थाईलैंड के राजा Maha Vajiralongkorne ‘राम दशम’ का राज्याभिषेक संपन्‍न

बैंकाक| थाईलैंड के राजा Maha Vajiralongkorne बोडिन्द्रदेबयवरंगकुन का सिंहासन पर आसीन होने के दो साल बाद आखिरकार शनिवार को राज्याभिषेक हो गया। तीन दिवसीय समारोह में 3.1 करोड़ डॉलर खर्च हुए हैं और यह पिछले राज्याभिषेक के 69 साल बाद हुआ है।

Maha Vajiralongkorne
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सीएनएन के मुताबिक, राज्याभिषेक समारोह बैंकाक के ग्रैंड पैलेस के चक्रबत बिमान शाही आवास में हुआ। समारोह की शुरुआत राजा को पवित्र जल से स्नान कराने से हुई, जहां थाईलैंड के 76 प्रांतों से एकत्र किए गए पवित्र जल को 66 वर्षीय राजा के सिर, पीठ और हाथों पर डाला गया।

इसके बाद सुनहरे परिधान व कढ़ाई वाली पैंट पहने राजा ने अभिषेक अनुष्ठान में भाग लिया जो ग्रैंड पैलेस के बेजल दास्किन थ्रोन हॉल में हुआ। राज्याभिषेक समारोह में प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओ-चा सहित आठ प्रमुख थाई नेता शामिल हुए।

राज्याभिषेक समारोह का समापन राजा के त्रिकोण के आकार वाले नौ परतों वाले छत्र के नीचे बैठने के साथ हुआ, जिसका मतलब है कि अब वह आधिकारिक रूप से अपने दिवंगत पिता भूमिबोल अदुल्यदेज के उत्तराधिकारी बन गए हैं।

राजा को 7.3 किलोग्राम वजनी सोने का मुकुट भी पहनाया गया।

सीएनएन के मुताबिक, अधिकांश थाई लोगों के लिए यह पहला राज्याभिषेक रहा जिसे उन्होंने देखा। दिवंगत राजा भूमिबोल की 5 मई 1950 को ताजपोशी हुई थी।

भूमिबोल ने 70 सालों तक देश पर शासन किया।

राजा Maha Vajiralongkorne ने आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में पढ़ाई की है और दो बेटियों व पांच बेटों के पिता हैं।

राजा ने बुधवार को ऐलान किया कि उन्होंने अपनी बॉडीगार्ड जनरल सुथिदा वजीरालोंगकोर्न ना अयुध्या से शादी रचा ली है, जो उनकी चौथी पत्नी बनीं।

सात दशक बाद पहला राज्याभिषेक

औपचारिक राज्याभिषेक का छह अप्रैल से चल रहा हिंदू और बौद्ध रीतियों वाला महा-अनुष्ठान छह मई को पूरा होगा. इसी के साथ, Thailand के ‘चक्री’ राजवंश की परंपरा के अनुसार, महा वजिरालोंगकोर्न तब ‘रामा (राम) दशम’ कहलायेंगे.

Thailand राजमहल कार्यालय द्वारा एक जनवरी 2019 को घोषित कार्यक्रम के अनुसार, अनुष्ठान का आरंभ शनिवार छह अप्रैल को हुआ. सारे समय राशिफल के आधार पर ज्योतिषियों ने तय किए हैं. उनके बताये के अनुसार दोपहर 11:52 से 12:38 बजे के बीच के शुभकाल में थाईलैंड के सभी 76 प्रदेशों के विभिन्न जलस्रोतों से पानी जमा किया गया. स्थानीय मुख्य मंदिरों के बौद्ध भिक्षुओं ने अपने-अपने क्षेत्र के पानी का शुद्धिकरण किया. आठ से 12अप्रैल के बीच इस पानी के कलश देश भर के प्रमुख बौद्ध मंदिरों में पहुंचाये गये. वहां इस पानी को पवित्र जल बनाया गया.

18 अप्रैल को सभी प्रदेशों से आये पवित्र जल को गृहमंत्रालय के भवन में आपस में मिलाया गया. मिश्रित पानी को उसी दिन शाम सवा पांच बजे, एक जुलूस में बैंकॉक के एक सबसे पुराने मंदिर ‘वाट सुथात’ पहुंचा कर वहां अंतिम पवित्रीकरण के लिए रखा गया. अगले दिन इस पवित्रजल को एक बार फिर एक जुलूस के साथ बैंकॉक के पन्नाधारी (इमेरल्ड) बुद्ध भगवान मंदिर में पहुंचाया गया. वहां चार मई को उसका शाही शुद्धिकरण होने के साथ संभवतः गंगाजल भी उसमें मिलाया जायेगा.

22 अप्रैल को तीसरे पहर चार बजे, थाईलैंड के विभिन्न बौद्ध मंदिरों के दस भिक्षुओं ने, पन्नाधारी बुद्ध भगवान मंदिर में पूजा और श्लोकोच्चार के साथ भावी राजकीय फलक (लकड़ी या धातु से बना शाही चिन्ह) को अपना शुभाशीर्वाद दिया. अगले दिन यानी 23 अप्रैल को प्रातः 8:19 बजे, इसी मंदिर में वह स्वर्णिम राजकीय फलक बनाने और उस पर वह राजकीय प्रतीक उत्कीर्ण करने का काम शुरू हुआ, जो नये राजा ‘राम दशम’ की निजी पहचान होगा.

-एजेंसियां

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