तालिबान ने बिजली कंपनियों को नहीं किया भुगतान, अंधेरे में डूबा अफगानिस्‍तान

अफगानिस्तान में जबसे तालिबान का शासन आया है तब से यहां के नागरिकों को आए दिन किसी न किसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं समस्याओं में  एक है बिजली संकट। जानकारी के अनुसार राजधानी काबुल समेत देश के कुछ और हिस्सों में बुधवार से बिजली न होने की वजह से ब्लैकआउट सी स्थिति हो गई है। आलम ये है कि स्थानीय लोग अंधेरे में इधर से उधर भटक रहे हैं। इस संकट के लिए तालिबानी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि तालिबान की तरफ से अभी तक मध्य एशिया के बिजली सप्लायर्स को बकाया अदा नहीं किया गया है और इसी वजह से पावर क्राइसिस का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार अफगानिस्तान  में 80 फीसदी बिजली पड़ोसी देशों जैसे उजबेकिस्तान, तजाकिस्तिान और तुर्केमिनिस्तान से आता है। जिस समय तालिबान ने अशरफ गनी की सरकार को हटाकर काबुल पर कब्जा किया उस समय ही देश बिजली कंपनियों के कर्ज के बोझ से दबा था। अब कहा जा रहा है कि तालिबान सप्लायर्स को बकाया राशि अदा करने में असफल है। इसकी वजह है कि वो उपभोक्ताओं से फंड इकट्ठा नहीं कर पाए हैं और साथ ही फंड की कमी के चलते भी बिल अदा करने में असमर्थ हैं।
देनदारों की संपत्ति बेचेगा तालिबान
अफगानिस्तान का बिजली निकाय जो अब तालिबान के नियंत्रण में है, मध्य एशियाई देशों को लगभग 62 मिलियन डॉलर के बिजली बिलों का भुगतान करने के लिए अपने देनदारों की संपत्ति को बेचने पर विचार कर रहा है। DABAS के कार्यवाहक प्रमुख सफीउल्लाह अहमदजई ने समाचार एजेंसियों को बताया कि योजना को जल्द लागू किया जाएगा। बिजली निर्यातक देशों को आपूर्ति में कटौती से रोकने के लिए सभी ऋणों का भुगतान किया जाएगा, और तभी अफगानिस्तान को निर्बाध बिजली कनेक्शन का आनंद मिलेगा।
-एजेंसियां

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