एडवांस्ड हार्ट फेल्यॉर में मरीज की जान बचा सकती है Telemetering

जर्मनी स्थित इंस्टिट्यूट फॉर क्वालिटी एंड इफिसिएंसी इन हेल्थ केयर द्वारा हाल ही की गई एक रिसर्च में यह देखने को मिला कि एडवांस्ड हर्ट फेल्यॉर की स्थिति में Telemetering मरीज की जान बचा सकती है, जिससे इस बात की संभावना बढ़ी है कि नई तकनीक के द्वारा हार्ट फेल्यॉर को भी सफलतापूर्वक मैनेज किया जा सकता है और एडवांस्ड हार्ट फेल्यॉर में Telemetering से मरीज की जान बच सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक की मदद से पहले ही इस बीमारी की संभावना का पता लगने से मरीज को हॉस्पिटलाइज्ड करने की जरूरत नहीं रहेगी। मरीज के डिकंपेनसेशन की पहचान करके, उसकी लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। साथ ही जरूरी और डियूरिक दवाइयां दी जा सकती हैं। इंस्टिट्यूट द्वारा यह शोध इस इस बात को जानने के उद्देश्य से किया गया कि आखिर डेटा सपोर्टेड, टाइम मैनेजमेंट, मेडिकल टेलीमेडिकल सेंटर के सहयोग से समय पर प्रबंधन एडवांस्ड हार्ट फेल्यॉर में कितना सहायक है।
शोध में सामने आया कि बिना Telemetering के देखभाल करने की तुलना में कार्डियोवस्कुलर डिजीज के मरीजों की डेथ Telemetering के दौरान कम होती है। इस जांच के दौरान रिसर्च को चार अलग-अलग पैरामीटर्स पर किया गया, जिसमें मृत्यु के सभी कारणों पर अलग से स्टडी की गई। हालांकि, यदि कोई केवल उन दो अध्ययनों पर विचार करता है, जिसमें मरीज स्वयं दिन में कम से कम एक बार अपनी Telemetering करता है तो डेटा के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इससे भी मरीजों की मृत्युदर में कमी आती है। हालांकि यहां यह स्थिति लागू की जाती है मरीज किसी भी तरह की मानसिक बीमारी का शिकार या अवसादग्रस्त ना हो।
शोधकर्ताओं के अनुसार हार्ट फेल्यॉर में दो तरह की Telemetering की जा सकती है…
हार्ट फेल्यॉर की स्थिति में हार्ट की ब्लड फिल करने और ब्लड को पंप करने की क्षमता बेहद कम हो जाती है। अगर हार्ट फेल्यॉर क्रोनिक हो तो ऑर्गेनिज़म को को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और आराम या व्यायाम की स्थिति में मेटाबॉलिज़म को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति आमतौर पर वयस्कों में देखी जाती है और जर्मनी में तो एडल्ट्स की मौत का एक बड़ा कारण हार्ट फेल्यॉर ही है।
इस स्थिति से बचने के लिए क्लोज मॉनिटरिंग जरूरी है। यदि संचार तकनीकों का उपयोग शारीरिक डेटा को संचारित और मॉनिटर करने के लिए किया जाता है तो इसे Telemetering कहा जाता है। इस तकनीक में सेहत से जुड़े कम से कम डेटा को मॉनिटर किया जाता है, जिसमें हार्ट रेट और रिद्म, वेट, ब्लड प्रेशर ना केवल डॉक्टर द्वारा बल्कि Telemetering सेंटर द्वारा भी मॉनिटर किया जाता है। दूसरी तरफ मरीज के लिए एक छोटा-सा ट्रेनिंग प्रोग्राम उपलब्ध है, जिसमें कुछ दिन के प्रशिक्षण के बाद मरीज अपनी जांच खुद कर सकते हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी सेहत का डेटा एक्सपर्ट्स को ट्रांसफर कर सकते हैं।
-एजेंसियां

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