श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर प्रसिद्ध रंगारंग लठामार होली कल 06 मार्च को

मथुरा। श्रीकृष्ण-जन्मस्थान के पवित्र लीलामंच पर रंगभरनी एकादशी पर 6 मार्च को परंपरागत रंगारंग लठामार होली के कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की परंपरागत लठामार होली का कार्यक्रम इस वर्ष अनूठा एवं निराला होगा। कार्यक्रम को दिव्य और सफल बनाने के लिए सैकड़ों भक्त एवं सिद्ध कलाकार निरंतर लगे हैं और तैयारियां पूर्णता की ओर हैं।

इस संबंध में जानकारी देते हुऐ श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं संस्थान के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि महादेव को भी आकर्ष‍ित करने वाली ब्रज की परंपरागत होली उत्सव से जुड़ी विभिन्न विधाओं के दर्शन कृष्ण-जन्मभूमि पर रंगभरी एकादशी के दिन साकार होंगे।
ढोल, नगाड़े, ढप और बम्ब की ध्वनि पर ढाल, लाठी, बारहसिंगा आदि के साथ इस अलौकिक होली में सम्मिलित हुरियारे-हुरियारिनें एवं भक्तजन वास्तव में ब्रज के ग्वाल बाल एवं गोपी स्वरूप में वह अपने को महसूस करते हैं।
हुरियारे-हुरियारिनों के साथ-साथ इस महोत्सव में सम्मिलित सभी भक्तों के हृदय में एक मधुर भाव रहता है कि स्वयं प्रिया-प्रियतम भी किसी न किसी रूप में इस होली के अलौकिक महोत्सव में उपस्थित हैं। यही भाव है जो भक्तों को हजारों मील दूर से ब्रज की होली में सम्मिलित होने के लिए निरन्तर आकर्ष‍ित करता है। तेल पगी हुरियारिनों की लाठियां एवं उनको सखा भाव से स्वीकार करने के लिए ग्वाल-बाल निरन्तर भावमय अभ्यास करते रहते हैं।

देश-विदेश से पधारने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीराधारानी की जन्मस्थली ग्राम रावल से पधारने वाले गोपी एवं ग्वालों के श्रद्धाभाव और रंगों से सराबोर इस लठामार होली के दर्शन से कृत कृत्य – अभिभूत हो उठते हैं।

वास्तव में होली के रचैया की जन्मभूमि में श्रीराधा जी की जन्मस्थली से पधारने वाले गोपी एवं ग्वाल श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केन्द्र रहते हैं और श्रद्धालु गोपी और ग्वालों के आशीर्वाद को पाकर उनकी लाठियों के स्पर्श में प्रिया-प्रियतम की कृपा अनुभूति कर ‘कृष्ण-कन्हैयालाल’ एवं ‘श्रीराधाकृष्ण’ की जय जयकार कर उठते हैं।

इस वर्ष आयोजित लठामार होली कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रज के विभिन्न भागों में खेली जाने वाली होली की विश‍िष्ट और अनूठी कलाओं एवं विधाओं का मंचन प्रमुखता से किया जायेगा। बम्ब और ढप पर होली गायन से इस उत्सव का शुभारम्भ दोपहर 2: 00 बजे से होगा, तदोपरान्त ब्रज की होली के परंपरागत रसिया, लोकगीत, हॅंसी-ठिठोली एवं इन पर होली के नृत्य, मयूर नृत्य, चरकुला नृत्य श्रद्धा के जीवन्त स्वरूप ब्रज की होली, पुष्प होली आदि कार्यक्रम के दर्शन तो श्रद्धालु करेंगे ही, साथ ही हरियाणा एवं जैसलमेर राजस्थान के कलाकार भी अपनी सहभागिता करेंगे।

जन्मस्थान के पवित्र प्रांगण में पहली बार खेली जायेगी सुगन्धित द्रव्योंकी होली

पुष्प होली के उपरान्त सुगन्धित द्रव्य होली प्रथम बार जन्मस्थान के पवित्र प्रांगण में खेली जायेगी। इस अवसर पर केसर मिश्रित गुलाब जल, केवड़ा जल का छिड़काव सर्वप्रथम भगवान श्रीकेशवदेव जी को अर्पित करने के बाद उपस्थित भक्तों पर प्रसादी रूप में किया जायेगा। उच्च गुणवत्ता के गुलाल वृष्ट‍ि के मध्य लठामार होली के दिव्य आयोजन के दर्शन जन्मभूमि के पवित्र प्रांगण में भक्तजन करेंगे।

लठामार होली के मध्य जन्मभूमि के सिद्ध लीलामंच से निरन्तर होली के लोकगीत और रसिया आदि का गायन होता रहेगा। जो इस उत्सव के सौन्दर्य एवं भाव में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा।

जयश्रीकृष्ण लठामार होली समिति के पदाधिकारीगण इस विश्वप्रसिद्ध लठामार होली कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील और परिश्रमरत हैं। लठामार होली समिति के अध्यक्ष किशोर भरतिया, मंत्री नन्दकिशोर अग्रवाल, अनिलभाई, विजय बंसल, सुरेशचंद स्वीटी सुपाड़ी वाले, महेशचंद प्रेसवाले आदि का उल्लेखनीय सहयोग है।

संस्थान ने कोरोना वायरस के दृष्ट‍िगत सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध क‍िया है कि यदि किसी को ज्वर, खांसी या इसप्रकार की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो वह लठामार होली कार्यक्रम एवं भीड़-भाड़ से बचें।

उल्लेखनीय है इस अवसर पर संपूर्ण विश्व को भयभीत करने वाली महामारी से रोगमुक्त-भयमुक्त की प्रार्थना भगवान श्री केशवदेव जी के श्रीचरणों में की जायेगी।

इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि कोई भी इलैक्ट्रॉनिक सामान, मोबाइल फोन, मादक द्रव्य आदि सामान घर में जमा करके आयें अथवा अपने घर पर ही छोड़कर आयें क्योंकि इनके साथ परिसर में प्रवेश नहीं हो पायेगा।

इस अवसर पर संस्थान के संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव, गिर्राज शरण गौतम, विजयबहादुर सिंह एवं अनुराग पाठक की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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