एक ही समय पर रिलीज़ होगी फिल्म Turtle और Wah Zindagi

इन्दौर। मेक इन इंडिया थीम पर आधारित हिंदी फिल्म Wah Zindagi शिवाज़ा फ़िल्म्स एंड एंटरटैंन्मेंट के बैनर तले बन रही है, जिसके डायरेक्टर महेश्वर के युवा दिनेश यादव, प्रोडूसर राजस्थान मूल के अशोक चौधरी व म्यूज़िक डायरेक्टर इंदौर के पराग छाबड़ा हैं फ़िल्म में बाॅलीवुड के प्रसिद्ध कलाकार संजय मिश्रा, विजय राज, नवीन कस्तूरिया, प्लबिता बोरथकूर, मनोज जोशी, अंकित शर्मा, अमोल देशमुख मोनिका शर्मा यस राजस्थानी जोया शाह है। इस फिल्म के पीछे मूल संदेश व भारतीय प्राॅडक्ट्स को प्राथमिकता देना है। इस फिल्म के द्वारा युवाओं को उद्योगों के प्रति मोटिवेट करना और मातृभूमि के प्रति प्रेम जगाना है। इस फिल्म पर पिछले 3 साल से लगातार काम चल रहा था और अब फिल्म लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही रिलीज की तारीख आने वाली है।

स्वदेशी- मेक इन इंडिया कॉन्सेप्ट पर आधारित इस फिल्म के द्वारा भारतीय उद्योगों की विभिन्न प्रॉडक्ट्स को विदेशों में एक विशिष्ट पहचान मिलेगी, साथ ही भारतीय प्रॉडक्ट्स (मेड इन इंडिया) को प्राथमिकता देने पर देशवासियों का ध्यान भी आकर्षित होगा।

फिल्म को दिवाली के आस-पास भारतभर व भारत के बाहर भी रिलीज करने का विचार है। यह फिल्म स्टार्टअप इंडिया को एक नई पहचान देगी ओर हिन्दुस्तान की व्यवसायिक व आर्थिक उन्नति में सहायक होगी। फिल्म में राष्ट्र के सुपर पावर बनने तक की यात्रा का पूरा होना दिखाया गया है। फिल्म में बहुत ही सुंदर पांच गाने है जो इंदौर के मूल निवासी युवाॅ पराग छाबड़ा ने कम्पोज़ किये है, जिन्होंने इंदौर के सरगम म्यूज़िक इन्स्टिट्यूट से ट्रेनिंग ली और आज वह महान संगीतकार ए.आर. रहमान के म्यूजिक प्रोड्सर है और पांच साल से उनके साथ विश्वभर में लाइव शो कर रहे है। फिल्म की कहानी में लव स्टोरी, सक्सेस काॅमडी व ड्रामा का भी बहुत ही बढ़िया तरीके से समन्वय किया है।

 पानी की समस्या पर आधारित है Turtle

टर्टल, पानी की समस्या पर आधारित है जो कि इन्हीं निर्देशक व निर्माता द्वारा बनाई गयी है। जल संकट तीसरे वल्र्ड वार का कारण बन सकता है।
निर्माता निर्देश ने फिल्म के दुःखद अंत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फिल्म का अंत हमें दर्शकों को खुश करके नहीं भेजना है। वो सिनेमा हाॅल से इस संदेश को साथ लेकर जाए ताकि वो शायद इस दर्द के कारण अपने रोज़ की जिंदगी में पानी बचाने के लिए मजबूर हो सके। हमने बहुत बड़ी रिस्क ली है कि फिल्म का अंत दुःख के साथ है पर वो बाद का सच है जो कि समाज में एक बदलाव लाने के लिए जरुरी है। इस फिल्म में गांवों में पानी के हालात को बहुत गर्मस्पर्शी से दर्शाया गया है और यह समस्या कब गांव, शहर, देश व विश्व तक पहुंच के विश्वयुद्ध का रुप ले लेगी हम सोच भी नहीं सकते।
पानी जो कि जीवन के लिए बहुत जरुरी है और हम शहरवासी पानी का नल व टोंटी खुली छोड़ देते है इस फिल्म के द्वारा समाज को बहुत ही अच्छा संदेश मिलता है कि हम नहीं बदलेंगे तभी विश्व नहीं बदलेगा। हमें इसकी शुरूआत घर की नल व टोंटी से करनी होगी।

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