धमाकों के लिए तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क जिम्मेदार: सालेह

अफ़ग़ानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने काबुल में हुए धमाकों के लिए तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने कहा कि “जो सबूत हमारे सामने हैं, वो ये कह रहे हैं कि इस्लामिक स्टेट खुरासान की तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क में गहरी जड़ें हैं, ख़ासकर वे लोग जो काबुल में सक्रिय हैं.”
उन्होंने कहा, “इस्लामिक स्टेट से संबंधों से तालिबान का इंकार वैसा ही है जैसे चरमपंथी संगठन क्वेटा शुरा से संबंधों से पाकिस्तान का इनकार करना है. तालिबानियों ने अपने आकाओं से अच्छे से सीखा है.”
क्वेटा शुरा बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में सक्रिय एक चरमपंथी संगठन है. माना जाता है कि अफ़ग़ान तालिबान के नेता इस संगठन को चलाते हैं.
अमेरिका को काबुल एयरपोर्ट पर आईएस के और हमलों की है आशंका
अमेरिकी कमांडर कथित इस्लामिक स्टेट के और हमलों के लिए अलर्ट हो गए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख जनरल फ़्रैंक मैकेन्ज़ी का कहना है कि काबुल एयरपोर्ट पर रॉकेट और गाड़ियों में रखे बम से हमले की आशंका है.
जनरल मैकेन्ज़ी ने कहा, “सावधानी के साथ हम हर संभव कोशिश कर रहे हैं ताकि पूरी तरह तैयार रहें.”
इस बीच अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी फ़ौज की वापसी की प्रक्रिया तेज़ हो गई है. 31 अगस्त से पहले तालिबान से हुए समझौते के मुताबिक अमेरिकी फ़ौज को देश छोड़ देना है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस समय सीमा को बढ़ाया नहीं है. उन्होंने कहा है कि हमलों के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की प्रक्रिया जारी रहेगी.
उन्होंने ये भी कहा कि गुरुवार को हुए हमले का बदला वो ज़रूर लेंगे. उन्होंने पेंटागन को आदेश दिया है कि ISIS-K पर हमले की योजना बनाई जाए.
आईएसआईएस-के इस्लामिक स्टेट का क्षेत्रीय गुट है जिसने काबुल में हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली है. इस हमले में कम से कम 90 लोगों की मौत हुई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इस्लामिक स्टेट ने कथित तौर पर दावा किया है कि उसके एक आत्मघाती हमलावर ने इस हमले को अंजाम दिया जिसमें अमेरिकी सेना के साथ काम करनेवाले अनुवादकों और सहयोगियों को निशाना बनाया गया है.
-एजेंसियां

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