हॉन्ग कॉन्ग में फिर गरमाया बोलने और लिखने की आजादी का मुद्दा

हॉन्ग कॉन्ग। हॉन्ग कॉन्ग में लेखकों और कलाकारों के कार्यक्रम रद्द करने और फाइनैंशल टाइम्स के एक वरिष्ठ पत्रकार को यहां आने की इजाजत नहीं देने की घटनाओं से एक बार फिर चीन के इस अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र में बोलने-लिखने की आजादी का मुद्दा गरमा गया है।
हालांकि, शुक्रवार को अंतिम समय पर प्रशासन ने अपना फैसला बदल कर कार्यक्रम के आयोजन की इजाजत दे दी लेकिन इससे पता चलता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर यहां टाल-मटोल वाला रवैया अपनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि 1997 में जब ग्रेट ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग का इलाका चीन को सौंपा था तो यह तय किया गया था कि यहां 50 साल तक अर्द्ध स्वायत्तता दी जाएगी। इससे यहां पर इकट्ठे होने और खुल कर बोलने की वो आजादी मिल गई जो चीन में आज तक नहीं मिलती है। साल 2015 में देश के नेताओं के कामों पर हुए प्रकाशन से प्रशासन की नाराजगी सामने आई थी और यह शक पैदा हुआ कि चीनी सुरक्षा बलों के हाथों कुछ लोगों का अपहरण कर लिया गया है।
इसके अलावा चीन विरोधी प्रदर्शन के आयोजकों पर कानूनी सख्ती ने भी इन हकों को लेकर चिंता पैदा कर दी थी।
हाल ही में 3 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनसे यह पता चलता है कि यहां के प्रशासक बोलने की आजादी और नागरिक अधिकारों को लेकर उदार नहीं है।
हॉन्ग कॉन्ग के एक कला स्थल ने तय किया कि वह निर्वासित चीनी लेखक मा जियान को साहित्योत्सव में बोलने का मौका देगा लेकिन एक सप्ताह पहले उनकी मौजूदगी को लेकर आयोजन रद्द कर दिया गया था। मा जब शुक्रवार को दोपहर बाद हॉन्ग कॉन्ग पहुंचे, तब तक यह आयोजन अनुमति नहीं पा सका था। तब उन्होंने यह संदेह जाहिर किया था एक ‘अदृश्य हाथ’ हालात पर काबू पाने की फिराक में है।
जियान ने कहा, ‘मैं हर हाल में बोलूंगा। अगर यहां का एक भी बाशिंदा मुझे सुनने का ख्वाहिशमंद है या एक भी पाठक जो मुझे चाहता है, मैं उसके लिए जरूर मौजूद रहूंगा।’ मा के इस ऐलान के बाद उन्हें इजाजत मिल गई। उन्हें शनिवार शाम को बोलना है। गौरतलब है कि इस 65 वर्षीय लेखक को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की आलोचना के लिए जाना जाता है। उनके 6 उपन्यासों पर चीन में रोक लगी है। उनकी एक किताब की तुलना महान अंग्रेजी लेखक जॉर्ज ओरवेल के काम से की जाती है। इसके अलावा, फाइनैंशल टाइम्स के एशिया समाचार संपादक विक्टर मालेट के यहां आने पर ऐतराज जाहिर किया गया। एक अन्य घटना में चीनी ऑस्ट्रेलियाई कलाकार बडीयूकाओ की एक प्रदर्शनी को सुरक्षा कारणों से रद्द करने का फरमान सुनाया गया था।
-एजेंसियां

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