ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर

तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर होता दिख रहा है। सोमवार को सऊदी अरब के 2 तेल टैंकरों को यूएई के समुद्री तट के पास निशाना बनाया गया। हालांकि, अब तक न तो सऊदी अरब और न ही यूएई ने इसके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया है। हॉर्मूज जलडमरू मध्य के बाहरी हिस्से में स्थित फुजैरा पोर्ट पर यह घटना हुई। फुजैरा पोर्ट तेल निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण है और ज्यादातर खाड़ी देशों का तेल निर्यात इसी पोर्ट के रास्ते से होकर गुजरता है।
यह घटना क्यों है इतनी महत्वपूर्ण
महत्वपूर्ण बात यह है कि सऊदी अरब, इराक, UAE, कुवैत, कतर और ईरान से भी ज्यादातर तेल का निर्यात हॉर्मूज जलडमरू मध्य से होता है और यह आंकड़ा कम से कम 15 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। विश्व का लगभग 30% समुद्र में पैदा होने वाला तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। तेल विश्लेषक फर्म वोरटेक्सा के अनुसार 17.2 मिलियन क्रूड और कच्चा तेल 2017 में इसी रास्ते से निर्यात हुआ था। हॉर्मूज जलडमरू मध्य ओपेक देशों के लिए बहुत हद तक एकमात्र रास्ता है जिसके जरिए वह तेल निर्यात कर सकते हैं।
भारत पर भी पड़ेगा इसका असर
इस जलमार्ग के रास्ते से लिक्विफाइज नेचुरल गैस (एलएनजी) भी होकर गुजरती है और दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक कतर भी इसी मार्ग का प्रयोग करता है। कतर लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है। सोमवार को हुए इस घटनाक्रम का असर भारत में भी दिखा और तेल की कीमतों में 1.78% तक की वृद्धि भी देखी गई।
इस वक्त ही क्यों बनी हैं ऐसी परिस्थितियां
हाालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि सऊदी के तेल टैंकरों पर किसने हमला किया लेकिन इसके बावजूद यह घटना बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों में हुई है। अमेरिका और ईरान के संबंध पिछले एक साल में बेहद खराब हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन में ईरान के साथ हुए न्यूक्लियर डील को खत्म कर दिया और ईरान पर कठोर प्रतिबंध फिर से लागू हो गए। भारत और चीन जैसे देशों को दी गई रियायत भी खत्म हो गई और इन सबका असर ईरान के अर्थव्यवस्था पर बुरी तरह से पड़ा।
ईरान के खिलाफ US ने मिसाइल-युद्धपोत तैनात कर दिखाए सख्त तेवर
अमेरिका ने अपने युद्धपोत यूएसएस आरलिंगटन और यूएसएस अब्राहम लिंकन को पश्चिमी एशिया क्षेत्र में तैनात किया है। अमेरिका के रक्षा सलाहकार ने पहले ही कहा था कि अमेरिका के खिलाफ ईरान युद्ध की तैयारी कर रहा है। ईरान के आक्रमण करने की आशंका का हवाला देते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में पैट्रियट मिसाइलें भी तैनात की हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा का जायजा लेने के लिए इराक का दौरा भी किया। हालांकि, संयुक्त रूप से इन सभी घटनाक्रम का असर दोनों देशों के बीच तनाव के चरम पर पहुंच जाने के रूप में हुआ।
अब वैश्विक स्तर पर ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं
मौजूदा हालात को देखते हुए युद्ध जैसी स्थिति लगभग असंभव है। ईरान ने पहले ही इस घटना में किसी तरह की भूमिका से इंकार करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ईरान ने अपने बयान में इसे कुछ बुरा चाहने वालों की साजिश और कुछ विदेशी ताकतों के रोमांच की कोशिश भी करार दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी युद्ध कोई उपयोगी चीज नहीं हो सकती। अगले साल डॉनल्ड ट्रंप को फिर से चुनाव के लिए जाना है। हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ और प्रतिबंध एवं प्रॉक्सी वॉर की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हो सकता है कि इस साजिश में ईरान का वाकई कोई हाथ न हो लेकिन ऐसी स्थिति का खामियाजा दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।
-एजेंसियां

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