Jewar में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का खेल खेल रही हैं सरकार

आगरा। आगरा की सिविल सोसायटी ने कहा है कि आगरा के हक को नज़रअंदाज कर Jewar में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का खेल केंद्र व राज्‍य की सरकार खेल रही हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में प्रदेश सरकार लोकसभा के 2019 में होने जा रहे चुनावों को द्ष्‍टिगत ‘ एयर पोर्ट – एयरपोर्ट ‘ का निहायत घटिया खेल खेल रही है ।

हिंडन, अलीगढ, Jewar के प्रस्‍तावित सिविल एवियेशन के फील्‍डों की योजनाओं को लेकर हाल में ही इस खेल का नया अध्‍याय शुरू हो गया है। मूल रूप से आगरा के हक और जरूरतों को नजर अंदाज कर जैबर में ‘ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम पर ही एयरपोर्ट बना डालने की घाषणा कर डाली गयी । जब सरकार के फैसले की ज्‍योग्राफीकल लोकेशन संबधी अंतर्राष्‍ट्रीय संबधी कानूनों प्रचलित मान्‍यताओं के परिप्रेक्ष्‍य जग हंसाई हुई तो इसका नाम जैबर इंटरनेशनल एयरपोर्ट कर डाला गया।

पहले कहा गया कि नेशनल कपीटल जोन एनसीआर की हवाई यात्री जरूरतों के विस्‍तार व समायोजन के लिये इसे बनाया जा रहा है । इसके बाद जब ढूंढने पर भी कोई निवेशक ,निवेश के लियेआगे नहीं आया तो यूपी सरकार के खजाने पर ही इस प्राजेक्‍ट का पूरा बजन डालदिया गया। इसके लिये पहले सरकारी कंपनी बनायी गयी फिर उसी पर सरकारी धन से ही जमीन खरीदने , किसानों को मुआबजा दिये जाने , प्रभावित परिवारो को नौकरी दिये जाने के साथ ही पुनर्वास के लिये धन खर्च करवाये जाने जैसी योजनाओं पर क्रियान्‍वयन करवाये जाने के प्रयास शुरू हो गये।
कांग्रेस शासन में किसानों की जमीन अधिग्रहित करने के लिये ‘आपसी सहमति ‘ संबधी कानून को दर किनार कर किसानों को जबरिया अपनी जमीन बेचने के लिये विवश करने पर सरकार उतर आयी है। जबकि यही भाजपाई जब विपक्ष में थे ,जरूरी योजनाओं और रक्षा प्रतिष्‍ठानों तक के लिये जमीन अधिग्रहण के कानून में ‘अर्जेंसी क्‍लाज ‘ क्‍लाज के इस्‍तेमाल करने का सडक से लेकर संसद तक विरोध करते नहीं अघाते थे। फिलहाल तो जेवर एयरुील्‍ड प्रोजेक्‍ट के लिये जमीन खरीदने में सरकार जुट गयी है ।

जनता के धन का इससे ज्‍यादा और बडा इस्‍तेमाल पूरे उत्‍तर प्रदेश में कही भी नहीं हुआ है। जैसा कि सरकार के मंत्री और नेता दोनों ही सार्वजनिक तौर पर स्‍वीकारते रहे हैं कि जेबर का ग्रीनफील्‍ड एयरपोर्ट प्रोजेक्‍ट , कामर्शियल रूप से आपरेटिड इन्‍दिरा गांधी एयरपोर्ट (टी -3) का पूरक होगा और ऐसे में जैबर प्राजेक्‍ट को भी कामर्शियल प्रोजैक्‍ट मानने में सरकार को क्‍या संकोच है ।ऐसे में यह अहम प्रश्‍न है कि आपसी सहमति सिद्धांत को ताक पर रख कर है कामर्शियल आपरेशन के लिये सरकार क्‍यों जमीन खरीद रही है। एन सी आर के इस प्राजैक्‍ट का यूपी के खजाने पर कितना भार पडेगा इसकी जनता के सामने साफ तस्‍वीर होनी चाहिये और इसके लिये विधान सभा का विशेष अधिवेशन बुलाया जाना ही जरूरी है। इसी के साथा हम मानते हैं कि सरकार को जैबर की जरूरत के लिये पूरक बजट भी विधान मंडल के सदनों में लाया जाना चाहिये।

आखिर Jewar ही क्‍यों
जैबर पश्‍चिमी उत्‍तर प्रदेश की नहरी सिंचाई संपन्‍न प्रदेश की उन दर्जन भर तहसीलों में से एक है,जहां के किसान और कृषक के रूप में उपलब्‍धियां हमेशा सुर्खियों में रही हैं। किन्‍त खेती करने वालों के दिन , 2015 से जैबर में कैलाश हासपिटल खुलने के साथ ही गहराना शुरू हो गये। दरअसल जैबर स्‍थित कैलाश हास्‍पिटल केन्‍द्रीय मंत्री डा महेश शर्मा के परिवार का है। अस्‍पताल एयरपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया के एम्‍पैनल्‍ड अस्‍पतालों की सूची में भी शामिल है।

जाहिर है कि Jewar एयर पोर्ट बन जाने के बाद किसान भले ही यहां से निर्वासित हो जाये किन्‍तु बडी संख्‍या में एयरपोर्ट अथार्टी, इंटरनेशनल एयरपोर्ट संचालक सरकारी कंपनी के अधिकारी और सेवा कर्मी जरूर इसकी पहुंच में होंगे। दरअसल श्री मेहश शर्मा कैलाश समूह अस्‍पताल श्री महेश शर्मा के परिवार जैसे पत्‍नी और पुत्र आदि से युक्‍त बोर्ड के द्वारा संचालित कंपनी है। अन्‍यथा 2014 तक तो खुद प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आगरा में ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने की आगरा में ही घोषणा की हुई थी।

किसी मंत्री के द्वारा अपने परिवार की कंपनी को लाभ पहुंचाने का यह स्‍पष्‍ट प्रकरण है। पता नहीं क्‍यों उत्‍तर प्रदेश सरकार की योगी सरकार ने इसे संज्ञान में क्‍यो नहीं लिया। जबकि श्री शर्मा यू पी से ही निर्वाचित सांसद हैं और मुख्‍यमंत्री श्री योगी आदित्‍यनाथ जी समय समय पर सार्वजनिक जीवन में इ्रमानदारी लाये जाने की बात करते रहे हैं। खुद की कंपनी को एक मंत्री के द्वारा लाभ पहुंचाये जाने की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद मुख्‍यमंत्री अगर खामोश रहेंगे तो प्रदेश के अन्‍य राजनीतिज्ञ जब अपने पद लाभ का उपयोग करेंगे तो उन्‍हे भाजपा सरकारें किस नैतिक हक से रोक पायेंगीं।यह प्रश्‍न मेरा या सिविल सोसायटी के सदस्‍यों का ही नहीं उस आम नागरिक का है जो कि ‘न खऊंगा और न खाने दूंगा’ के उद्घोष पर विश्‍वास करके वोट देता रहा है।

श्री महेश शर्मा प्राइम मिनिस्टर मोदी द्वार कही गयी बात को सच करने में लगे हैं. श्री मोदी ने २०१३ उस समय कि सरकार के लिये कहा था “इस सरकार में छोटा मंत्री भी अपने गाँव में एयरपोर्ट बना लेता है”.
अब आप ही सोचें कि कार्पोरेट सैक्‍टर के एक महंगे अस्‍पताल के लिये पूरे एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राजेक्‍ट को ही आगरा से ले जाया गया। यही नहीं अब तो एयरपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया और सरकारी एयरलाइंस खुद इस असप्‍ताल संचालक कंपनी की एम्‍पैनल्‍ड लिस्‍ट में शामिल हैं।

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