अयोध्या का एकमात्र निशुल्क Gurukul महाविद्यालय, जहां गुरुकुल की शिक्षा आज भी विद्यमान है

अयोध्‍या। Gurukul जिस नाम को सुनते ही सभी के मन मस्तिष्क में तुलसीदास जी द्वारा रचित ‘रामचरित्र मानस’ में वर्णित अयोध्या के महाराजा राजा दशरथ के चारों पुत्रों राम, भारत, लक्ष्मण व शत्रुघन एवं वेदों, पुराणों व अन्य ग्रंथों में भी इंगित कृष्णा,पांडव,कौरवों व देश के कई अन्य महापुरषों के गुरुकुलों में शिक्षा ग्रहण करने का दृश्टान्त सामने आने लगता है।

हमारी भारतीय संस्कृति व सभ्यता का अवलोकन स्वतः ही होने लगता है, जो कि आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कि जन्म स्थली अयोध्या में विद्यमान है। अयोध्या का एकमात्र निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय जिसकी स्थापना वर्ष 1925 में आचार्य स्वामी त्यागानन्द सरस्वती जी के द्वारा कि गयी थी।ये आज भी विद्यमान है जहाँ अयोध्या के ही नहीं अपितु उत्तर प्रदेश के अन्य कई जनपदों से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इस गुरुकुल में विद्यार्थियों का प्रवेश प्रवेशिका (प्ररम्भिकशिक्षा)से लेकर आचार्य(परास्नातक)कि शिक्षा प्रदान की जाती है।

यहाँ आज भी प्राचीन शिक्षा व आश्रम पद्धति के साथ -साथ आधुनिक शिक्षा के समावेश के साथ भारतीय सभ्यता व संस्कृति के साथ योग,धर्म,वेद,बौधिक योग पद्धति,गोसेवा,आयुरवेद एवं युद्ध कौशल की प्रदान की जाती है।

इतना ही नहीं इसी गुरुकुल से शिक्षा से शिक्षा ग्रहण कर निकले अनेक विद्यार्थी आज देश के कोने -कोने में महारत हासिल कर देश में उच्च सम्मान भी प्राप्त किये हैं।

इनमें प्रमुख रूप से प्रो. प्रशस्त्र मित्र विभाग अध्यक्ष संस्कृत-फिरोज गाँधी महाविद्यालय रायबरेली व आधुनिक राष्ट्रकवि एवं राष्ट्रपति द्वारा साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त  डॉ. ज्योतिरमित्र वाराणसी हिन्दू वि.वि. में मूल सिद्धांत के विभागाध्यक्ष एवं राष्ट्रपति द्वारा आयुर्वेद के क्षेत्र में धन मंत्री सम्मान प्राप्त किया।

Gurukul से  शिक्षा प्राप्‍त डॉ. अजय मित्र नागपुर वि.वि. में प्रा.इतिहास के विभागाध्यक्ष के पद को शुशोभित कर रहे है व भारतीय सभ्यता व संस्कृति को गौरवान्वित कर रहे हैं।

  • संदीप श्रीवास्‍तव , अयोध्‍या