‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के मामले को लेकर विधि आयोग से मिला भाजपा का दल

नई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का एक दल आज ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ मामले पर विधि आयोग पहुंचा। इस दल में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा नेता विनय सहस्त्रबुद्धे, भूपेंद्र यादव और अनिल बलूनी आदि विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश बी एस चौहान से मिले। मुलाकात के बाद भाजपा नेता भूपिंदर यादव ने कहा कि हमने एक देश एक चुनाव मामले पर पार्टी का मत विधि आयोग के सामने रख दिया है। हमने आयोग को बताया कि किस तरह से चुनाव मशीनरी के बार-बार उपयोग करने से राहत मिलेगी और खर्च में भी कमी आएगी। इसके लिए हमें संविधान में आवश्यक संशोधन करने की जरूरत है।
भूपिंदर ने बताया कि चुनाव के दौरान हमारे देश में करीब नौ लाख 30 हजार मतदान केंद्र और करीब एक करोड़ लोगों को सुरक्षित मतदान के लिए लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि अगर चुनाव के दौरान किए जाने वाले खर्चों की बात की जाए तो 2011 में जहां चुनाव में 16-1700 करोड़ का खर्च आया था वहीं 2014 के चुनाव में यह खर्च बढ़ कर 4000 करोड़ हो गया था। अगर हम देश में एकसाथ चुनाव होते हैं तो इन खर्चों में भारी कमी आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वन नेशन वन इलेक्शन दुनिया के कई देशों में सफलता पूर्वक कराया जा रहा है।
भाजपा लगातार एक राष्ट्र एक चुनाव की बात करती आ रही है। पिछले दिनों विधि आयोग के विचार विमर्श में भाजपा के नेता शामिल नहीं हुए थे जिसकी वजह पर पार्टी ने कहा था कि वह आयोग के सामने पूरी तैयारी से जाएगी और बताएगी कि एक साथ चुनाव किस तरह कराए जा सकते हैं। विधि आयोग पिछले दिनों में विभिन्न दलों के साथ लोकसभा व विधनासभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर उनकी राय जानी थी, जिसमें 13 दलों ने अपने विचार रखे थे।
तब भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व सांसद अनिल बलूनी ने कहा था कि एक राष्ट्र एक चुनाव की पहल भाजपा की ही है। ऐसे में उसके पीछे हटने या चुप्पी साधने का सवाल ही नहीं उठता है। चूंकि भाजपा इस बारे में पहले ही अपनी राय रख चुकी है इसलिए अब उसे केवल राय नहीं रखनी है बल्कि पूरी तैयारी के साथ आगे की राय रखेगी। चुनाव कैसे एक साथ कराए जा सकते हैं? किस तरह की प्रक्रिया होगी? कब हो सकते हैं? आदि कई तरह के संभावित समाधानों के साथ पार्टी अपनी बात ठोस रूप में रखेगी। गौरतलब है कि भाजपा व कांग्रेस समेत कई दलों ने अभी अपना पक्ष नहीं रखा है।
देश में लोकसभा व विधानसभा चुनावों को एक साथ कराए जाने को लेकर विधि आयोग ने पिछले दिनों के सत्र में देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श भी किया था। इसमें 13 दल पहुंचे थे और अपनी बात रखी थी। एक साथ चुनाव कराए जाने के पक्ष में शिरोमणि अकाली दल, अन्नाद्रमुक, समाजवादी पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने अपना पक्ष रखा। इन दलों ने कब चुनाव कराए जाएं इस पर अलग अलग राय रखी, लेकिन उन्होंने एक साथ ही चुनाव कराने का समर्थन किया। दूसरी तरफ नौ दलों ने एक साथ चुनाव कराए जाने का विरोध किया है। इनमें तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, द्रमुक, तेलुगुदेशम, माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लाक व जेडीएस शामिल थे।
-एजेंसियां

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