फिल्ममेकर्स को भी अपनी और खींच रहा है कुंभ का मेला

प्रयागराज। हिंदी फिल्मों और कुंभ मेले का पुराना नाता रहा है। कुंभ में बिछड़ने वाले किरदार कई फिल्मों का सब्जेक्ट रह चुके हैं। कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धर्मिक आयोजन है। संगम की रेती पर बसा तंबुओं का शहर, स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु और संन्यासियों की भीड़ और वहां की सजावट गजब का विजुअल देती हैं। शायद यही वजह है कि कुंभ मेला कई फिल्ममेकर्स को भी अपनी और खींच रहा है।
कई फिल्ममेकर्स हैं जहां कुंभ से संबंधित विषयों पर फिल्म बना रहे हैं वहीं कुछ फिल्ममेकर्स अपनी फिल्म का कोई हिस्सा यहां शूट करना चाहते हैं।
हाल ही में फिल्ममेकर प्रकाश झा संगम पहुंचे थे। अपनी टीम के साथ उन्होंने मेला क्षेत्र की निरीक्षण किया है। संभव है कि अपनी अगली फिल्म के कुछ सीन्स वह यहां शूट करेंगे। यहां लगने वाला ‘भूले भटके शिविर’ सिद्धार्थ रॉय कपूर की अगली फिल्म का सब्जेक्ट है। इस शिविर में मेले में खो गए लोगों को मिलाया जाता है। इस शिविर को चलाने वाली संस्था के अध्यक्ष उमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि प्रोडक्शन हाउस के कुछ लोग उनसे मिलने आए थे। वे उनके पिता स्वर्गीय राजाराम पर फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने ही इस शिविर की शुरुआत की थी।
‘टॉइलट: एक प्रेमकथा’ के डायरेक्टर श्री नारायण सिंह भी यहां की कुछ तस्वीरें ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनकी अगली फिल्म इस जगह पर ही बेस्ड है इसलिए वह चाहते हैं कि वह फिल्म में हूबहू कुंभ को रीक्रिएट कर सकें। इनके अलावा फिल्ममेकर सुभाष घई भी कुंभ पर एक डॉक्युमेंटरी बना रहे हैं।
फिल्ममेकर तिग्मांशु धूलिया ने कहा कि कुंभ को रीक्रिएट नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पहली फिल्म ‘हासिल’ की शूटिंग यहां हुई थी। यहां जितने रंग और विविधता मिलती है, उसे रीक्रिएट नहीं कर सकते हैं। ‘मुक्काबाज’ के ऐक्टर विनीत कुमार ने पिछले कुंभ मेले में फिल्म ‘बॉम्बे टॉकीज’ के एक सीन की शूटिंग की थी। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में शूटिंग का अनुभव अभूतपूर्व होता है।
-एजेंसियां

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