तामसिक भोजन भी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है बशर्ते…

यदि आप तामसिक भोजन का उपयोग भी सही तरीके से और सीमित मात्रा में करेंगे तो यह आपको मौसमी बीमारियों के साथ-साथ कोरोना से भी बचा सकता है।
बरसात में रंग बदलता मौसम इस बार डरा रहा है, वजह है कोरोना वायरस। कभी-गर्मी, कभी ठंड, कभी तेज धूप तो कभी झमाझम बारिश…जैसे ही मौसम रंग बदलता है।
इस बार की बरसात में खुशी से ज्यादा कोल्ड, कफ और फ्लू की चिंता सताने लगती है। फिर इस बार तो कोरोना संक्रमण का डर भी है। इस डर के चलते एक छींक आने पर भी मन में दहशत होने लगती है, अब इस तरह के डर से तो बाहर निकलना ही है तो इसके लिए ऐसे तामसिक भोजन को अपने खाने में सम्मिलित कर लें, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
क्या होता है तामसिक भोजन?
– आयुर्वेद में गुणों के आधार पर भोजन को तीन अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया है। इन्हें सत-तम और रज गुण के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। ऐसा भोजन जो मन को शांत रखता है, वह सात्विक भोजन की श्रेणी में आता है। जिस भोजन को अधिक मात्रा में खाने के बाद शरीर से अप्रिय गंध आती है और जो विकृतियों को बढ़ाने वाला होता है, उसे तामसिक भोजन कहा जाता है। जिस भोजन से इच्छाओं की वृद्धि होती है, उसे राजसिक श्रेणी में रखा गया है।
क्यों दे रहे हैं सलाह?
आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अभी हमने आपसे बताया कि तामसिक भोजन करने से शरीर से अप्रिय गंध आती है और यह विकारों में वृद्धि करने वाला होता है, ऐसे में हम आपको यह भोजन करने की सलाह क्यों दे रहे हैं?
तो यहां आपको गौर करना होगा कि हमने आपसे कहा है यदि आप इस भोजन का अधिक मात्रा में उपयोग करेंगे तब आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ेगा। यानी सीमित मात्रा में इसके उपयोग से आप इसके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
क्या है प्रभावी तामसिक भोजन?
मशरूम, लहसुन, प्याज, मीट और मदिरा जैसे पदार्थ तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं। ऐसा इनके स्वाद, गंध और शरीर पर प्रभाव के कारण हैं। हम आपको मीट और मदिरा के सेवन की सलाह नहीं दे रहे हैं। हम केवल मशरूम, लहसुन और प्याज की बात कर रहे हैं क्योंकि इस महामारी के दौर में मीट और मदिरा का शरीर पर कितना बुरा असर हो सकता है, ये बातें हम आपको पहले भी बता चुके हैं।
मीट जहां कोरोना संक्रमण की वजह हो सकता है, वहीं मदिरा आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करने के काम करती है इसलिए इन दोनों ही तामसिक पदार्थों से हमेशा दूरी ही भली है। बात करते हैं मशरूम, प्याज और लहसुन की।
इन तामसिक भोजन की खूबियां
मशरूम विटामिन-डी प्राप्ति का एक प्राकृतिक तरीका है। आप इस सब्जी के माध्यम से अपने शरीर में विटमिन-डी की कमी को काफी हद तक पूरा कर सकते हैं। हां, इस बात का ध्यान रखें कि इसे पचाना शरीर के आसान नहीं होता है इसलिए जब भी इसका सेवन करें हमेशा दोपहर के भोजन में ही करें। या फिर सोने से कम से कम 4 घंटे पहले इसे खा लें।
प्याज और लहसुन में एंटिफंगल, एंटिवायरल और एंटिबैक्टीरिल गुण पाए जाते हैं। यानी इन दोनों का यदि सीमित मात्रा में और नियमित रूप से उपयोग किया जाए तो ये शरीर में फंगस, वायरस और बैक्टीरिया से होनेवाले किसी भी तरह को रोग को पनपने नहीं देते हैं।
आप अपने भोजन में इन फूड्स का उपयोग कच्चा या पकाकर कर सकते हैं। यह आपकी अपनी पसंद पर निर्भर है लेकिन इनकी मात्रा सीमित और संतुलित रखें। यानी ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक समय तो आपने अधिक मात्रा में इनका सेवन कर लिया और एक समय बिल्कुल भी नहीं खाया।
-एजेंसियां

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