आज ही के दिन जन्‍मे थे हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन

आज ही के दिन यानी 7 अगस्त 1925 को हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन का जन्म हुआ था।
परिचय
पहले तो उनका पूरा नाम जान लीजिए जो मंकोम्बो सम्बासीवन स्वामीनाथन है। उनका जन्म कुंबाकोनम (तमिलनाडु) में हुआ। 11 साल की उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया था। उनके देखभाल की जिम्मेदारी उनके चाचा एम. के. नारायणस्वामी ने संभाल ली। जब वह किशोर अवस्था में थे तो महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रभावित रहे और अहिंसा व स्वदेशी में भरोसा रखते थे।
​हरित क्रांति में योगदान
1960 के दशक में जब वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में वैज्ञानिक थे तो उनको पता चला कि डॉ. बोरलॉग ने गेहूं की नई प्रजाति मैक्सिकन ड्वार्फ विकसित की है। उन्होंने डॉ. बोरलॉग को भारत आमंत्रित किया और उनके कांधे से कांधा मिलाकर काम किया। उन्होंने गेहूं की कई उच्च उत्पादक नस्लें विकसित कीं। उन्होंने किसानों को बताया कि कैसे तकनीक, फर्टिलाइजर्स और उच्च उत्पादक किस्मों का इस्तेमाल करके पैदावार बढ़ाएंगे।
डॉ. स्वामीनाथन के प्रयास से भारत में गेहूं का उत्पादन चार ही फसल सीजनों में 1.2 करोड़ टन से 2.3 करोड़ टन हो गया। इससे खाद्यान्न आयात पर भारत की निर्भरती घटी।
खाद्यान्न की पैदावार में क्रांति
कृषि प्रणाली में बदलाव के बाद देश में फसल उत्पादन में बड़ी क्रांति आई। 1961-66 के दौरान खाद्यान्न का उत्पादन 8.1 करोड़ टन था जो 1997-2002 के बीच 20.3 करोड़ टन हो गया और 2003-04 में उत्पादन 21.2 करोड़ टन हो गया।
सबसे ज्यादा गेहूं के उत्पादन में बढ़ोत्तरी देखी गई जिसका उत्पादन पांचवीं पंचवर्षीय योजना के कार्यकाल में 1.11 करोड़ टन था। यह नौवीं पंचवर्षीय योजना के समय तक बढ़कर 7.13 करोड़ टन हो गया। 1950-51 में कुल खाद्यान्न में गेहूं का योगदान 13 फीसदी था जो 2003-04 में बढ़कर 34 फीसदी हो गया।
चावल का उत्पादन तीसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान 3.51 करोड़ टन था जो नौवीं पंचवर्षीय योजना के समय तक 8.37 करोड़ टन हो गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जहां भारत पहले खाद्यान्न के लिए विदेश से आयात के भरोसे रहता था, अब आत्मनिर्भर हो गया।
प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उछाल
मात्र 50 साल के अंदर गेहूं के प्रति हेक्टेयर में लगभग 4 गुना बढ़ोत्तरी हो गई।
औद्योगिक विकास एवं ग्रामीण रोजगार
हरित क्रांति से व्यापक पैमाने पर खेती का मशीनीकरण हुआ जिससे विभिन्न प्रकार की मशीनों जैसे ट्रैक्टर्स, हार्वेस्टर्स, थ्रेशर्स, कंबाइन्स, डीजल इंजन, इलेक्ट्रिक मोटर्स, पम्पिंग सेट्स आदि की मांग बढ़ गई। इसके अलावा केमिकल फर्टिलाइजर्स, कीटनाशक, खरपतवार नाशक आदि की भी मांग बंढ़ गई। इससे औद्योगिक उत्पादन में दिन दो गुनी रात चौगुनी तरक्की हुई। इससे औद्योगिक क्रांति आई और बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिला।
खेती करने के तरीके में बदलाव के बाद खेती मजदूरों की मांग बढ़ी। हरित क्रांति से पंजाब में लाखों नौकरियां पैदा हुईं। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और ओडिशा के कम से कम 15 लाख लोगों को यहां रोजगार मिला हुआ। उनलोगों को यह न सिर्फ रोजगार मिला बल्कि वे अपने साथ नए आइडियाज और टेक्नोलॉजी भी ले गए।
आईपीएस को ठुकराया
स्वामीनाथन ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली थी। उनको इंडियन पुलिस सर्विसेज (आईपीएस) ऑफर किया गया था लेकिन उन्होंने इसको ठुकरा दिया और नीदलैंड्स कृषि फील्ड में अध्ययन के लिए चले गए।
दरअसल, बंगाल में हुई भुखमरी से वह काफी द्रवित हुए और फैसला किया कि देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाएंगे।
-एजेंसियां

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