निरंकारी मिशन की पूूू. प्रमुख माता सविंदर को ब्रजवासियों ने याद किया

मथुरा। संत निरंकारी मिशन की पूर्व प्रमुख पूज्य माता सविंदर हरदेव जी महाराज ब्रह्मलीन हो गए हैं, पूरे निरंकारी जगत में शोकाकुल माहौल है।

स्थानीय प्रवक्ता किशोर “स्वर्ण” ने बताया कि 61 वर्षीय माता सविन्दर जी कल रविवार सायं को निरंकार में लीन हो गए, उनका पार्थिव शरीर निरंकारी भक्तों द्वारा अंतिम दर्शनों के लिये रविवार रात्रि से दिल्ली के बुराड़ी मार्ग स्थित निरंकारी ग्राउंड न.8 में रखा गया था। सोमवार को भी दिनभर देश-विदेश के भक्तों का पहुंचना जारी रहा। मथुरा के तमाम भक्त भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। अंतिम दर्शन 7 अगस्त मंगलवार रात्रि तक जारी रहेगा |

उन्होंने बताया कि अंतिम यात्रा 8 अगस्त बुधवार को प्रात: 9 बजे दिल्ली के ग्राउंड नं.8 से प्रारंभ होगी और अंतिम संस्कार दोपहर 12 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट में किया जायेगा |

पूज्य माता सविंदर हरदेवजी के जीवन तथा शिक्षाओं से प्रेरणा लेने के लिये एक विशेष सत्संग कार्यक्रम सद्गुरु माता सुदीक्षा जी के सान्निध्य में उसी दिन, 8 अगस्त बुधवार को सायं 4 बजे से दिल्ली के बुराड़ी मार्ग स्थित निरंकारी सरोवर के सामने वाले ग्राउंड नं.2 में होगा|

स्थानीय प्रवक्ता किशोर “स्वर्ण” ने बताया कि पूज्य माता सविन्दर जी संत निरंकारी मिशन की पहली महिला प्रमुख थीं। दो वर्ष पूर्व बाबा हरदेव सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के बाद से संत निरंकारी मिशन के पांचवें सद्गुरु के रूप में पूज्य माता सविन्दर हरदेव जी महाराज कर रहे थे। ब्रह्मलीन होने से पूर्व बीमारी के चलते उन्होंने कुछ दिन पहले 16 जुलाई को ही पूज्य सुदीक्षा जी को सद्गुरु रूप में घोषित कर दिया था।

स्थानीय प्रवक्ता ने बताया कि 12 जनवरी 1957 को जन्मीं सविन्दरजी विद्यार्थी के रूप में अपनी कुशलता तथा परिश्रम के लिए जानी जाती थी और अपने विनम्र स्वभाव से सभी को प्रभावित करती थी। 14 नवम्बर 1975 को सविन्दर जी का विवाह बाबा हरदेव सिंह जी के साथ होे गया।

उन्होंने बताया कि जब 1980 में बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने संत निरंकारी मिशन की ज़िम्मेदारी संभाली तब से लगातार 36 वर्ष ’पूज्य माता सविन्दरजी’ ने बाबाजी के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर निरंकारी मिशन की सेवा की। बाबा हरदेव जी की हर कल्याण यात्रा और सत्संग कार्यक्रमों में चाहे वह देश में हो या दूरदेशों में, माता सविन्दर जी उनके साथ रहे। मिशन की अन्य गतिविधियों में भी पूर्ण रूचि दिखाई। पूज्य माता सविन्दरजी युवाओं के लिए एक विशेष प्रेरणा स्रोत बनी रही। युवाओं को प्रभावित करने का माताजी का अपना ही ढंग रहा। फलस्वरूप अनेक युवा मिशन के कार्यक्रमों में भाग लेने लगे और आज की दुनिया के प्रभाव से बच गए।

सद्गुरु रूप में माता सविन्दर जी का मथुरा आगमन मात्र एक बार ही हुआ था, वह गतवर्ष 17 दिसम्बर को छटीकरा-वृन्दावन मार्ग स्थित मैदान में हुए निरंकारी संत समागम में आए थे। उन्होंने हजारों भक्तों को निरंकार; प्रभु से जुड़े रहकर प्यार को फैलाने की सीख दी थी।

स्थानीय प्रवक्ता किशोर “स्वर्ण” ने बताया कि समागम के बाद माता सविन्दर जी जब वापस दिल्ली जाने को हुए तब उन्हेँ पता चला कि सेवा कर रहे तमाम भक्त दर्शन से वंचित रह गए है, तब उन्होंने रास्ता बदल दिया और नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर सेवादार-भक्तों को अपना मातृत्व प्रदान किया, इस मौके पर नवजात शिशुओं का नामकरण कर उन्हें भी अपना आशीर्वाद प्रदान किया था। उन क्षणों को याद कर भक्त भावुक हो रहे हैं, सबकी आंखें नम हैं।

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