Namami gange में कागजी सफाई: सरकार से मांगा इस्तीफा

Namami gange के नाम पर नदियों में गिरते सीवरों की रोकथाम पर कोई ठोस कार्य नहीं किया गया

मथुरा। Namami gange के नाम पर कागजी सफाई में हजम बीस हजार करोड़ रूपये के साथ ही 32 सालों में सत्तर हजार करोड़ रूपये की हिमालयन बरबादी के बावजूद रीवर के बजाय सीवर बनती गई गंगा की जिम्मेदार सरकार से इस्तीफा माँगा गया।

डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में ‘नदियां छोड़ो सीवर जोड़ो’ आन्दोलन की चौथी वर्षगांठ पर गंगा दशहरा के दिन शुक्रवार को विश्राम घाट क्षेत्र में आयोजित Namami gange बनाम ठगामि गंगे’ खुला मंच में दुरूपयोगित परियोजना पर आर0 टी0 आई0 में प्रधान मंत्री, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी समेत पेय जल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती से जवाब तलब किया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं ‘नदियां छोड़ो, सीवर जोड़ो’ आन्दोलन के सूत्रधार डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि नदियां छोड़ो, सीवर जोड़ो’ विकल्प के बावजूद सरकार गंगा की कागजी सफाई में जन-धन अपव्यय करती रही और उससे नदियों में गिरते सीवरों की रोकथाम पर कोई ठोस कार्य नहीं किया गया। आगे कहा कि गंगा सफाई के लिए आदिकाल से चलते आये एसटीपी मॉडल की अफीम देकर जनता को फिर सुला दिया गया और शहर के बाकी प्लांट रिश्वतखोरी के बूते आराम फरमाते रहे। सवाल उठाया कि जब तक शहर के एसटीपी कार्य नहीं करेंगे, तब तक नदी पुलिन के एसटीपी संचित मलिन जल कैसे स्वच्छ कर सकेंगे?

डॉ0 शर्मा ने आक्रोश जताया कि सीवरमुक्त नदियों के मसले पर 30 जुलाई 2014 के दिन नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन के पश्चात् प्रधान मंत्री को सौंपे गये ज्ञापन का तीन वर्षों तक जवाब नहीं दिया गया। फिर लंबी इंतिजारी के बाद आर0 टी0 आई0 में तलब ज्ञापन नष्ट हुआ बताया गया। आगे कहा कि सरकार वैज्ञानिकों और नौकरशाहों की हाँ में हाँ मिलाकर कागजों पर गंगा साफ करती रही और उसकी प्रमुख सहायक यमुना का मुद्दा नजरअन्दाज किया जाता रहा। कहा कि जब तक संपूर्ण देश का नदीतंत्र सीवरमुक्त नहीं किया जायेगा, तब तक स्वच्छ भारत का सपना साकार नहीं हो सकेगा और नदियों के साथ भूजल पर जारी प्रदूषक हमले बहुत जल्द पेयजल संकट उत्पन्न कर देंगे।

डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि देश में बढ़ते जनसंख्या घनत्व के मद्देनजर सरकारें चंूकि उपजाऊ योजना दे पाने में असमर्थ रही हैं लिहाजा सत्ताशाही इन्दिरायुगीन अवसान से उपजी राजनीतिक शून्यता का लाभ उठाते हुए भावनात्मक मुद्दों से भविष्य उज्ज्वल कर रही है। आगे कहा कि बढ़ती जनसंख्या के साथ भारत की प्रमुख समस्या प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधंुध दुरूपयोग रही है जिसकी खुली छूट ने देश के आर्थिक तंत्र को गहराई तक प्रभावित किया है। कहा कि संविधान में जितना ज्यादा लिखा गया है, उसका अनुपालन उतना ही कम किया गया है।

डॉ0 शर्मा ने खेद जताया कि गंगा-यमुना की सीवरी दुर्दशा के बावजूद वोट बैंक के लालच में वर्ष 2019 के जनवरी से मार्च के बीच प्रयाग में होने वाले कुम्भ का राजनीतिक प्रचार अभी से शुरू कर दिया गया है जहाँ सन्त असन्त सभी मलमूत्र में स्नान कर मोक्ष की कामना करेंगे। आगे कहा कि धर्म के नाम पर इससे बड़ा धोखा और भला क्या होगा? मगर लोग हैं कि जानकर भी अनजान बनते रहे हैं।

इससे पूर्व उपस्थितों ने माँ यमुना के चि़त्रपट पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल भारत माता व माँ यमुना के जयकारों और ‘रूके नहीं यदि गिरते सीवर, शुद्ध नहीं होगी कोई रीवर’ मत खेलो शुद्धि का छल, मुक्ति मात्र नदियों का हल’ ‘यमुना मुक्ति का हल करो सवाल, मोदी खट्टर केजरीवाल’ जैसे नारों से गूँज उठा। आयोजन में मंसोला चतुर्वेदी, गोपाल चतुर्वेदी, कप्पो, श्रीकान्त चतुर्वेदी, मदन सिसौदिया ने भागीदारी की।

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