पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य, निकलेंगी बंपर नौकरियां

पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, मोदी सरकार के इस लक्ष्य पर भले ही विपक्षी नेता कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। अर्थशास्त्रियों के भी अपने-अपने दावे हैं मगर इन सबसे परे मोदी सरकार ने अपने लक्ष्य की ओर चलना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक तौर पर करीब डेढ़ दर्जन ऐसे प्रोजेक्ट की सूची तैयार की गई है, जहां बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा।
यहीं से बंपर नौकरियां निकलेंगी। पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य कैसे हासिल होगा, कौन से प्रोजेक्ट शुरु होंगे, नौकरियों का ग्राफ, योग्यता, प्रोजेक्ट की मंजूरी और पूरा होने की अवधि व पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर प्रोजेक्ट आगे बढ़ाना, इन सबके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मोर्चा संभाल लिया है। विशेषज्ञों का एक खास पैनल तैयार किया जा रहा है। पीएमओ की निगरानी में यह पैनल हर प्रोजेक्ट पर नजर रखेगा।
प्रारंभिक तौर पर इन क्षेत्रों में होगा भारी निवेश
रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे, रेलवे, पावर, पेट्रोलियम, कोल सेक्टर, शहरी विकास, स्टील, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, दूरसंचार, फर्टिलाइजर, शिपिंग इंडस्ट्री, एटोमिक एनर्जी, माइन्स, सिविल एविएशन, भारी उद्योग और डिफेंस को निवेश के प्रारंभिक क्षेत्रों में शामिल किया गया है। अगले पांच साल में रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मंत्रालय के तहत 125000 किमी लंबी सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए 80 हजार 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भारतमाला (5.37 लाख करोड़) और सागरमाला (8 लाख करोड), इन दोनों योजनाओं का दायरा अब बढ़ाया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी मिशन में पहले 203.172 करोड़ रुपये का निवेश होना था, ये भी कई गुणा बढ़ाया जा सकता है।
नीति आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक पीएमओ हर छोटे बड़े प्रोजेक्ट पर नजर रख रहा है। पिछले साल जब यह बात सामने आई कि हाइवे, रेलवे, आईटी, विनिर्माण और शहरीकरण के कई प्रोजेक्ट तय समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं तो एक एक्स्पर्ट पैनल ने इनका गहराई से अध्ययन किया। सामने आया कि ऐसे प्रोजेक्ट पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की राह में बाधा बन सकते हैं।
ये प्रोजेक्ट तय समय से पहले ही पूरे कर लिए जाएं, इसके लिए प्रोजेक्ट डिजाइनर, मेनेजमैंट कन्सलटेंट, डीपीआर तैयार करने वाले, प्रोजेक्ट मैनेजर (स्थानीय) और ग्लोबल प्रोजेक्ट मेनेजमैंट के जानकार भर्ती करने का सुझाव दिया गया है।
नीति आयोग ने इसके लिए आगामी दस वर्ष में 90 लाख से ज्यादा कुशल प्रोजेक्ट मैनेजर भर्ती करने की बात कही है। केंद्र सरकार अगले पांच साल में बुनियादी सुविधाओं पर लगभग 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी।
केंद्र से लेकर जिला स्तर तक इस प्रोजेक्ट में कारोबारी सुगमता का माहौल बना रहे, इसके लिए पीएमओ ने एक नेटवर्क तैयार कर दिया है। इसमें प्रोजेक्ट, उससे जुड़ी नौकरियां, मंजूरी, समय-सीमा और दिक्कतें आदि, हर बात का विवरण रहेगा। कौन से प्रोजेक्ट में किस वजह से विलंब हुआ, पीएमओ इन सब जानकारियों का अपडेट लेगा।
इन क्षेत्रों में भी नौकरियों की भरमार रहेगी
सरकार ने हाईवे के साथ-साथ रेलवे, एयरवे और इनलैंड वॉटरवे के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर काम शुरू किया है। ‘उड़ान योजना’ के तहत, अगले पांच साल में देश के छोटे शहरों को, हवाई यातायात से जोड़ दिया जाएगा। ‘भारतमाला परियोजना’ के तहत वर्ष 2022 तक लगभग 35 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण और उनका अपग्रेडेशन होगा। ‘सागरमाला परियोजना’ के द्वारा देश के तटीय क्षेत्रों में और बंदरगाहों के आसपास, बेहतर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। नीति आयोग के अधिकारी बताते हैं कि इन क्षेत्रों में ही लाखों नौकरियों मिल सकती हैं।
पीएमओ इस तरह रखेगा नजर
इसके लिए कई नई विंग गठित की जा रही हैं। प्रोग्राम इंम्पलीमेंटेशन विंग, टारगेट प्रगति जांचने वाली शाखा, प्रोजेक्ट का समन्वय एवं खर्च, समयावधि पर नजर, एक हजार करोड़ और उसके ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए अलग विंग और इससे कम राशि वाले प्रोजेक्ट के लिए अलग से शाखा गठित की जाएगी। नीति आयोग की सिफारिश पर कमेटी ऑन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नेशनल इन्स्टिटूशन ऑफ चार्टेड प्रोफेशनल विंग और डे टू डे प्रोजेक्ट रिपोर्ट लेने के लिए भी एक अलग से विंग खड़ी की जाएगी। इन सबका काम प्रोजेक्ट से जुड़ी हर छोटी बड़ी बात पर नजर रखना रहेगा।
-एजेंसियां

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