में घिरते जा रहे हैं.  मामला दिल्ली में करोड़ों का घर लेने में घोटाला किए जाने का है. गौरतलब है कि लालू यादव के बच्चों तेजप्रताप, तेजस्वी और चंदा के नाम दिल्ली के पॉश इलाक़े न्यू फ़्रेंड्स कॉलोनी में एक घर ख़रीदा गया है, जिसकी कीमत 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है. 2008 में एबी एक्सपोर्ट नाम की एक कंपनी ने पांच करोड़ रुपये में इस घर को ख़रीदा. बाद में 2010 में इसे लालू के बच्चों के नाम पर ट्रांसफ़र कर दिया. टैक्स रिटर्न फ़ाइल में एबी एक्सपोर्ट ने अपनी आमदनी ज़ीरो दिखाई है. कंपनी ने इसके लिए पांच अलग-अलग ज्वैलरी कंपनियों से पैसा लिया. ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या लालू के घर के लिए ज्वैलरी कंपनियों ने पैसे दिए? खास बात है कि तेजस्वी के चुनावी हलफ़नामे में इस घर का कोई ज़िक्र नहीं है.

हालांकि इस मामले में लालू यादव ने सफ़ाई दी है. उन्होंने कहा कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है. सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक हैं. हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है.

पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी के नेता सुशील मोदी ने लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव को लेकर खुलासा किया था. मोदी के अनुसार 2010 में लारा डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से 45 डेसि‍मल जमीन, 53.34 लाख रुपये में खरीदी और इस जमीन पर एक मोटरसाइकिल कंपनी का शोरूम भी शुरू किया गया.

इस शोरूम को शुरू करने के लिए 2.29 करोड़ रुपये कर्ज लिए गए, तब तेजप्रताप इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे. हालांकि 2015 में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद तेजप्रताप यादव ने इस कंपनी के प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन मोदी का आरोप है कि चुनाव आयोग को दिए गए ब्योरे में तेजप्रताप यादव ने न अपने शेयर की जानकारी दी और न कर्ज का कोई उल्लेख किया.

जबकि तेजप्रताप के नजदीकियों का कहना है कि ये सारी जानकारी तेजप्रताप के हलफनामे में है, लेकिन वो किस किस कंपनी में निदेशक हैं या उनका शेयर है, वो सिलसिलेवार ढंग से न देकर कुल शेयर और उसके मूल्य का कुल जमा दिया गया है.

सुशील मोदी ने कथित तौर पर दस्वावेजी सबूत जारी करके एक नई कंपनी को लेकर भी आरोप लगाया था, जिस पर लालू यादव के परिवार का कब्जा हुआ. कंपनी का मालिकाना हक कात्याल परिवार की आइसबर्ग इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड का था.

2006 में एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई गई जिसमें कत्याल परिवार के सदस्य निदेशक थे, लेकिन बाद में उनकी जगह पर अब बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव और अब उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्यों को निदेशक बना दिया गया.

अमित कात्याल ने अपने सारे शेयर लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के नाम कर दिए. पिछले विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद लालू यादव के बेटे कंपनी के निदेशक पद से हट गए और अब उनकी बेटी चंदा और रागिनी यादव इसकी निदेशक हैं. बीजेपी नेता सुशील मोदी का आरोप है कि इससे साफ है यह पूरी तरह से भ्रष्टाचार का मामला है.

-एजेंसी

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