कर्नाटक सरकार का भविष्‍य अधर में, 19 एमएलए सदन से गैरहाजिर

बेंगलुरु। कर्नाटक में एच डी कुमारस्वामी की अगुआई वाली कांग्रेस-जेडीएस सरकार का भविष्य अधर में है। गुरुवार को विधानसभा में सीएम कुमारस्वामी ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। चर्चा के दौरान पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बहुमत परीक्षण टालने की मांग की है। इस बीच सदन में बागी विधायकों समेत 19 एमएलए गैरहाजिर बताए जा रहे हैं। इनमें से एक कांग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल मुंबई के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हैं।
मैं सदन में बहुमत साबित करूंगा: कुमारस्वामी
सीएम कुमारस्वामी ने विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया। कुमारस्वामी ने सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं सदन में इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहता कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा है। मैं केवल इसलिए यहां नहीं आया हूं कि मैं गठबंधन सरकार चला सकता या नहीं। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि बीजेपी की मदद से विधायक सुप्रीम कोर्ट गए।
सीएम ने कहा, ‘हमारे खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए। मैं सदन में बहुमत साबित करूंगा। मेरी प्राथमिकता सीएम बने रहना या सत्ता बरकरार रखना नहीं है।’ कुमारस्वामी ने कहा कि स्पीकर की भूमिका खराब करने की कोशिश की जा रही है। हमें कर्नाटक के विकास के लिए काम करना चाहिए। सीएम ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के नेता बहुत हड़बड़ी में क्यों है, वह आज ही बहस कराने पर क्यों तुले हुए हैं?
सदन को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, ‘मेरा और मेरे मंत्रियों का आत्मसम्मान है। मुझे कुछ बातें साफ करना चाहता हूं। इस सरकार को अस्थिर करने के लिए कौन जिम्मेदार है?’
विधानसभा में नहीं पहुंचे ये 19 विधायक
एसटी सोमशेखर (कांग्रेस), रमेश जरकिहोली (कांग्रेस), रोशन बेग (कांग्रेस से निलंबित), बी बासवराज (कांग्रेस), मुनिरत्ना (कांग्रेस), श्रीमंत पाटिल (कांग्रेस), आनंद सिंह (कांग्रेस), बी नागेंद्र (कांग्रेस), आर शंकर (निर्दलीय), के गोपालैया (जेडीएस), नारायण गौड़ा (जेडीएस), एमटीबी नागराज (कांग्रेस), बीसी पाटिल (कांग्रेस), एच विश्वनाथ (जेडीएस), महेश कुमताहल्ली (कांग्रेस), प्रताप गौड़ा पाटिल (बीजेपी), डॉ सुधाकर (कांग्रेस), शिवराम हेब्बार (कांग्रेस) और एन महेश (बीएसपी)।
कांग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल मुंबई में भर्ती
कर्नाटक के एक कांग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल विधानसभा सत्र में चल रहे विश्वास मत प्रस्ताव में शामिल नहीं हुए। उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। पार्टी के एक सूत्र ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पार्टी सूत्र ने बताया कि पाटिल ने बुधवार को सीने में दर्द व सांस लेने में शिकायत के बाद मुंबई के लिए उड़ान भरी और उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पाटिल, राज्य के उत्तर-पश्चिमी बेलगाम जिले के कागवाड विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वह शहर के बाहरी इलाके में देवनहल्ली के पास एक रिजॉर्ट में पार्टी के अन्य विधायकों के साथ ठहरे हुए थे। सूत्र ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘हमें सुबह रिजॉर्ट से उनके गैरहाजिर होने की बात पता चली और पता करने पर सामने आया है कि वह इलाज के लिए मुंबई गए हैं।’ पाटिल के सत्र से गैरहाजिर होने के बाद सत्तारूढ़ सहयोगी की विधानसभा में संख्या 66 रह गई है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष व वरिष्ठ बागी विधायक आर रामलिंगा रेड्डी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सबसे ज्यादा सम्मान: स्पीकर
विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने कहा, ‘यह सदन सुप्रीम कोर्ट का सबसे ज्यादा सम्मान करता है। मैं कांग्रेस के नेताओं को साफ कर देना चाहता हूं कि यह ऑफिस आपको आपके अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोक नहीं रहा है। उसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है। अगर आप सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए इस अधिकार में बदलाव का इरादा रखते हैं तो आपको ऐसा करने की छूट है।’
कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने कहा, ‘जब एक सदस्य नहीं आने का फैसला करता है तो हमारे अटेंडेंट उन्हें अटेंडेंस रजिस्टर में साइन करने नहीं देंगे। इस सदस्य को ऐसा कोई भत्ता लेने की इजाजत नहीं होगी जो एक सदस्य को सदन में उपस्थित रहने पर मिलता है।’
बहुमत परीक्षण उचित नहीं होगा: सिद्धारमैया
विधानसभा में कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, ‘जब तक हमें सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश पर स्पष्टीकरण नहीं मिल जाता, इस सत्र में बहुमत परीक्षण कराना उचित नहीं होगा। यह संविधान के खिलाफ होगा।’
सिद्धारमैया ने आगे कहा, ‘अगर हम विश्वास प्रस्ताव के साथ आगे बढ़ते हैं और अगर विप लागू होता है तो वे (बागी कांग्रेस और जेडीएस विधायक) सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से सदन में नहीं आएंगे। यह गठबंधन सरकार के लिए बड़ा नुकसान होगा।’
101 प्रतिशत उनकी हार होगी: येदियुरप्पा
कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। इस दौरान पूर्व सीएम और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने सदन में विश्वास मत पर चर्चा के लिए समय तय करने की मांग की। वहीं, विधानसभा के अंदर जाने से पहले येदियुरप्पा ने कहा कि हम 101 प्रतिशत आश्वस्त हैं। वे 100 से कम हैं, हम 105 हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनकी हार होगी।
बस से विधानसभा पहुंचे बीजेपी विधायक
फ्लोर टेस्ट के लिए कर्नाटक विधानसभा पहुंचे पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने मीडिया से कोई बात नहीं की। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा भी फ्लोर टेस्ट के लिए बीजेपी विधायकों के साथ विधानसभा पहुंचे। बीजेपी विधायक एक बस में सवार होकर सदन पहुंचे। विश्वास प्रस्ताव पेश करने से पहले जेडीएस ने अपने तीन बागी विधायकों एच विश्वनाथ, गोपालैया और नारायण गौड़ा पर कार्यवाही करते हुए उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू किया है।
क्या है बहुमत का गणित
कर्नाटक विधानसभा में एक मनोनीत विधायक समेत कुल 225 सदस्य हैं। सदन में 224 निर्वाचित सदस्य हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर मनोनीत सदस्य भी वोट डाल सकता है। अगर 15 विधायक (एक ने इस्तीफा वापस लिया) वोटिंग में गैरहाजिर रहते हैं तो कुल संख्याबल 210 पहुंच जाएगा। ऐसे में बहुमत के लिए 106 के जादुई आंकड़े की जरूरत होगी। बीजेपी के पास कुल 105 विधायक हैं। यानी बागियों के वोटिंग से बाहर रहने की सूरत में उसे कुमारस्वामी की सरकार गिराने के लिए सिर्फ एक विधायक का समर्थन जरूरी होगा। दो निर्दलीय विधायकों (एच नागेश और आर शंकर) ने पहले ही बीजेपी को समर्थन दे रखा है।
इस्तीफे से पहले संख्याबल
बीजेपी के 105, कांग्रेस के 80 (स्पीकर और मनोनीत सदस्य समेत), जेडीएस के 37, दो निर्दलीय और बीएसपी के एक सदस्य।
कुल- 225 विधायक
इस्तीफा मंजूर हुआ तो संख्याबल
बीजेपी- 105, कांग्रेस-68, जेडीएस-34, निर्दलीय- 2, बीएसपी-1।
कुल- 210 विधायक
बहुमत के लिए जरूरी- 106 विधायक
-एजेंसियां

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