सदन में हंगामे पर भावुक हुए सभापति बोले, सारी पवित्रता नष्ट हो गई

नई दिल्‍ली। राज्य सभा के सभापति एम वेंकैया नायडू सदन में विपक्षी सांसदों के हंगामे की बात करते हुए भावुक हो गए और उनका गला रुँध गया.
उन्होंने कहा कि मंगलवार को सदन के कुछ सदस्य टेबल पर बैठ गए और कुछ टेबल पर चढ़ गए जिसके बाद सदन की सारी पवित्रता नष्ट हो गई.
राज्यसभा की कार्यवाही इसके बाद 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
वहीं लोकसभा में बुधवार को एक बार फिर विपक्ष के ज़बरदस्त हंगामे के बीच सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.
मॉनसून सत्र का आख़िरी हफ़्ता है और विपक्ष एकजुट होकर चर्चा की माँग कर रही हैं.
संसद का मॉनसून सत्र 19 जुलाई को शुरू हुआ था मगर इस सत्र में पहले ही दिन से पेगासस जासूसी समेत कई अन्य मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा होता रहा है.
पहले दिन ही दोनों सदनों में हंगामा खड़ा हो गया जब विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी को नए मंत्रियों को सदन में परिचय करने से रोक दिया.
वेंकैया नायडू ने पहले भी सांसदों के व्यवहार पर जताई थी चिंता
राज्य सभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने 30 जुलाई को भी सदन में पेगासस मामले पर विरोध जता रहे कुछ सांसदों के व्यवहार पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि इससे सदन की मर्यादा और प्रतिष्ठा गिरी है.
उन्होंने सदन में कहा, “मुझे बताया गया कि कुछ सदस्य सदन में सीटी बजा रहे हैं. वो (शायद) सीटी बजा रहे हैं अपनी पुरानी आदत (की वजह) से. मगर ये सदन है.”
“वहीं कुछ सदस्य मार्शलों के कंधों पर हाथ लगा रहे हैं. मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों किया. और कुछ ने मंत्रियों के सामने तख़्तियाँ लहराईं और उनको देखने नहीं दे रहे थे.”
वेंकैया नायडू ने चेतावनी देने के लहज़े में कहा, “धैर्य की भी एक सीमा होती है और हमें सदन के धैर्य को समाप्त नहीं होने देना चाहिए.”
उन्होंने कहा,”इससे निबटने का दो ही रास्ता है- या तो इसे नज़रअंदाज़ किया जाए और सदन को बाज़ार बनने दे दिया जाये. हरेक अपनी सीटी बजाते रहे…और दूसरा – कार्यवाही की जाए.”
वेंकैया ने सदस्यों से शालीनता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “इन सभी चीज़ों से सदन का मान और नीचे गिरा है. मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूँ.”
ये कहते हुए कि उन्हें अफ़सोस है कि उन्हें आसन से ये कहना पड़ रहा है उन्होंने कहा,” मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे सदस्य इस स्तर तक चले जाएँगे.”
-एजेंसियां

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