Law Commission ने पूरे देश में एक साथ चुनाव पर सहमति को बुलाई सर्वदलीय बैठक

राजनैतिक दलों से विचार-विमर्श करने के लिए 7 और 8 जुलाई को होगी Law Commission की बैठक

नई दिल्‍ली। इन दिनों पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बहस जोरों पर है। इसी कड़ी में विधि आयोग Law Commission ने सभी बड़े राजनैतिक दलों से विचार-विमर्श करने के लिए 7 और 8 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर चर्चा होगी। आयोग इस मामले में एक साथ चुनावों की संभावना और इसकी व्यवहार्यता पर भा बात करेगा।

उल्लेखनीय है कि विधि आयोग ने जनता से एक देश, एक चुनाव मामले पर सुझाव मांगे थे। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस मामले में एक कमेटी गठित की थी, जिसने केंद्र सरकार को सूबे में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2022 के बजाय 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ कराने की सलाह दी थी।

उधर, केंद्र सरकार की ओर से विधि आयोग द्वारा इस मुद्दे पर गठित कमेटी ने भी दिसंबर 2021 से पहले होने वाले सभी विधानसभा चुनाव वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ करा लिए जाने की बात कही थी। हालांकि कमेटी की इस सलाह पर विपक्ष ने विरोध जताया।

पांच फायदे जो लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से हो सकते हैं। मोदी सरकार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के पक्ष में माहौल बनाने की कवायद में लगी है।
पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार इस बात के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिश कर रही है कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के लिए एक साथ चुनाव हों।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार यह बात कह चुके हैं। उनके बयानों के बाद चुनाव आयोग का भी बयान आया है कि वह ऐसा कराने के लिहाज से अपनी क्षमताएं विकसित कर रहा है। उसके मुताबिक इस साल सितंबर तक वह इस स्थिति में आ जाएगा कि अगर जरूरत पड़ी तो लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकें।

आजादी के बाद शुरुआती सालों में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। हालांकि, इसके लिए कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं थी लेकिन सुविधा के नाते 1952 के पहले आम चुनाव के साथ ही राज्यों की विधानसभा के लिए भी चुनाव हुए थे। तकरीबन 15 साल तक विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ चले लेकिन बाद में यह चक्र गड़बड़ा गया क्योंकि कुछ राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता की वजह से एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला और कुछ सरकारें अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले गिर गईं।

अब देखना यह है कि  Law Commission की इस बैठक के बाद ही पता चलेगा कि पूरे देश में एकसाथचुनाव कराने कितनी संभवना बनती है।

-एजेंसी

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