राम मंदिर के निर्माण के लिए चुना जा सकता है विधायिका का रास्‍ता: मौर्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार को कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि अगर जरूरत पड़ी और कोई रास्ता न दिखा तो केंद्र सरकार अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए विधायिका का रास्ता चुन सकती है. हालांकि उन्होंने कहा कि यह तब संभव हो सकेगा जब संसद के दोनों सदनों में हम मजबूत स्थिति में होंगे.
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दोनों सदन में हमारे पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है. हम इस मामले को लोकसभा में तो ला सकते हैं, मगर राज्यसभा में हमारे पर संख्याबल कम है. यह हर रामभक्त को मालूम है. अदालत जल्द इस पर फैसला करेगा.
मौर्य ने कहा कि जब हमारे पास मजबूत संख्याबल होगी तो हम इसका सदुपयोग करेंगे, दुरुपयोग नहीं. उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होनी है. मौर्य ने कहा कि अगर राम मंदिर का निर्माण होता है तो यह विश्व हिन्दू परिषद् के महान नेता अशोक सिंघल, महंत रामचंद्र दास परमहंस और अपनी जान देने वाले कारसेवकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
बिना कारण किसी को परेशान नहीं किया जाएगा
मौर्य से यह भी पूछा गया कि क्या एससी-एसटी संशोधन विधेयक से भाजपा का स्थायी वोट बैंक नाराज हो जाएगा? मौर्य ने इसके जवाब में कहा कि इस विधेयक को लाकर सरकार की मंशा किसी को भी परेशान करने की नहीं है. राज्य के उप मुख्यमंत्री के रूप में मैं यह कह सकता हूं कि कोई फर्जी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा और न ही किसी को बिना किसी कारण परेशान किया जाएगा.
लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी अनुसूचित जाति या जनजाति समुदाय के लोगों के साथ गलत हरकत करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. बीते 9 अगस्त को संसद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एससी-एसटी संशोधन विधेयक को पास कर दिया.
हर बूथ पर कम से कम 51 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी की है तैयारी
आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी की तैयारियों के एक सवाल में मौर्य ने कहा, हमारी पार्टी इस कोशिश में लगी है कि हर बूथ पर हमें कम से कम 51 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी मिले और हम दिशा में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो वास्तव में हतोत्साहित हैं उनके चेहरे पर इसका असर स्पष्ट देखा जा सकता है. उनका इशारा अखिलेश यादव और मायावती को लेकर था. मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश से सांसद हैं. लोगों में उनकी लोकप्रियता को देख विरोधी पार्टियां हिल गई हैं.
-एजेंसियां

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