रक्षा प्रति‍ष्‍ठानों के बीच civil enclave की मौजूदगी बड़ी चुनौती

आगरा। आगरा सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा ने रक्षा प्रति‍ष्‍ठानों, खास कर वायुसेना परि‍सरों की सुरक्षा को और पुख्‍ता बनाये रखने के लि‍ये उन सभी एयर फोर्स परि‍सरों की सुरक्षा के लि‍ये राष्‍ट्रीय स्‍तार पर नीति बनाये जाने की मांग भारत सरकार से की जि‍नके बीच civil enclave स्‍थि‍त है और नागरि‍क उड्डयन के लि‍ये उनका संचालन होता है।
सिविल सोसायटी ऑफ़ आगरा ने आगरा के खेरि‍या एयर फोर्स स्‍टेशन के मध्‍य में civil enclave तक चुनाव के दौरान अवांछि‍तों की भी पहुंच संभव हो जाने की संभावनाओं को लेकर नि‍र्वाचन आयोग भारत से भी चि‍ता जतायी थी ,जि‍से आयोग ने गंभीरता से लेकर आगरा प्रशासन से जबाब तलब कि‍या हुआ है।
सोसायटी के जर्नल सैकेट्री अनि‍ल शर्मा ने कहा है कि उन्‍हे नहीं मालूम कि‍ प्रशासन ने राजनीति‍ज्ञों के वायुमार्ग से आवागमन के दौरान परि‍सर में प्रवेश अनुमति पास जारी करने को लेकर निर्वाचन आयोग को अपनी नीति‍ की जानकारी दी या नहीं कि‍न्‍तु राजनैति‍क दलों की स्‍थानीय इकाईयां तथा सामाजि‍क संगठन अब तक इससे अनि‍भि‍ज्ञ ही हैं। उन्‍होंने कहा है कि यह समस्‍या आगरा की ही नहीं अपि‍तु देश के कई अन्‍य हवाई अड्डोंं की भी है।
राजनेताओं के आवागमन के अवसर पर तमाम जर्नलि‍स्‍ट, कैमारामैैन, टेलीवि‍जन न्‍यूज क्रू आदि को भी वायुसेना परि‍सर में अपने ‘हाई रैज्‍यूलेशन’ वाले ‘गैजि‍ट्स’ के साथ प्रवेश का अवसर मि‍लता है। इनमें से कई की पहचान व आचरण संदि‍ग्‍ध होता है। उपरोक्‍त में से तमाम तो राजनेताओं के साथ ही सीधे फ्लाइट से परि‍सरों में लैंंड करते हैं।
civil enclave का राजनैति‍क नेताओं के द्वारा उपयोग की नीति का नि‍र्धारण इस लि‍ये भी जरूरी है जि‍ससे कि वायुसेना परि‍सरों की सुरक्षा को लेकर जहां आंतरि‍क सुरक्षा खासकर आतंकवादी आत्‍मघाती हमलों की चुनौति‍यों को कम कि‍या जा सके वहीं राजनैति‍क दलों को, उनके नेताओं की फ्लाइट के आवागमन पर अनुमति न मि‍ल पाने की स्‍थि‍ति में अधि‍कार संपन्‍नों का आचरण पक्षपात पूर्ण न लगे।
सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा ने कहा है कि असमंजस की स्‍थि‍ति‍यां समाप्‍त करने को रक्षा और गृह वि‍भाग के सचि‍वों अथवा अन्‍य अधि‍कार संपन्‍न अधि‍कारि‍यों की बैठक कर के राष्‍ट्रीय परि‍प्रेक्ष्‍य में एक ऐसी नीति बनाया जाना अब सामयि‍क जरूरत है। इसके बन जाने के बाद ही वायुसेना परि‍सरों के बीच स्‍थि‍त सि‍वि‍ल एन्‍कलेवों के संचालन की मौजूदा आतंकवादी गतिवि‍धि‍यों के दौर के अनुरूरप मानक व्‍यवस्‍था तय हो सकना संभव होगा।

श्री शर्मा ने कहा कि‍ सोसायटी की चि‍ंंता इसलि‍ये और भी गंभीर है क्‍योंकि‍ लोकसभा चुनाव 2019 तथा पूर्व में हुए उ प्र वि‍धानसभा चुनाव 2017  के दौरान आगरा में राजनीति‍ज्ञों के वायुयानों तथा हैलीकाप्‍टरोंं का आना लगातार बना रहा , इन उड़ानों के माध्‍यम से जब भी देश के प्रमुख नेता आगरा आये या गये तो उनके स्‍वागत और वि‍दाई  के लि‍ये बडी संख्‍या में लोकल अथार्टियों ने पास जारी कि‍ये ।
अगर जारी पासों की बि‍ना छेडछाड के मूल सूचि‍यों की प्रति‍यों की उपलब्‍धता संभव हो सके तो तमाम अवांछि‍तों को भी राजनीति‍ज्ञों के आवागमन के दौरान पार्टीयों के पदाधि‍कारि‍यों नेताओं , स्‍वागतकर्ताओं के नाम पर पास  जारी कि‍ये गये गये।

सोसायटी का मानना है कि‍ राजनीति‍ज्ञों के साथ वायुमार्ग से कि‍स कि‍स की पहुंच इन रक्षा परि‍सरों में संभव हुई यह एक अलग चि‍ंंता का वि‍षय है। खास तौर से तब जबकि‍ यहां पहुंचने वाली फ्लाइटों में से बडी संख्‍या उनकी होती है जो कि असुरक्षि‍त हवाई पट्टि‍यों या उन छोटे एयरपोर्टों से होकर आती है जहां कि‍ चैकइन और चैक आऊट की उचि‍त व्‍यवस्‍था नहीं होती है। वायुसेना का एयरफोर्स स्‍टेशन खेरि‍या एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण और वायुसेना के देश के कि‍सी भी भाग में होने वाले आप्रेशन में सक्रि‍य भूमि‍का रखने वाला एयरफोर्स बेस माना जाता है।

ऐसे महत्‍वपूर्ण परि‍सर के बीच में नागरि‍कों की जरूरत के नाम पर सि‍वि‍ल एन्‍कलेव का अनावश्‍यक रूप से बनाये रखना रक्षा प्ररि‍सर की सुरक्षा को चुनौती बढाये रखने के अलावा और क्‍या समझा जा सकता है। खास तौर से तब जबकि‍ वायुसेना प्रशासन भी इसके पक्ष में नहीं है। यही नहीं सि‍वि‍ल एन्‍कलेव को स्‍थानापि‍त करने के लि‍ये उ प्र सरकार के द्वारा जमीन अधि‍ग्रहि‍त कर उस पर वाऊंड्री भी बनवायी हुई है।

लोक तंत्र के महत्‍वपूर्ण आधार राजनैति‍क दलों की स्‍वतंत्रता, स्‍वायत्‍ता व व्‍यापक संपर्क की जरूरत को समझने के साथ ही यह भी जरूरी है कि‍ देश की सुरक्षा भी अहम है। जो कि‍ तभी संभव है जबकि‍ हमारी सेनाओं के छावनी, एयरफोर्स स्‍टेशन और नेवल बेस आदि‍ जैसे स्‍थायी परि‍सर भी सीमाओं के साथ सुरक्षि‍त रहें। उनकी सुरक्षा एवं राजनैति‍क तथा अन्‍य असैनि‍क उपयोग के लि‍ये दीर्घकालीन स्‍थायी नीति‍ बनायी जाये जो कि‍ सेना की वास्‍तवि‍क जरूरतों के अनुकूल और उसकी सहभागि‍ता के साथ बनायी जायें।

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