हिंदू धर्म में सबसे विशिष्ट है गौ दान

हिंदू धर्म में कई तरह के दान की बात की जाती है मगर इन सभी में गौ दान सबसे विशिष्ट है। कहा जाता है कि गाय में सभी देवताओं का वास होता है और इसलिए गाय का दान करने से सभी तरह के कल्याण होते हैं। मान्यता है कि गाय के सींगों में ब्रह्मा और विष्णु का निवास है। गाय के सिर में महादेव, माथे पर गौरी और नथनों में कार्तिकेय का वास है।
आंखों में सूर्य-चंद्रमा, नाक में कम्बल और अश्वतर नाग, कानों में अश्विनी कुमार, दांतों में वासुदेव, जीभ में वरुण और गले में देवराज इंद्र, बालों में सूर्य की किरणें, खुर में गंधर्व, पेट में पृथ्वी और चारों थनों में चारों समुद्र रहते हैं। गोमुत्र में गंगा और गोबर में यमुना का निवास माना है।
उज्जैन के ज्योतिषविद् पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि जो व्यक्ति गोदान कर रहा है, उसे समस्त देवताओं का आह्वान करना चाहिए और इसके बाद षोडशोपचार से गाय का पूजन करना चाहिए। गाय को वस्त्र पहनाकर, पूर्ण श्रद्धा के साथ सपत्नीक गाय का पूजन करना चाहिए।
क्यों करना चाहिए गौ दान
शास्त्रों के अनुसार जो लोग श्रेष्ठ मृत्यु चाहते हैं, अलंकृत विमान के जरिए अपने परमात्मा के पास पहुंचना चाहते हैं, उन्हें गोदान जरूर करना चाहिए। इसके अलावा गोदान करने से पितृ मोक्ष भी होता है। इसलिए हिंदू धर्म में सभी मनुष्यों को जीवन में एक बार यह दान जरूर करना चाहिए।
किसे करें दान
गौदान किसे करना चाहिए, इसके बारे में भी हिंदू धर्म में विस्तार से बताया गया है। कहा गया है कि ब्राह्मण को किया गया गोदान ही सही होता है मगर इसके लिए भी एक शर्त है कि गोदान का अधिकारी वही व्यक्ति है जो अंगहीन न हो, यज्ञ करवा सकता हो, जिसकी पत्नी जिंदा हो और परिवार भरा-पुरा हो।
कैसी होनी चाहिए गाय
हमेशा ऐसी गाय का दान करना चाहिए, जो वृद्ध नहीं हो। उसके सींग और खुर चमकदार हों। गाय के साथ सोने या कांस्य के बर्तन में घी-दूध और तिल डालकर कुश के साथ उस गाय की पूंछ पर रखकर उसे दान किया जाना चाहिए। दान की पूर्णता के लिए गाय के साथ ही यथा शक्ति धन या सोने का भी दान करना चाहिए।
-एजेंसी