आगे बढ़ने की दौड़ ने पीछे धकेल दिया है जिंदगी का सुकून

आगे बढ़ने की दौड़ ने हमारी जिंदगी में सुकून को कहीं पीछे धकेल दिया है। बाकी बची कसर टेक्नोलॉजी पूरी कर रही है। भारतीय युवाओं में खासतौर पर मोबाइल के प्रति प्यारभरी सनक देखी जा सकती है। हालत यह है कि अगर उनका फोन चार्जिंग से हटा दिया जाए या अचानक वाई-फाई का नेटवर्क चला जाए तो युवाओं का गुस्सा फूट पड़ता है।
हर समय खुद को साबित करने का तनाव
मोबाइल फोन की सहूलियत और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने लत के चलते युवा अपने काम और परिवार के साथ होते हुए भी नहीं होते हैं…क्योंकि उनका पूरा ध्यान अपने मोबाइल फोन में होता है। इससे उनमें भावनात्मक कमजोरी बढ़ रही है।
वर्कलाइफ स्ट्रेस
आज के वक्त में वर्कलाइफ का स्ट्रेस इतना अधिक है कि ऑफिस से निकलने के बाद भी काम का तनाव पीछा नहीं छोड़ता है और इसका एक बड़ा कारण मोबाइल फोन है जो ऑफिस से दूर होने के बाद भी कॉल, मैसेज, चैट के जरिए ऑफिस से जोड़े रखता है।
मानसिक रूप से बीमार युवा
पिछले दिनों मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर कई दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई रिसर्च हुईं। इन सभी के परिणाम परेशान करने वाले रहे। स्टडी में सामने आया कि टीनएजर्स और युवाओं के बढ़ते मोबाइल प्रेम के कारण वे मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं। उन्हें अपने इमोशंस को ठीक रूप से व्यक्त करने में दिक्कत आ रही है और उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।
82 प्रतिशत युवा तनाव का शिकार
अगर सिर्फ भारत की बात करें तो एक प्राइवेट फर्म द्वारा की गई स्टडी में साबित हुआ है कि अन्य विकासशील देशों की तुलना में 82 प्रतिशत भारतीय युवा किसी ना किसी तरह के तनाव का शिकार हैं।
शारीरिक बीमारियों की बाढ़
ऐसा नहीं है कि मोबाइल के कारण सिर्फ मानसिक तनाव बढ़ रहा है बल्कि मोटापा, हार्ट डिजीज, अस्थमा, पाचन संबंधी समस्याओं जैसी बीमारियां भी मोबाइल का इस्तेमाल दे रहा है।
तनाव से भरे वर्कप्लेस
अलग-अलग फर्म्स द्वारा की गई कई स्टडीज में यह बात साबित हो चुकी है अन्य देशों की तुलना में भारत में कर्मचारियों को वर्कप्लेस पर अधिक तनाव का सामना करना पड़ता है, मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल ने इस तनाव में वृद्धि का काम किया है।
वाई फाई जाने पर फूटता गुस्सा
शोध में शामिल किए गए लोगों में से 68 प्रतिशत लोगों ने इस बात को पूरी तरह स्वीकार किया कि अचानक वाई फाई का कनेक्शन जाने पर उनका गुस्सा फूट पड़ता है। ऐसे में वे अपने परिवार, दोस्तों या किसी प्रियजन की छोटी-सी बात पर ही चिड़चिड़ाने लगते हैं।
मेरा फोन क्यों हटाया?
शोध में शामिल किए गए 63 प्रतिशत लोगों का कहना है कि अगर चार्जिंग पर लगा हुआ उनका फोन कोई बिना पूरी बैटरी चार्ज किए हुए ही हटा दे तो उनके गुस्से का पारा चढ़ जाता है और वे झगड़ा कर लेते हैं।
यही बचा है रास्ता
युवाओं में बढ़ते तनाव पर मनोचिकित्सकों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर तनाव का अलग असर होता है। पाचन से लेकर मूड स्विंग तक कई तरह की दिक्कतें युवाओं को घेर लेती हैं। जरूरी है कि दिन में फिजिकल एक्टिविटी की जाए और कुछ वक्त के लिए मोबाइल से ब्रेक लिया जाए।
-एजेंसियां

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