ताइवान ने कहा, चीन का ‘एक देश-दो व्यवस्था’ वाला प्रस्ताव स्वीकार नहीं

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा है कि वो चीन के ‘एक देश, दो व्यवस्था’ वाले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगी.
चीन ने ताइवान के सामने यह राजनीतिक फॉर्मूला पेश किया था, जिसे ताइवान ने ख़ारिज कर दिया है. ताइवान का कहना है कि यह फॉर्मूला हॉन्ग कॉन्ग में पूरी तरह से नाकाम हो गया है, ऐसे में इसे स्वीकार करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.
चीन दावा करता है कि ताइवान उसका हिस्सा है और ज़रूरत पड़ी तो बल का प्रयोग कर अपने अधीन कर सकता है. ताइवान का कहना है कि वो एक स्वतंत्र देश है.
ताइवान में 11 जनवरी को चुनाव है और साई फिर से चुनावी मैदान में हैं. नए साल के मौक़े पर अपने भाषण में साई ने कहा कि ताइवान एक संप्रभु देश है और वो चीन के दबाव से मुक्त होकर लोकतंत्र और स्वतंत्रता को कायम रखेगा.
ताइवान के चुनावी कैंपेन में चीन का डर सबसे बड़ा मुद्दा है. चीन शासित हॉन्ग कॉन्ग में महीनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन के कारण ताइवान के चुनाव में ‘चीन का डर’ बड़े मुद्दे के तौर पर उभरकर सामने आया है.
साई ने कहा, “हॉन्ग कॉन्ग के लोगों ने हमें बता दिया है कि ‘एक देश, दो व्यवस्था’ निश्चित तौर पर नाकाम फॉर्मूला है.”
हॉन्ग कॉन्ग ब्रिटिश उपनिवेश था, जिसे ब्रिटेन ने 1997 में स्वतंत्रता के कुछ ख़ास प्रावधानों के बदले चीन के हवाले कर दिया था.
साई ने कहा, “हॉन्ग कॉन्ग में ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के तहत हालात दिन-ब-दिन बदतर हो रहे हैं. चीन ने शक्ति का दुरुपयोग करते हुए ‘एक देश, दो व्यवस्था’ की विश्वसनीयता को संदिग्ध बना दिया है. ऐसे में इसे स्वीकार करने का सवाल ही पैदा नहीं होता है.”
हॉन्ग कॉन्ग में महीनों से चीन की सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं. चीन इसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है. हॉन्ग कॉन्ग में चीन विरोधी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वायत्तता के प्रावधान के बावजूद चीन इसका उल्लंघन कर रहा है.
ताइवान की संसद ने मंगलवार को चीन के ख़तरे को देखते हुए एंटी-इन्फिल्ट्रेशन लॉ पास किया था. इस क़ानून के पास होने के बाद से ताइवान और चीन में तनाव चरम पर है.
साई का कहना है कि इस क़ानून से ताइवान के लोकतंत्र की रक्षा होगी. उन्होंने यह भी कहा कि इससे चीन से कारोबारी संबंध प्रभावित नहीं होगा. चीन को संदेह है कि साई की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ताइवान को औपचारिक रूप से स्वतंत्र देश बनाने को लेकर काम कर रही है और उसने धमकी दी है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो ताइवान की सरकार के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल किया जा सकता है.
हालांकि साई ने स्वतंत्रता की बात से इंकार किया है और उन्होंने इस बात को दोहराया कि वो चीन के साथ यथास्थिति को एकतरफ़ा होकर बदलना नहीं चाहती हैं.
-BBC

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *