कोरोना काल और मानसून के संगम से खूब फला-फूला नर्सरी कारोबार

नई दिल्‍ली। कोरोना काल और मानसून का संगम क्या हुआ, इस साल नर्सरियों का कारोबार खूब फला-फूला। लॉकडाउन के वक्त घर पर बैठे अधिकतर लोगों ने टैरेस गार्डन, बालकॉनी और वर्टिकल गार्डन पर खास ध्यान दिया है। इसका ही असर रहा कि इस साल मानसून की विदाई होने से पहले ही होलसेल नर्सरियों के पास फ्रूट प्लांट्स खत्म हो गए।
फ्रूट्स प्लांट्स रहे डिमांड में
इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन के प्रेसीडेंट वाई पी सिंह ने बताया कि इस बार मानसून में फ्रूट्स प्लांट की काफी डिमांड रही। स्थिति यह रही कि होलसेल मार्केट में पहली बार फ्रूट्स प्लांट्स की शॉर्टेज हो गई। अभी तक लोग घरों में सब्जी और औषधीय पौधों को ज्यादा लगाते थे मगर अब फलों के पौधे लगाने का क्रेज देखने को मिल रहा है। जिनके घर के लॉन या सामने सड़क पर जगह है, उन्होंने वहां फलदार वृक्षों के पौधे लगाए। जिनके पास यह सुविधा नहीं है, उन्होंने अपने मकान की छत या बालकॉनी में जगह बनाया। उन्होंने गमलों में या फिर छत पर ही मिट्टी डाल कर फलों के पौधे लगाए हैं। वैसे भी कोरोना काल में सभी ने नूट्रिशनल वैल्यू पर फोकस किया है।
दो-तीन साल में आने लगते हैं फल
इस समय उन्नत किस्म के फलों के जो कलमी पौधे तैयार किये जा रहे हैं, वह थोड़ी मेहनत के बाद ही दो से तीन साल में फलने लगते हैं। अब कृषि विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि बगीचे में लगने वाले फल, आम, का पेड़ भी अब गमले में लगाया जा सकता है। ये पौधे दो-तीन साल में फल तो देने ही लगते हैं, ये पेड़ भी छोटे ही रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हें बौनी प्रजाति के तौर पर विकसित किया गया है।
सरकार भी पौधे बांटने की कर रही है तैयारी
वाई पी सिंह का कहना है कि कृषि मंत्रालय भी बड़े स्तर पर फ्रूट्स प्लांट के डिस्ट्रीब्यूशन का प्लान बना रहा है। वर्ष 2021 में इस परियोजना की लांचिंग हो सकती है। सरकार की कोशिश है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की नूट्रिशनल वैल्यू बढ़े। हर आदमी ताजे फलों को खरीदकर खाने में समक्ष नहीं है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे तमाम बड़े शहरों में सब्जी और फल कम मात्रा में पैदा होती है। सरकार का फोकस है कि देश की मेट्रो सिटी में बड़े अवसर हैं, वहां फ्रूट्स डिस्ट्रब्यून कैंपेन चलाएंगे तो लोगों को आसानी से घर में फल मिल जाएंगे। सिंगापुर जैसे देशों में लोग अपने घरों की छत और बालकॉनी में फल और सब्जियों को पैदा कर कुल खपत का 30 फीसदी हिस्सा पैदा कर लेते हैं।
मेडिसिनल प्लांट्स की सेल भी बढ़ी
नर्सरी चलाने वाले नसीम अहमद का कहना है कि कोविड-19 का असर सभी सेक्टर्स पर पड़ा है। जाहिर है कि नर्सरी के बिजनेस में भी बिक्री घटी है लेकिन इस दौरान मेडिसिनल प्लांट्स की सेल में इजाफा हुआ है। साथ ही जिनके घर में जगह है, उन्होंने फलों के पौधे भी लगाए हैं। शहरों में हमारे अधिकतर ग्राहक उच्च-मध्यम और उच्च वर्ग के परिवार हैं। इनके पास समय के साथ पैसा भी है। वे कोरोना की वजह से घर से ज्यादा नहीं निकले। वैसे भी नर्सरी बहुत जरूरी कार्यों में नहीं आता है। फिर भी टीवी, अखबार और सोशल मीडिया में इम्यूनिटी बूस्ट के प्रोग्राम देखकर मेडिशनल प्लांट्स खरीदे गए हैं। इनका काढ़ा बनाकर लोगों ने सेवन किया है। ये पौधे आसानी से मिल जाते हैं, जिनकी खेती कठिन नहीं है।
चर्चित और घरों में आसानी से उगने वाले प्लांट्स
सब्जी- हरी मिर्च, शिमला मिर्च, टमाटर, बैंगन, लौकी, तोरई, आलू, भिंडी, पालक, मेथी, धनिया, सरसों का साग, पुदीना, बींस आदि।
फल-अगरूद, आम, चीकू, संतरा, अनार, नींबू, मौसमी, जामुन, ड्रैगन फ्रूट, शरीफा, फालसा, आलू बुखारा, आड़ू, नाशपाती, शहतूत, खरबूज, पपीता, अन्ना एप्पल और तरबूज आदि।
औषधीय पौधा- एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, शुगर प्लांट, तुलसी, लेवेंडर, पाइन, कैट्निप, अदरक, लेमन बाग, अजवाइन, मेथी, कपूर और रोजमैरी आदि।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *