कीर्ति सिंह की नई अभिव्यक्ति-“मेरे मन की….”

परंपरागत कविता से आगे नये भावबोधों की अभिव्यक्ति, नये मूल्यों और नये शिल्प का अन्वेषण है कीर्ति सिंह की ये

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चुनावी कविता: एक खेत में हुए इकट्ठे, साँप, नेवले, चूहे, मोर

एक खेत में हुए इकट्ठे, साँप, नेवले, चूहे, मोर। लोकतंत्र खतरे में है, मचाते जोर जोर से शोर।। कोई बनी

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NCERT का निर्णय, 8वीं कक्षा में पढ़ाई जाएगी अटल जी की कविता

NCERT अटल जी की कविता ‘कदम मिलाकार चलना होगा’ को पाठ्यक्रम में शामिल करेगी नई दिल्‍ली। नेशनल काउंसलिंग ऑफ एजुकेशनल

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उसे खूब मालूम है ज़ुल्म ढाने का तरीका- सलिल सरोज

 उसे खूब मालूम है ज़ुल्म ढाने का तरीका, ज़ख़्म देता है तो उसपर नमक भी रखता है. क्या कर सकेंगे

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सलिल सरोज की कविता: मेरे गाँव की यही निशानी रही

कविता: मेरे गाँव की यही निशानी रही राहों पे बाट जोहती जवानी रही मेरे गाँव  की  यही निशानी रही जो कदम

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