ज्ञान का भण्डार है संस्कृति विश्वविद्यालय की Central Library

Central Library के अलावा छात्र-छात्राओं के ज्ञानार्जन के लिए हैं पांच विभागीय Library

मथुरा। कहते हैं कि पुस्तकें इंसान की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। किसी गूढ़ समस्या का निदान पुस्तकों में ही निहित है। शिक्षा मूल रूप से मानव की चेतना शक्ति को विचारशील, ज्ञानशील तथा विनम्र बनाती है जिससे मनुष्य समाजोत्थान के साथ-साथ नवीन आविष्कार तथा नूतन एवं ज्ञानवर्धक विचारों का उत्कृष्ट सृजन करता है। किसी भी शैक्षिक संस्थान का बौद्धिक हृदय पुस्तकालय होता है। पुस्तकालय ज्ञान का वह मंदिर है जहां प्राध्यापकों के साथ ही साथ छात्र-छात्राओं की मेधा निखरती है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित कर रही संस्कृति यूनिवर्सिटी में देश-विदेश की लगभग एक लाख पुस्तकों का संग्रह है। यहां के केन्द्रीय पुस्तकालय सहित पांच विभागीय वाचनालयों में कई भाषाओं की पुस्तकें छात्र-छात्राओं के ज्ञानार्जन का माध्यम हैं।

संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि पाठ्य-पुस्तकों से ही विद्यार्थी का सम्पूर्ण मानसिक विकास नहीं हो सकता, इसके लिए पुस्तकालय जरूरी है। दरअसल, पुस्तकालय किसी भी शैक्षिक संस्थान का हृदय होता है। संस्कृति यूनिवर्सिटी के केन्द्रीय पुस्तकालय में अतीत से वर्तमान तक के लेखकों की पुस्तकों को प्रमुखता दी गई है। सूचना क्रांति के दौर को देखते हुए यहां के पुस्तकालय का कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण किया गया है ताकि छात्र-छात्राएं लेटेस्ट टेक्निक से रू-ब-रू हो सकें। यहां शैक्षिक, बौद्धिक तथा तकनीकी तीनों प्रकार की सूचनाओं का समावेश किया गया है।

संस्कृति विश्वविद्यालय के मुख्य लाइब्रेरियन रूप किशोर शर्मा का कहना है कि किसी पुस्तकालय की सफलता के मानदण्ड का महत्वपूर्ण भाग अभिकल्पना और उसकी भविष्य योजना से होता है। यहां का शांत वातावरण जहां छात्र-छात्राओं को पुस्तकालय की तरफ आकर्षित करता है वहीं कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण स्वरूप छात्र-छात्राओं की जिजीविषा को शांत करने में पूरी तरह से सक्षम है। यहां देश-दुनिया के शोध-पत्रों के साथ ही तरह-तरह के जर्नल्स शोधार्थी छात्र-छात्राओं के लिए काफी मददगार सिद्ध होते हैं।

पुस्तकालय संस्थान के प्राध्यापकों के प्रकाशित शोध-पत्रों को डिजिटल रूप में निर्माण कर छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराता है। श्री शर्मा का कहना है कि यहां समय-समय पर शैक्षिक तथा बौद्धिक विद्वतजन अपने शोधपत्र के माध्यम से ज्ञानवर्धक विचार प्रस्फुटित करते रहते हैं जिससे विद्यार्थियों में नवोन्मुखता का संचार होता है।

श्री शर्मा का कहना है कि थीसिस, प्रश्न-पत्र, प्राध्यापकों की प्रकाशित रचनायें, वैज्ञानिक रचनायें, सार इत्यादि अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों को Library सहेज कर रखता है जिसका लाभ छात्र-छात्राओं को वर्षभर मिलता रहता है।

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