दिग्‍गज अभिनेता इरफान खान की पहली बरसी आज

मुंबई। बॉलीवुड और हॉलीवुड के सबसे चहेते कलाकारों में से एक इरफान की 29 अप्रैल को पहली बरसी है। पिछले साल जब उनका इंतकाल हुआ तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। किसी को यकीन नहीं हो पा रहा था कि अपनी गजब की अदायगी और आंखों के एक्‍सप्रेशन्‍स से लोगों का दिल जीतने वाला अब उनके बीच नहीं है। इरफान का बैकग्राउंड मजबूत था लेकिन फिल्‍मी दुनिया में कदम रखने के लिए उन्‍होंने काफी संघर्ष किया। टीवी से हिंदी फिल्‍मों और फिर अंग्रेजी फिल्‍मों तक के सफर में हर दिन उन्‍होंने खुद को बेहतर बनाया।
​नवाब फैमिली में हुआ जन्‍म
इरफान का पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। उनका जन्‍म जयपुर में एक मुस्‍लिम नवाब फैमिली में हुआ था। एमए की पढ़ाई के दौरान उन्‍हें 1984 में दिल्‍ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) की स्‍कॉलरशिप मिल गई।
इन टीवी शोज में आए नजर
1987 में ग्रैजुएट होने के बाद इरफान मुंबई आ गए। यहां उन्‍होंने ‘चाणक्‍य’, ‘सारा जहां हमारा’, ‘बनेगी अपनी बात’, ‘चंद्रकांता’, स्‍पर्श जैसे कई टीवी शोज किए।
कैमियो रोल मिला और कट गया
थिअटर और टीवी का इरफान की जिंदगी में बड़ा रोल रहा और फिर मीरा नायर ने उन्‍हें फिल्‍म ‘सलाम बॉम्‍बे’ में एक कैमियो रोल दिया। हालांकि, 1988 में आई इस फिल्‍म से बाद में उनका रोल काट दिया गया।
इरफान की जिंदगी में कब बदली चीजें
इसके बाद इरफान 90 के दशक में क्रिटिकली अक्‍लेम्‍ड ‘एक डॉक्‍टर की मौत’ ‘सच अ लॉन्‍ग जर्नी’ समेत कुछ फिल्‍मों में नजर आए। हालांकि, इनमें उन्‍हें ज्‍यादा नोटिस नहीं किया गया। कई असफल फिल्‍मों के बाद चीजें तब बदलीं जब लंदन बेस्‍ड डायरेक्‍टर आसिफ कपाड़िया ने उन्‍हें ‘द वॉरियर’ में लीड रोल दिया। यह फिल्‍म 11 हफ्तों में पूरी हुई थी। 2001 में यह फिल्‍म कई इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल्‍स में दिखाई गई जहां से इरफान दुनियाभर में जाना-माना चेहरा बन गए।
इन फिल्‍मों में सराहा गया काम
इसके बाद इरफान ‘रोड टू लद्दाख’, ‘हासिल’, ‘मकबूल’, ‘रोग’ जैसी फिल्‍मों में नजर आए और उनके काम की सराहना हुई। इस दौरान वह कई फिल्‍मों में विलन के रोल में नजर आए। उन्‍होंने ‘हासिल’ के लिए बेस्‍ट विलन का फिल्‍मफेयर अवॉर्ड भी जीता। फिर ‘स्‍लमडॉग मिलेनअर’, ‘न्‍यू यॉर्क’, ‘ये साली जिंदगी’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘द लंच बॉक्‍स’, ‘डी-डे’, ‘हैदर’, ‘पीकू’, ‘मदारी’, ‘हिंदी मीडियम’, ‘करीब करीब सिंगल’ जैसी फिल्‍मों से उन्‍होंने अपनी ऐक्टिंग का लोहा मनवाया। हर फिल्‍म के उनके किरदार लोगों के जहन में बस गए।
ओवरसीज में हिट होने लगीं फिल्‍में
2007 में आई इरफान की फिल्‍म ‘लाइफ इन अ मेट्रो’ हिट रही। ‘द नेमसेक’ ओवरसीज में हिट रही और तब्‍बू के साथ उनके काम की प्रशंसा हुई। इसके बाद उन्‍होंने ‘मानो या ना मानो’ और ‘क्‍या कहें’ जैसे टीवी शोज किए।
विदेशों में ऐसे मिली पहचान
इरफान को विदेशों में तब पहचान और ज्‍यादा मिली जब उन्‍होंने डायरेक्‍टर मीरा नायर की इंग्लिश फिल्‍म ‘द नेमसेक’ एक नॉन रेजिडेंट बंगाली प्रफेसर का किरदार निभाया। यूएस के हर अखबार में इसकी चर्चा हुई। इसके बाद उन्‍होंने कई हॉलिवुड फिल्‍मों में काम किया।
सुतापा सिकदर से शादी, कैंसर के इलाज के लिए गए विदेश
इरफान ने राइटर सुतापा सिकदर से शादी की और वह भी एनएसडी ग्रैजुएट रही हैं। इरफान के दो बेटे हैं- बाबिल और अयान खान। 16 मार्च 2018 को इरफान ने बताया कि वह न्‍यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे हैं और इलाज के लिए विदेश जाएंगे।
​कैंसर से लड़कर लौटे, पूरी की फिल्‍म मगर…
इरफान कैंसर से लड़कर लौट आए थे और उन्‍होंने फिल्‍म ‘अंग्रेजी मीडियम’ पूरी की। हालांकि, उन्‍हें फिर दिक्‍कत शुरू हुई और colon इंफेक्शन के कारण 54 साल की उम्र में उनका इंतकाल हो गया।
-एजेंसियां

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