वैश्विक मंदी से बचने को वित्त मंत्री ने क‍िए कई बड़े ऐलान, surcharge हटेगा, EMI घटेगी

नई दिल्‍ली।  वैश्विक मंदी से बचने को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने निवेश को बढ़ाने के लिए लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स surcharge को वापस लेने की घोषणा की है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FPI पर भी अतिरिक्त surcharge को वापस लिया जाएगा। अब एक बार फिर से बजट से पहले की स्थिति पर वापस जाने का फैसला लिया गया है।

बजट से पहले FPI पर 15 फीसदी का surcharge लगता था, जिसे बजट में 25 फीसदी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी के उल्लंघन को उन्होंने क्रिमिनल केस न बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस पर सिर्फ जुर्माना ही लगेगा। स्टार्टअप्स पर लगने वाले ऐंजल टैक्स की वापसी का भी फैसला लिया गया है।
इसके साथ ही बैंकों के लिए 70,000 करोड़ रुपये का पैकेज रिलीज करने का ऐलान किया गया है। सरकार की ओर से आर्थिक सुधारों का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी में जो भी खामियां हैं, उसे दूर करेंगे। टैक्स और लेबर कानून में लगातार सुधार कर रहे हैं। यह कहना गलत है कि सरकार किसी का उत्पीड़न कर रही है। संपत्ति बनाने वाले लोगों का हम सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों के विलय और अधिग्रहण की मंजूरी तेजी से दी जा रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स उत्पीड़न के मामलों पर रोक लगेगी।
इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों ने रेट कट का लाभ अब ग्राहकों तक पहुंचाने की सहमति जताई है। बैंकों से लोन लेने वाले ग्राहकों को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि लोन क्लोजर के 15 दिनों के भीतर सिक्योरिटी के लिए जमा किए दस्तावेज ग्राहकों को वापस करने होंगे। वित्त मंत्री ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इकॉनमी का एक प्रजेंटेशन भी दिया। कुल 32 स्लाइड्स में निर्मला सीतारमन ने अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की।
ऑटो सेक्टर के लिए भी किए राहतों के ऐलान
ऑटो सेक्टर के लिए भी बड़े ऐलान करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मार्च, 2020 तक खरीदे जाने वाले बीएस-4 इंजन वाले वीइकल्स को चलाने में कोई भी दिक्कत नहीं होगी। रजिस्ट्रेशन फीस में इजाफे को भी जून, 2020 तक के लिए टाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वीइकल्स पर सरकार के जोर के चलते पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों के बंद होने की आशंका थी और इसके चलते बिक्री कम होने की शिकायतें आ रही थीं।
वित्त मंत्री ने कहा, चीन और अमेरिका से ज्यादा है हमारी ग्रोथ
ग्लोबल इकॉनमी के बारे में बात करते हुए निर्मला ने कहा कि वैश्विक जीडीपी 3.2 पर्सेंट रहने का अनुमान है। ग्लोबल डिमांड कम है। निर्मला सीतारमन ने कहा कि चीन और अमेरिका समेत तमाम देशों के मुकाबले हमारी जीडीपी ग्रोथ ज्यादा है। हम अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ग्रोथ अपने ट्रैक पर है। इकॉनमिक रिफॉर्म्स जारी रहेंगे। पर्यावरण से जुड़े क्लियरेंस को भी आसान किया गया है। हम बिजनस को मंजूरी देने की प्रक्रिया को लगातार आसान कर रहे हैं।
अर्थव्यवस्था के हालात को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रही थीं। निर्मला ने दुनिया के 10 देशों की तुलना कर कहा कि भारत की विकास दर अभी भी ऊंची है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वेल्थ क्रिएटर्स का सम्मान होगा। सुधार जारी रहेंगे।
वैश्विक स्तर पर ग्रोथ 3.2 फीसदी है, जिसे और घटाया जा सकता है। दुनिया के बाकी देश भी मंदी का सामना कर रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर हालत में है। वैश्विक मंदी को समझने की जरूरत है। चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर की वजह से मंदी की समस्या हुई है। ऐसा नहीं है कि मंदी की समस्या सिर्फ भारत के लिए है बल्कि दुनिया के बाकी देश भी इस समय मंदी का सामना कर रहे हैं। सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और देश में लगातार आर्थिक सुधार हुए हैं।
इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरना पहले से काफी आसान हुआ है। जीएसटी को भी और आसान बनाया जाएगा। कई देशों की तुलना में हमारी विकास दर भी काफी अच्छी है। सरकार पर आरोप लगते हैं कि टैक्स को लेकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। हम टैक्स और लेबर कानूनों में लगातार सुधार कर रहे हैं। टैक्स नोटिस के लिए केंद्रीय सिस्टम होगा और टैक्स के लिए किसी को परेशान नहीं किया जाएगा। एक अक्टूबर से केंद्रीय सिस्टम से नोटिस भेजे जाएंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ देर पहले नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने ट्वीट कर कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इकोनोमी के लिए कड़े कदम उठा रही है और उठाती रहेगी। घबराने की और घबराहट फैलाने की कोई जरूरत नहीं है। राजीव कुमार का गुरुवार को जो बयान सामने आया था उसमें देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद विपक्षी दलों को भी मोदी सरकार को घेरने का मौका मिल गया।
-एजेंसियां

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