ICJ का फैसला: हर दूसरे पैराग्राफ़ में लिखे पाकिस्तान के लिए बेइज़्ज़ती भरे शब्द

पाकिस्तान सूरज को चांद और चांद को सूरज बना देता है. अगर कोई इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) का फ़ैसला ध्यान से सुने, तो ये पाकिस्तान के लिए बहुत ही शर्मिंदगी की बात होनी चाहिए.
ICJ के इतिहास में शायद ही किसी देश के बारे में इतना खुला और इतना साफ़ फ़ैसला दिया गया हो. हर दूसरे पैराग्राफ़ में उन्होंने पाकिस्तान को ग़लत क़रार दिया है, पाकिस्तान के लिए लगभग बेइज़्ज़ती भरे शब्द इस्तेमाल किए हैं.
अगर उससे वो इतने संतुष्ट हैं तो इसके बारे में क्या कहा जा सकता है.
लेकिन इससे हटकर एक और चीज़ है कि ये फ़ैसला ना सिर्फ़ पाकिस्तान और भारत से जुड़ा है, बल्कि ये फ़ैसला पूरी दुनिया के देशों के लिए और मानवाधिकारों के लिए है.
मान लीजिए कि कल को अमरीका का कोई नागरिक चीन में जाता है और चीन उसको इस तरह गिरफ्तार कर लेता है तो ICJ के इसी फ़ैसले का हवाला दिया जाएगा और चीन को भी ये सब बातें माननी पड़ेगीं.
या चीन का कोई नागरिक किसी और देश में जाता है और उसके साथ ये सलूक होता है, तो चीन भी ICJ के इसी फ़ैसले का हवाला देगा.
इसलिए चीनी जज बहुमत के साथ गए. और अगर पाकिस्तान इतना ही संतुष्ट है तो अपने जज से पूछिए कि वो बहुमत के साथ क्यों गए. उन्होंने कहा कि मैं भी सहमत हूं कि ICJ ने ठीक कहा है कि इस मामले में वियना कन्वेंशन सुप्रीम है.
कुलभूषण भारत-पाक में क्यों बड़ा मुद्दा?
कुलभूषण जाधव अकेले नहीं हैं, ऐसे कई मामले थे.
भारत के एक युवा हामिद अंसारी को उन्होंने बिना किसी बात के छह साल कड़ी क़ैद में रखा. बाद में बहुत एहसान जताकर उसे छोड़ा गया.
उससे पहले सरबजीत सिंह और चमेल सिंह, जिनको उनके कोर्ट ने बरी कर दिया था, उन्हें पाकिस्तानी स्टेट ने क़ैद में ही मार डाला.
तो ऐसी कई चीज़ें चलती आ रही थीं, जिसमें भारतीय नागरिकों के साथ ये हुआ.
दिल्ली स्थित हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह के प्रमुख मौलवी पाकिस्तान गए थे, उन्हें आईएसआई अग़वा करके कहीं ले गया. तीन चार दिन उनके साथ काफ़ी मार-पीट की.
तो भारतीय नागरिक पाकिस्तान में असुरक्षित हैं और ये लगातार होती घटनाएं उबलकर कुलभूषण जाधव के मामले में आईं. क्योंकि सभी कहते हैं कि किसी चरमपंथी गुट ने ईरान से इनका अपहरण करके आईएसआई को बेचा था.
इसलिए ये भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का सवाल है, जो बेचारे किसी ग़लती से या किसी कारण से पाकिस्तान में पहुंचे जाते हैं. भारत में इस वजह से ये मुद्दा इतना बड़ा बन गया.
जहां तक पाकिस्तान का सवाल है, उसने प्रोपेगेंडा का एक हथकंडा बना लिया था.
उन्होंने कहा था कि देखिए ये कुलभूषण जाधव हैं. ये चरमपंथी हैं. इसने पता नहीं कहां-कहां बम फेंके और भारत हमपर आरोप लगाता है, हम सामने ये सबूत लाए हैं.
लेकिन पाकिस्तान दुनिया को बेवक़ूफ़ नहीं बना सकता, क्योंकि भारत ने पिछले चालीस साल से चरमपंथ का सामना किया है. चाहे वो मुंबई में हो, कश्मीर हो या पंजाब हो या दिल्ली हो.
पाकिस्तान ने कोई भी ऐसा सबूत कुलभूषण जाधव के मामले में नहीं दिखाया, जिसमें उन्होंने उनकी एक चींटी को भी मारा हो.
पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर असर
ICJ जैसी महान क़ानूनी संस्था पाकिस्तान को जितना भला-बुरा कह सकती थी, वो कह दिया है.
ICJ का इतिहास उठाकर देख लें कि उन्होंने इससे पहले किसी देश की इतने कड़े शब्दों में निंदा की हो.
इससे अंतर्राष्ट्रीय राय पर तो असर पड़ेगा ही. ब्रिटेन के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि दुनिया के 70 प्रतिशत चरमपंथी घटनाओं के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए मिलेंगे. तो हर देश पाकिस्तान से पीड़ित है.
पहले की शिकायत को अब एक क़ानूनी ढांचा भी मिल गया है कि पाकिस्तान हर तरह से ठीक रास्ते पर चलने से इंकार कर रहा है.
फ़ैसले की अहम बातें
पहली बात तो वियना कन्वेंशन के मुताबिक़ काउंसलर एक्सेस देने की बात कही गई है. यानी इस्लामाबाद स्थित इंडियन हाई कमिशन के एक अधिकारी को अकेले में कुलभूषण से मिलने का हक़ है. उस वक़्त वहां आईएसआई और पाकिस्तान आर्मी के लोग मौजूद नहीं रह सकते.
उन्हें ये मुलाक़ात जल्द से जल्द करने का हक़ है ताकि वो जाकर पूछें कि क्या उन्हें किसी तरह की यातना दी गई है, कहां पकड़ा गया है, क्यों पकड़ा गया है और क्या पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा में कुछ सच भी है या सारा झूठ है.
दूसरा ICJ ने कहा है कि ट्रायल नए तरीक़े से होना चाहिए. मतलब फिर से पुराने ट्रायल पर विचार और इसकी समीक्षा होनी चाहिए.
इसका मतलब ये है कि अब सिविलि कोर्ट में जाकर ट्रायल होना चाहिए. जहां उनको सही तरीक़े से क़ानूनी मदद मिल सके. मतलब उनके वकील वग़ैहरा क़ाबिल हों और जो उनका केस जज के सामने रख सकें.
क्या इससे कुलभूषण के भारत लौटने की उम्मीद जगी है?
कोई और देश होता तो पहली फ्लाइट से कुलभूषण जाधव को वापस भेज देता लेकिन जिस तरह से कुलभूषण की मां और पत्नी से सलूक किया गया. स्टेट लेवल पर औरतों के साथ इतना दुर्व्यवहार करना, मैंने अपने 45 साल के राजनयिक करियर में ये कभी नहीं देखा है.
इसलिए पाकिस्तान से उम्मीद करना कि वो कोई ठीक क़दम उठाएंगे, सवाल उठता है कि क्या ये हो पाएगा? ये आने वाला समय बताएगा.
-राजीव डोगरा (पूर्व राजनयिक)

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