तालिबान ने काबुल की दीवारों पर लिखवाया अमेरिका के साथ हुआ समझौता

क़तर की राजधानी दोहा में हुए समझौते के बावत आम जनता को जानकारी देने के लिए तालिबान ने समझौते के मसौदे को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल की दीवारों पर पेंट कर दिया है.
तालिबान ने जनता से अपील की है कि वो इस मामले में किए जा रहे नकारात्मक प्रोपेगैंडा पर भरोसा ना करें.
29 फ़रवरी 2020 को अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा में समझौता हुआ था जिसके अनुसार अमेरिकी सेना को अफ़ग़ानिस्तान से एक साल के अंदर हटना था और इस दौरान तालिबान ने उन पर हमला नहीं करने का वादा किया था.
यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में हुआ था और जब जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने घोषणा कर दी थी कि 31 अगस्त तक सभी अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से लौट जाएंगे.
दोहा समझौते के तहत सत्ता के हस्तांतरण को लेकर अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न गुटों के बीच बातचीत की शुरुआत हुई थी लेकिन 10 महीनों तक चली बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था और बातचीत बंद कर दी गई थी.
जुलाई में दोनों पक्षों के बीच दोबारा बातचीत शुरू हुई लेकिन फिर भी कोई समझौता नहीं हो सका और आख़िरकार 15 अगस्त को तालिबान ने राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा कर लिया. तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अचानक देश छोड़कर भाग गए और दुबई में शरण ले ली. अफ़ग़ान सेना ने बग़ैर लड़े काबुल को तालिबान के हवाले कर दिया.
सत्ता में आने के बाद तालिबान ने अब तक आधिकारिक रूप से सरकार गठन नहीं किया है लेकिन उनके नेता बार-बार कहते हैं कि वो दोहा समझौते की सभी शर्तों का पालन करेंगे.
तालिबान का कहना है कि दोहा समझौते के अनुसार अफ़ग़निस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी मुल्क के ख़िलाफ़ नहीं होने दिया जाएगा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनकी धार्मिक आज़ादी सुनिश्चित की जाएगी और महिलाओं को शरिया (इस्लामी क़ानून) के दायरे में सारे अधिकार दिए जाएंगे.
लेकिन ज़मीन से जो ख़बरें आ रही हैं कि उनके अनुसार कई महिलाएं देश छोड़कर चली गईं हैं और जो रह रही हैं वो भी बहुत डरी हुईं हैं. उसी तरह सैकड़ों हिंदू और सिख नागरिकों ने भी अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दिया है. कई लोग भारत आए हैं और कई लोग दूसरे देश चले गए हैं.
-एजेंसियां

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