बौद्ध धर्म के सार में Tai Situpa ने कहा- बुद्ध सभी धर्मों के सार को साकार करने के बारे में है

Tai Situpa ने कहा कि बौद्ध धर्म के सार का वर्णन करने का तरीका बहुत ही आसान है। बौद्ध धर्म लगभग एक उपनाम है क्योंकि राजकुमार सिद्धार्थ ने बुद्धत्व को प्राप्त किया और लोगों ने उनके द्वारा दी गई शिक्षा को बौद्ध धर्म कहा। इसमें कुछ भी गलत नहीं है लेकिन यह एक उपनाम है। भारत में अगर आप चाय बेचते हैं तो लोग आपको चायवाला बुलाते हैं। इसलिये बुद्ध के द्वारा दी गई शिक्षा बौद्ध धर्म कहलाई, जैसे जो चाय बेचता है वो चायवाला कहलाता है। पारंपरिक तिब्बत में हम इसे नंगपा संगयेपा कहते हैं। नंग का अर्थ है ‘अंदर’, संगये का अर्थ है ‘बुद्ध’ और पा का अर्थ है ‘वाला’। मैं नहीं जानता कि ‘वाला’ को अंग्रेजी में क्या कहते हैं लेकिन अगर आप अंग्रेज हैं तो आपको इंग्लिशपा कहा जायेगा और इसका अर्थ होता है एक अंग्रेज व्यक्ति।

जब आप बुद्धत्व पा लेते हैं तो इसका ये अर्थ नहीं है कि आपकी पहुंच हर अच्छी चीजों तक हो गई है। आपकी पहुंच हर अच्छी चीजों, बुरी चीजों और निष्पक्ष चीजों यानि हर चीजों के सार तक हो गई है। आप बुद्ध नहीं बन गये जो अच्छी चीजों के अलावा कुछ और नहीं जानते थे। इसलिये परिभाषा के अनुसार बुद्ध सभी धर्मों के सार को साकार करने के बारे में है। सभी धर्मों का सार्र हम सभी में है। मेरे लिए सभी धर्मों का सार मुझमें है और आपके लिए सभी धर्मों का सार आपमें यानि आपके अस्तित्व में समाहित है। इसलिये आपके धर्म का सार किसी और के धर्म के सार से अलग नहीं हो सकता है। अगर आप स्वयं के सार का अनुभव करते हैं तो आप गौतम या शाक्यमुनि की तरह बुद्ध बन सकते हैं लेकिन आप गौतम बुद्ध नहीं कहलायेंगे क्योंकि आपका नाम या उपनाम शाक्यमुनि, गौतम या सिद्धार्थ नहीं है।

ये सब बौद्ध धर्म के बारे में हैं। बेशक हमारे पास हठधर्मिता है, बुनियादी ढ़ांचा है, पदानुक्रम है, अनुष्ठान है और बेशक हम आत्मसंयमी हैं जो पदानुक्रम में और इन सभी चीजों में शामिल नहीं है। इन सबके बावजूद इससे सार को कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कभी-कभी पदानुक्रम, हठधर्मिता और अनुष्ठान जैसे कई स्तरों पर यह हमारे लिए उपयोगी है। उदाहरण के लिए, एक सौ मंजिला इमारत जिसमें 10,000 कमरें हैं, उसमें एक लिफ्ट अवश्य होनी चाहिए लेकिन अगर लिफ्ट, कमरा या फ्लोर का कोई नंबर ना हो तो वहां कार्य करना बहुत मुश्किल होगा। अपने दोस्त के निवास स्थान को ढ़ूंढ़ने के लिए आपको उपर से नीचे तक तलाशना होगा और शायद तब भी आप उन्हें ना तलाश पाएं। इसलिए ऐसी सभी चीजों के लिए पदानुक्रम, अनुष्ठान और संरचना आवश्यक है लेकिन एक बार अगर आप इन सबों से परे चले जाते हैं और जान जाते हैं कि कौन सी चीज क्या है और कौन कहां है तो आपको इसकी आवश्यकता नहीं है।

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