संस्कृति विवि में ‘इमरजिंग ट्रेंड्स ऑफ टीचिंग’ पर मंथन

मथुरा। संस्कृति विश्विविद्यालय द्वारा ब्रज उत्थान अभियान के तहत ‘इमरजिंग ट्रेंड्स आफ टीचिंग’ को लेकर विश्व विद्यालय के सभागार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के सीबीएससी स्कूलों के शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यशाला में वक्ताओं ने वर्तमान दौर में शिक्षा के उभरते तरीकों को लेकर गंभीरता से मंथन किया और पाया कि शिक्षा का वह तरीका जिससे विद्यार्थी अच्छे नागरिक बनने के साथ देश के निर्माण में योगदान करने के लिए तैयार हों, सबसे सही है। इस मौके पर जिले के शिक्षकों सम्मानित भी किया गया।

मुख्य अतिथि एमएसएमई दिल्ली के उप निदेशक वी. रामाकृष्णन ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को बताएं कि भारत किस गति से आगे बढ़ रहा है। उनको देश के सफल विद्यार्थियों जिन्होंने विश्व में बड़े-बड़े मुकाम हासिल किए हैं, उनका उदाहरण देकर सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। शिक्षकों से उन्होंने कहा कि आपके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है, आपको विद्यार्थियों की योग्यता और विशेषता को पहचानना होगा और उसके अनुरूप उनको तैयार करना होगा ताकि वे उस विशेषता को दक्षता में बदल सकें। उन्होंने कहा कि हमें नई-नई टेक्नोलॉजी स्वीकार करने के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना होगा।

कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि ल्यूपिन ह्यूमन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन (Lupine Human Welfare and Research Foundation)  के एक्सीक्यूटिव डाइरेक्टर सीताराम गुप्ता ने कहा कि देश के विकास में शिक्षा का क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। शिक्षकों द्वारा देश के भविष्य का निर्माण किया जाता है। विद्यार्थियों के सामने उनका लक्ष्य स्पष्ट हो, उनकी सोच स्पष्ट और बड़ी हो तो देश आगे बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि जब पैशन होता है तो टार्गेट हासिल करना आसान हो जाता है लेकिन कोई भी टार्गेट बिना एक्शन के हासिल नहीं किया जा सकता है। सेंटपाॅल स्कूल की शिक्षिका अरुणा जौहरी ने कहा कि हमें नए तरीकों के इस्तेमाल में कई सावधानियां भी बरतनी होंगी। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में ऑनलाइन शिक्षा के दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। मेरी नजर में आमने-सामने बैठकर दी जाने वाली शिक्षा ही प्रभावशाली है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपनी इच्छाएं बच्चों को न थोपकर उन्हें अपने सपने के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा परंपरागत विषयों से परे अनेक विषय ऐसे हैं जिनमें विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुरूब बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं। नंबरों से ज्यादा बच्चों को ज्ञान हासिल करने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने ऩई शिक्षा नीति का समर्थन करते हुए कहा इससे बच्चे करके सीखेंगे और सीखकर याद करेंगे।

इससे पूर्व संस्कृति विवि के सीईओ रिसर्च डॉ. राणा सिंह ने उपस्थित शिक्षकों को कार्यशाला के विषय के संबंध में विस्तार से बताया। उन्होंने शिक्षा के उभरते तरीकों के बारे में विश्वस्तरीय शोधों का हवाला देते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना और सीखना जरूरी हो गया है। कार्यशाला में जिले के लगभग 100 से अधिक शिक्षकों को स्मृति चिह्न देकर और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।

कार्यशाला में संस्कृति विवि की विशेष अधिकारी श्रीमती मीनाक्षी शर्मा भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के आयोजन में संस्कृति विवि के मार्केटिंग डाइरेक्टर अमित अग्रवाल, विजय सक्सैना, गायत्री शर्मा, विष्णु शर्मा का विशेष योगदान रहा।
– Legend News

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