मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू, विधि मंत्रालय से ली जाएगी राय

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार राम जन्मभूमि मामले में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और कुछ अधिकारियों की टीम अदालत के फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उक्त न्यास के गठन पर विधि मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल की राय ली जाएगी। यह ट्रस्ट ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगा।
एक अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों के एक दल को शीर्ष अदालत के फैसले का विस्तार से अध्ययन करने को कहा गया है ताकि अदालत के निर्देश के अनुरूप ही ट्रस्ट का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में परामर्श चल रहा है और अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
एक अन्य अधिकारी ने हालांकि कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि क्या अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बनाये गये ट्रस्ट की नोडल इकाई गृह मंत्रालय या संस्कृति मंत्रालय में से कोई होगा।
शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने शनिवार (9 नवंबर) को ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए एक प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने को भी कहा।
शीर्ष अदालत ने 1045 पन्नों के फैसले में कहा, ”केंद्र सरकार इस फैसले की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर ‘अयोध्या में कुछ क्षेत्रों के अधिग्रहण से संबंधित अधिनियम, 1993 के तहत एक योजना बनाएगी। उन्होंने कहा, ”इस योजना में एक ट्रस्ट के गठन का भी विचार शामिल होगा जिसमें एक न्यासी बोर्ड या अन्य कोई उचित इकाई होगी।”
राम जन्मभूमि एक सांस्कृतिक मुद्दा, इसे राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं: कल्‍याण सिंह
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने सोमवार को यहां कहा कि राम जन्मभूमि एक सांस्कृतिक मुद्दा है, और इसे राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं है।
कल्याण सिंह अपने आवास पर पत्रकारों से कहा, “हम राम मंदिर पर राजनीति नहीं करते हैं क्योंकि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि सांस्कृतिक मुद्दा है। राम मंदिर आंदोलन के पहले दिन हमने जो सपना देखा था, वह अब पूरा हुआ है।”
कल्याण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का इसे लेकर फैसला पूरी तरह न्यायसंगत व सर्वसमावेशी है। इसी कारण किसी ने भी इसके विरोध में आवाज नहीं उठाई है।”
कल्याण सिंह ने कहा, “अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनना चाहिए। मंदिर बनने के साथ ही अयोध्या का संपूर्ण विकास होना चाहिए।”
मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने न्याय और कानून का पालन किया है, साथ ही समाज की एकता व अखंडता का भी ध्यान रखा है।
उन्होंने कहा, “राम मंदिर आंदोलन के पहले दिन जो संकल्पना लोगों ने बनाई थी, वह पूरी होने जा रही है। देश में नौ नवंबर, 2019 एक ऐतिहासिक दिन था। इस दिन 5०० वर्ष पुराने विवाद का खात्मा हुआ।”
राजस्थान के पूर्व राज्यपाल ने कहा कि “वहां पर राम के साथ अयोध्या का विकास होना चाहिए। मैं अयोध्या जरूर जाऊंगा। मैं पहले दिन से ही राम भक्त हूं।”
उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित हैं।
इस मंदिर के शिलान्यास में मैं जाऊं या योगी आदित्यनाथ जाएं, अब यह कोई मसला नहीं है। मैं तो अब जल्द अयोध्या जाऊंगा पर अभी तारीख तय नहीं है। अब तो अयोध्या फैसले को जीत और हार के रूप में नहीं देखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट बनाने का निदेर्श दिया है। इस ट्रस्ट को बनाना सरकार का काम है। अब कौन इसमें रहेगा कौन नहीं, यह सरकार तय करेगी।”
कल्याण सिंह ने इस दौरान बाबरी विध्वंस केस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
उल्लेखनीय है कि कल्याण के मुख्यमंत्रित्व काल में ही विवादित ढाचे को ढहाया गया था। तो क्या कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के चलते विवादित ढांचा गिरा?
कल्याण सिंह ने कहा, “मामले की जांच सीबीआई ने की है। अभी मामला कोर्ट में है। जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती, विनय कटियार आदि बड़े नेता आरोपी हैं। मेरे खिलाफ 47 गवाहों की सूची सीबीआई ने पेश की है, जिनमें अभी सात की सुनवाई हुई है। इस पर अभी मैं कुछ नही कहूंगा।”
-एजेंसियां

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