देश के पहले लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष ने शपथ ली, राष्ट्रपति ने दिलाई शपथ

नई दिल्‍ली। देश के पहले लोकपाल के तौर पर जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष ने शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रह चुके जस्टिस घोष को मानवाधिकार मामलों के जानकार के तौर पर माना जाता है। मोदी सरकार ने आम चुनावों से ठीक पहले लोकपाल की नियुक्ति की है।
आम चुनावों से ठीक पहले लोकपाल की नियुक्ति को लेकर काफी राजनीतिक विवाद भी हुआ।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और चीफ जस्टिस रंजन गोगोई भी मौजूद थे। जस्टिस घोष इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं। जस्टिस घोष वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी थे और मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर उन्हें माना जाता है।
विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले, जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती, जस्टिस अभिलाषा कुमारी के अलावा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल में न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। सशस्त्र सीमा बल की पूर्व पहली महिला प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, पूर्व आईआरएस अधिकारी महेंद्र सिंह और गुजरात काडर के पूर्व आईएएस अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य हैं।
जस्टिस घोष (66) मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए थे। जब लोकपाल अध्यक्ष के पद के लिए उनके नाम की घोषणा हुई तो वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य थे। कुछ श्रेणियों के लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को देखने के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति करने वाला लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 में पारित हुआ था।
लोकपाल अध्यक्ष का वेतन और भत्ते चीफ जस्टिस के समान
नियमों के अनुसार लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्यों का प्रावधान है। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिए। नियमों के अनुसार लोकपाल के सदस्यों में 50 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिए। चयन होने के बाद अध्यक्ष और सदस्य पांच साल के कार्यकाल या 70 साल की उम्र तक पद पर बने रह सकते हैं। लोकपाल अध्यक्ष का वेतन और भत्ते भारत के प्रधान न्यायाधीश के बराबर होंगे। सदस्यों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर वेतन और भत्ते मिलेंगे।
चयन समिति की बैठक में नहीं गए थे खड़गे
बता दें कि लोकपाल नियुक्ति की सिलेक्ट कमेटी में प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस या उनके द्वारा नामित जज, नेता विपक्ष, लोकसभा अध्यक्ष और एक जूरिस्ट होता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में नेता विपक्ष नहीं होने की स्थिति में विपक्षी दल के नेता को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल करने की बात सरकार ने कही थी। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकपाल कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने से इंकार करते हुए सरकार पर मनमानी का आरोप लगाया था।
-एजेंसियां

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