तत्सम्यक मनु का कालजयी उपन्यास ‘the नियोजित शिक्षक’

देश में लाखों लेखक हैं, लेकिन उनमें हम कुछ को ही जान पाते हैं. सप्ताह भर पहले मेरे हाथ लगी भारत के शिक्षकों की गाथा ‘the नियोजित शिक्षक’.

हिंदी भाषा में लिखी गयी इस उपन्यास की कहानी, जहाँ शिक्षकों की दुःखभरी ज़िंदगी को व्यक्त करती हैं, वहीं यह उपन्यास भारत के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाने की पद्धति का पोल भी खोलती हैं.

उपन्यास कुछ कथापात्रों के साथ आगे बढ़ती है और हमें जानकारी देती जाती है कि भ्रष्ट सिस्टम के फेर में कैसे ‘आईएएस’ अधिकारी की जान भी सुरक्षित नहीं हैं ?

जैसे-जैसे उपन्यास की कहानी सरकती जाती है, वैसे-वैसे ‘सरकारी और निजी तंत्रों’ की पोल खुलती जाती है और एक समय ऐसा आता है, जब हम पाठक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि-

‘आगे क्या होगा ?’

एकदम सरल भाषा में लिखी गयी यह किताब, जहाँ हिंदी की परिभाषा को नए दौर में ले जाती हैं, वहीं 21 वीं के 21 वें साल में इस उपन्यास को ‘कालजयी’ का ठप्पा भी जल्द लग ही जाएगा।

समीक्षा- इंजीनियर रश्मि ऋषि, साहेबगंज, झारखंड

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