अकेलेपन और ख़ुद के साथ अकेले वक़्त बिताने में फ़र्क़ है

क्या आपने सोचा कि आपके सबसे अच्छे विचार बाथरूम में ही क्यों आते हैं?
अकेले रहकर ख़ुद से गुफ़्तगू करना, अपनी कमियों और अपनी ताक़त का विश्लेषण करना, क्रिएटिविटी के लिए बहुत ज़रूरी माना जाता है. लेकिन दुनिया में अकेले रहने को लेकर ज़्यादातर अवधारणा यही है कि इससे लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं.
आज के दौर में अकेलेपन को महामारी कहा जाता है. सामाजिक तौर पर अलग-थलग पड़ने का असर हमारी सेहत पर होता है, ये बात बहुत से विशेषज्ञ कहते हैं.
जैसे कि दिल की बीमारी, दिल का दौरा और समय से पहले मौत हो जाना. लेकिन आप को ये समझना होगा कि अकेलेपन और ख़ुद के साथ अकेले वक़्त बिताने में फ़र्क़ है.
क्या-क्या हैं लाभ
इसके कई फ़ायदे हैं. आप की ख़ुद से अच्छी दोस्ती हो जाती है. आपका ध्यान चीज़ों पर बेहतर होता है.
इसमें कोई दो राय नहीं कि अलग-थलग महसूस करना आप की सेहत के लिए नुक़सानदेह होता है. ब्रिटेन की सरकार ने तो अकेलेपन को नई सदी में सेहत की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना है.
अगर आप लंबे वक़्त तक अकेलेपन के शिकार होते हैं, तो इससे आप दुखी हो जाते हैं. धीरे-धीरे ये बीमारी आप के दिल और ज़हन में घर कर जाती है.
कम वक़्त के लिए भी अलग और अकेले रहना सेहत पर बुरा असर डालता है. जैसे कि क़ैदियों को एकदम अलग रखा जाता है तो उनकी सेहत बिगड़ती है.
कुल मिलाकर, अकेलापन ऐसा अहसास है, जो आप को कहीं भी अकेला महसूस कराता है. आप किसी महफ़िल में भी ख़ुद को तन्हा पाते हैं. लोगों से घिरे होकर भी अपने ख़यालों में खोए रहते हैं. किसी से जुड़ाव नहीं महसूस करते.
अकेलेपन और लोगों का संबंध नहीं
अकेलेपन का ताल्लुक़ इस बात से बिल्कुल नहीं है कि आप के आस-पास कितने लोग हैं. ये एक ज़हनी अहसास है, जो अंदर से महसूस होता है.
जब आपको लगता है कि लोग आपको समझ नहीं पा रहे हैं, आपके नज़रिए से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं. तो ऐसे हालात भी आप को अकेला महसूस कराते हैं.
कुछ लोग बहुत भीड़-भाड़ पसंद नहीं करते. ऐसे अंतर्मुखी लोगों के गिने-चुने दोस्त होते हैं. उन्हें देखकर लगेगा कि वो अकेलेपन के शिकार हैं.
तमाम रिसर्च से ये बात पुख़्ता तौर पर मालूम हुई है कि अंतर्मुखी लोगों के दोस्त ज़्यादा मज़बूती से जुड़े होते हैं. गुणात्मक रूप से भी वो बेहतर लोगों से ही जुड़े होते हैं.
जो लोग अंतर्मुखी नहीं भी हैं, उनके लिए भी कुछ वक़्त के लिए अकेले रहना फ़ायदेमंद हो सकता है. इससे रिलैक्स करने में उन्हें मदद मिलती है.
अलग-थलग रहने से बढ़ता है फ़ोकस
दुनियाभर में दस हज़ार लोगों पर किए गए सर्वे के मुताबिक़, लोगों के रिलैक्स करने के पांच टॉप नुस्खे अकेले रहकर काम करने वाले थे. जैसे कि पढ़ना. तीसरा सबसे लोकप्रिय फॉर्मूला था अकेले समय बिताना जबकि दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने का नंबर 12वां था.
अलग-थलग रहने से आपके दिमाग़ का फ़ोकस बढ़ता है. ये क्रिएटिविटी को जन्म देता है. जब हमारा ज़हन स्थिर होता है, तो वो क़ुदरती तौर पर काम करता है. वो यादों को सहेजता है. पुराने कचरे को साफ़ करता है और नए आइडियाज़ को जन्म देता है.
यही वजह है कि अक्सर हमारे बेहतरीन विचार बाथरूम में या अकेले टहलते हुए जन्म लेते है. अकेलेपन से हमें एक फ़ायदा और भी होता है. वो ये कि हम नए लोगों से जुड़ने और अपना दायरा बढ़ाने की ज़रूरत महसूस करते हैं.
तो अगर आप लगातार अकेलापन महसूस करते हैं. डिप्रेशन के शिकार होते हैं या आप को सेहत से जुड़ी दूसरी परेशानियां होती हैं, तो आप को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. लेकिन अगर आप अकेले कुछ वक़्त अपने साथ बिताना चाहते हैं. कुछ पढ़ना या फिर कुछ अलग करना चाहते हैं, तो इस अकेलेपन को एन्जॉय कीजिए.
आख़िर किसी ने सच ही तो कहा है…
अकेले हैं तो क्या ग़म है
चाहें तो हमारे बस में क्या नहीं…
-BBC

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