दलाई लामा ने किया प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने आह्वान

आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए भारतीयों का आह्वान किया है।
बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को पुणे के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा की निंदा करते हुए कहा है कि लोगों को धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण नहीं करना चाहिए।
पुणे में मीडिया से बात करते हुए दलाई लामा ने कहा, ‘धर्म व्यक्तिगत मसला होता है। हम हिंदू हैं या हम मुस्लिम हैं, इस तरह से हमें ध्रुवीकरण नहीं करना चाहिए। यह सही नहीं है। गुस्से का क्या मोल? गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। अधिक करुणामय मन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
पुणे के नजदीक एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरा होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दो समूहों के बीच संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई थी।
उन्होंने कहा, ‘भारत में अपार क्षमता है। आधुनिकता और प्राचीन भारतीय ज्ञान का मिश्रण, यही वो चीज है जिसकी दुनिया को वास्तव में जरूरत है। मेरी सारी व्याख्या भारत से ली गई हैं। भारतीयों को इस ज्ञान पर अधिक ध्यान देना चाहिए और जोर देकर इन चीजों को पुनर्जीवित करना चाहिए।’
इससे पहले भी दलाई लामा कह चुके हैं कि भारत प्राचीन ज्ञान की ‘अनदेखी’ कर रहा है और पश्चिमी सभ्यता का रुख कर रहा है।
यूपी में एक जनसभा में उन्होंने कहा था, ‘आधुनिक भारतीय प्राचीन विचारों की अनदेखी कर रहे हैं। आधुनिक भारत पाश्चात्य संस्कृति में रचता-बसता जा रहा है। आपको प्राचीन भारत के ज्ञान पर और ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आधुनिक भारतीय को अपने ज्ञान को नहीं भूलना चाहिए।’
-एजेंसी