इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने भी मांगा आर्थिक सहायता पैकेज

मथुरा। कोरोना संक्रमण से सीबीएसई स्कूलों के बर्बादी की कगार पहुंचने से इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन चिंतित है। लॉकडाउन में कोरोना योद्धाओं की तरह बच्चों का शिक्षण लगातार करा रहे स्कूलों के सामने अब शिक्षक, कर्मचारी व चालक-परिचालकों के वेतन देने का बड़ा संकट है। तीन माह में स्कूलों को जहां फीस का एक रुपया भी नहीं मिला है, वहीं शासन ने भी किसी का वेतन न रोकने के निर्देश दे रखे हैं।

निजी स्कूल बर्बादी की कगार पर, संगठन द्वारा  की मांग
तीन माह का वाहन शुल्क माफ करने से चालक-परिचालक सड़क पर
स्टॉफ के वेतन के भी लाले, नवीन सत्र में नहीं आया एक भी एडमीशन

इस गम्भीर मुद्दे को लेकर फेडरेशन की शनिवार को हुई ऑनलाइन बैठक में चिंता जताई गई कि यदि फीस या शासन से आर्थिक पैकेज नहीं मिला तो लॉकडाउन के बाद स्कूल चलाना संभव नहीं होगा। इस आशय का एक मांगपत्र भी मुख्यमंत्री को भेजते हुए केन्द्र व राज्य सरकार से समस्त निजी शिक्षण संस्थानों को तत्काल आर्थिक पैकेज प्रदान करने व अभिभावकों को तत्काल ऑनलाइन फीस जमा करने के निर्देश देने की मांग की गयी है।

इंडिपेंडेंड स्कूल फेडरेशन के पदाधिकारी डा. ओम, संजय पाठक, डा. अनिल, डा. अशोक सिकरवार, आशीष भाटिया व कुलदीप लवानिया के साथ 26 स्कूलों के प्रतिनिधियों की बैठक में कहा गया कि मार्च महीने में हुए लॉकडाउन से लेकर अब तक जनपद के निजी विद्यालय बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। शासन-प्रशासन की सलाह पर अमल करते हुए किसी भी स्कूल ने फीस नहीं बढ़ाई है। स्कूल वाहनों की फीस तक माफ कर दी है, जिससे बड़ी संख्या में ड्राइवर, कन्डक्टरों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। नवीन सत्र में एडमिशन नहीं हो सके हैं। स्कूलों में छात्र संख्या प्रभावित है। यही नहीं पिछले वर्ष की बकाया फीस भी अभी तक नहीं मिली है। त्रि-मासिक के स्थान पर प्रतिमाह फीस जमा कराने का प्रावधान किया है, ताकि अभिभावक सहजता पूर्वक फीस जमा करा सकें।

फीस नियामक कानून के अन्तर्गत शासन-प्रशासन के पास स्कूल की कुल जमा धनराशि और खर्चों का हिसाब रहता है। प्रशासन भी समझ चुका है कि स्कूली फीस का ज्यादातर हिस्सा सिर्फ सेलरी में और बकाया बिजली, पानी, मरम्मत, विभिन्न टैक्स आदि में खर्च हो जाता है। बहुत बड़ा स्टाफ सिर्फ स्कूल फीस पर निर्भर है। फीस प्राप्त न होने का अर्थ है, स्कूलों की बर्बादी और लाखों कर्मचारियों का सड़क पर आ जाना। इन सबके बाद भी बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित स्कूल विपरीत परिस्थिति में भी ऑनलाइन शिक्षा प्रदान कर छात्रों का भविष्य सुरक्षित करने के यत्न में लगे हैं। उक्त बातें सरकार एवं माननीय न्यायालय भी जानता है, इसीलिये फीस न देने जैसी मांगों को नकारता रहा है।

ज्ञापन में मांग की गयी है कि स्कूलों के वजूद को बचाय रखने के लिए सरकार को बिजली बिल, स्कूल बस के सभी प्रकार के टैक्स आदि माफ करने चाहिए। साथ ही सरकारी विभागों में कार्यरत अभिभावकों को तत्काल स्कूल फीस जमा करवाने के कड़े आदेश पारित करने चाहिए। इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ने भी सम्मानित अभिभावकों से विनम्र निवेदन किया है कि वे अपने पाल्यों की फीस जमा करायें, ताकि स्कूलों के स्टाफ का जीवन और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। शासन से मांग की गई है कि स्कूलों को इस संकट की घड़ी में आर्थिक पैकेज दिया जाए, ताकि वे शिक्षक, कर्मचारी, ड्राइवर व कंडक्टरों को वेतन दे सकें।

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