मखमली अहसास के रूह तक जाने का नाम था Jagjit Singh

हरदिल अजीज़ गजल गायकों में यदि कोई नाम सबसे पहले जुबां पर आता है तो वह है Jagjit Singh, मखमली अहसास कानों के रास्ते रूह के भीतर तक जाने का नाम था Jagjit Singh।

आज जगजीत सिंह का 78वां जन्‍मदिन है, 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर में जन्‍मे जगजीत सिंह के पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे। जगजीत जी का परिवार मूलतः पंजाब (भारत) के रोपड़ जि‍ले के दल्ला गांव का रहने वाला है। मां बच्चन कौर पंजाब के ही समरल्ला के उट्टालन गांव की रहने वाली थीं। जगजीत का बचपन का नाम जीत था। करोड़ों सुनने वालों के चलते वह कुछ ही दशकों में जग को जीतने वाले जगजीत बन गए।

हालांकि जगजीत के पिता चाहते थे कि वो पढ़-लिखकर आईएएस बने। एमए तक उन्होंने पढ़ाई भी की, लेकिन जब एमए का रिजल्ट आने तक उन्हें कुछ नजर नहीं आया तो वो गायकी में करियर बनाने के लिए सीधे मुंबई पहुंच गए। जगजीत को सिंगिंग में दिलचस्पी थी। उन्होंने बचपन में रियाज भी किया था। जगजीत सिंह फि‍ल्मी दुनिया में पार्श्वगायन का सपना लेकर आए थे। तब पेट पालने के लिए कॉलेज और ऊंचे लोगों की पार्टियों में अपनी पेशकश दिया करते थे। उन दिनों तलत महमूद, मोहम्मद रफ़ी साहब जैसों के गीत लोगों की पसंद हुआ करते थे। रफ़ी-किशोर-मन्नाडे जैसे महारथियों के दौर में पार्श्व गायन का मौक़ा मिलना बहुत दूर था।

ज़रा ये सुनिए Jagjit Singh के द्वारा राग भैरवी में गाई गई एक कंपोजीशन—

बहुत कम लोग जानते हैं कि सरदार जगजीत सिंह धीमान इसी एलबम के रिलीज के पहले जगजीत सिंह बन चुके थे। बाल कटाकर असरदार जगजीत सिंह बनने की राह पकड़ चुके थे। जगजीत ने इस एलबम की कामयाबी के बाद मुंबई में पहला फ़्लैट खरीदा था।

जगजीत सिंह एक बार हवाई जहाज से कराची से दिल्ली लौट रहे थे। विमान कर्मियों ने जगजीत सिंह को पहचान तो उन्‍होंने उनसे कुछ गजल सुनाने की रिक्‍वेस्‍ट की। जगजीत सिंह ने उनकी बात का मान रखा और गजल सुनानी शुरू कर दी। जगजीत सिंह की आवाज का विमानकर्म‍ियों पर ऐसा असर हुआ कि उन्‍होंने कंट्रोल रूम से संपर्क कर यह कह दिया कि विमान 30 मिनट बाद लैंड कराया जाए। कंट्रोल रूम से मामला पास हो गया और फिर विमान में महफिल सज गई। यह इतिहास में अपने आप की अनोखी घटना है।

-एजेंसी

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